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Chandigarh-Haryana News: स्कूलों में एक्सटेंशन पर छात्रों का भविष्य

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- 22 वर्षों से हर साल एक्सटेंशन पर टिका रहता है बच्चों का भविष्य
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कुलदीप शुक्ला
चंडीगढ़। हरियाणा में शिक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर बड़ा सवाल उठ रहा है कि आखिर कब तक 1032 स्कूलों में बच्चों का भविष्य एक्सटेंशन लेटर के भरोसे चलेगा? राज्य के 1032 अस्थाई व अनुमति प्राप्त स्कूलों को शिक्षा विभाग ने एक बार फिर सिर्फ एक शैक्षणिक सत्र (2025–26) के लिए मान्यता दी है। 2003 के बाद से इन स्कूलों को 22वीं बार एक्सटेंशन मिला है। 31 मार्च 2007 से पहले स्थापित होने के आधार पर इन्हें अस्थाई मान्यता विस्तार मिला है।
इन स्कूलों में लाखों बच्चे नौवीं से बारहवीं तक की कक्षाओं में पढ़ते हैं लेकिन हर साल इनकी परीक्षा और बोर्ड संबद्धता शिक्षा विभाग की मुहर पर टिकी रहती है। जैसे ही सत्र खत्म होता है इनके अस्तित्व पर फिर सवाल खड़ा हो जाता है। इस बार भी यही हुआ। बोर्ड की वेबसाइट पर इन स्कूलों की साइटें बंद पड़ी थीं क्योंकि विभाग से एक्सटेंशन लेटर नहीं आया था। एनरोलमेंट फॉर्म भरने की आखिरी तारीख (8 नवंबर 2025) नजदीक आने के बावजूद स्कूल बोर्ड से जुड़ नहीं पा रहे थे। आखिरकार विभाग ने साल दर साल एक्सटेंशन सिस्टम जारी रखते हुए अस्थाई स्कूलों को एक और साल का जीवनदान दे दिया है।
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स्थाई मान्यता क्यों नहीं?
राज्य में शिक्षा विभाग पिछले 22 सालों से इन स्कूलों को स्थाई मान्यता देने से बचता आ रहा है। इसकी मुख्य वजह है भूमि और भवन संबंधी मानक पूरे न होना, फायर और सुरक्षा प्रमाणपत्र की प्रक्रिया लंबित रहना और शिक्षा के अधिकार (आरटीई) के बाद जारी नई शर्तों का लागू न हो पाना।
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कागजी अधूरेपन की सजा भुगत रहे स्कूल
प्राइवेट स्कूल संघ के प्रधान सत्यवान कुंडू के मुताबिक ये स्कूल स्थाई मान्यता के लिए सरकारी नीतियों के चक्कर में कागजी अधूरेपन की सजा भुगत रहे हैं जबकि बच्चों की पढ़ाई नियमित रूप से चल रही है। शिक्षक नियुक्त हैं और परिणाम भी बेहतर आते हैं। इनके लिए निर्धारित जमीन की शर्त को कम करना चाहिए।

स्थाई करने का रास्ता क्या है?
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय बरवाला से सेवानिवृत्त लेक्चरर चमन लाल कौशिक का कहना है कि सरकार को इन स्कूलों के लिए एक विशेष नीति बनानी चाहिए जिसमें स्कूलों को जरूरी मानक पूरे करने के लिए एक निश्चित समय सीमा दी जाए। जो स्कूल नियमों का पालन कर लें उन्हें स्थाई मान्यता मिले और जो बार-बार शर्तें तोड़ें उनकी मान्यता समाप्त कर दी जाए।




प्रदेशभर के इन 1032 स्कूलों की मान्यता को लेकर बैठक कर चुका हूं। इन स्कूल संचालकों को मान्यता के लिए अनिवार्य दस्तावेजों के साथ मानक पूरे करने के निर्देश दिए हैं। आगामी शैक्षणिक सत्र तक मानक पूरे करने वाले स्कूलों को मान्यता मिलेगी और मानक पूरे न करने वाले स्कूलों पर ताला लगेगा।



महिपाल ढांडा, शिक्षा मंत्री
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