{"_id":"6abd1903eed8c65ba502d26d","slug":"first-demoted-now-reinstate-the-punishment-of-withholding-the-increment-chandigarh-haryana-news-c-16-1-pkl1089-1137356-2026-09-30","type":"story","status":"publish","title_hn":"Chandigarh-Haryana News: पहले डिमोट किया, अब बहाल कर दो इंक्रीमेंट रोकने की सजा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Chandigarh-Haryana News: पहले डिमोट किया, अब बहाल कर दो इंक्रीमेंट रोकने की सजा
विज्ञापन
- कैथल में 12 पेड़ों की अवैध कटाई, रिकॉर्ड में हेराफेरी, निर्दोष को आरोपी बनाने के मामले में प्रधान मुख्य वन संरक्षक ने पलटा फैसला
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। कैथल में 12 पेड़ों की अवैध कटाई, निर्दोष को आरोपी बनाने और सरकारी रिकॉर्ड में हेराफेरी के मामले में पदावनत (डिमोट) वन दरोगा सुरेश कुमार को मूल पद पर बहाल कर दिया गया है। वन संरक्षक उत्तरी परिमंडल अंबाला जितेंद्र अहलावत ने पांच साल के लिए डिमोट किया था। वहीं अपील में प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख डॉ. केसी मीना ने सजा बदलकर मूल पद पर बहाल करते हुए दो वार्षिक वेतन वृद्धियां रोकने का दंड दिया।
विभागीय जांच में सुरेश कुमार पर अवैध कटाई छिपाने, फर्जी वन अपराध रिपोर्ट तैयार कराने, निर्दोष रामकुमार को आरोपी बनाने, सरकारी रिकॉर्ड में आरोपी की जगह खुद हस्ताक्षर करने और सक्षम अधिकारी की मंजूरी के बिना जुर्माना जमा कराने के आरोप साबित हुए थे। 12 पेड़ों की कटाई को स्वीकृत कटाई दिखाकर अधिकारियों और जांच टीम को गुमराह करने की बात भी सामने आई थी। इसके आधार पर जितेंद्र अहलावत ने 12 जून को सुरेश कुमार को वन दरोगा से घटाकर वन रक्षक (एफपीएल-3) बनाने का आदेश दिया। पांच साल तक पदोन्नति का लाभ भी नहीं मिलना था। एक अन्य शिकायत में पेड़ कटवाने के बदले 80 हजार रुपये मांगने का आरोप भी था।
वन दरोगा ने की थी अपील
सुरेश कुमार ने 13 जुलाई को इस आदेश के खिलाफ अपील की। 24 अगस्त को व्यक्तिगत सुनवाई में उन्होंने कहा कि काटे गए पेड़ों की कीमत सरकारी खजाने में जमा हो चुकी है इसलिए सरकार को वित्तीय नुकसान नहीं हुआ। समीक्षा में विभाग ने भी माना कि सरकार को वित्तीय हानि नहीं हुई। इसके बाद डॉ. केसी मीना ने 21 सितंबर 2026 को पांच साल की डिमोशन का आदेश बदल दिया। अब सुरेश कुमार वन दरोगा के पद पर बहाल रहेंगे लेकिन दो वार्षिक वेतन वृद्धियां भविष्य पर प्रभाव डाले बिना रोक दी जाएंगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। कैथल में 12 पेड़ों की अवैध कटाई, निर्दोष को आरोपी बनाने और सरकारी रिकॉर्ड में हेराफेरी के मामले में पदावनत (डिमोट) वन दरोगा सुरेश कुमार को मूल पद पर बहाल कर दिया गया है। वन संरक्षक उत्तरी परिमंडल अंबाला जितेंद्र अहलावत ने पांच साल के लिए डिमोट किया था। वहीं अपील में प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख डॉ. केसी मीना ने सजा बदलकर मूल पद पर बहाल करते हुए दो वार्षिक वेतन वृद्धियां रोकने का दंड दिया।
विभागीय जांच में सुरेश कुमार पर अवैध कटाई छिपाने, फर्जी वन अपराध रिपोर्ट तैयार कराने, निर्दोष रामकुमार को आरोपी बनाने, सरकारी रिकॉर्ड में आरोपी की जगह खुद हस्ताक्षर करने और सक्षम अधिकारी की मंजूरी के बिना जुर्माना जमा कराने के आरोप साबित हुए थे। 12 पेड़ों की कटाई को स्वीकृत कटाई दिखाकर अधिकारियों और जांच टीम को गुमराह करने की बात भी सामने आई थी। इसके आधार पर जितेंद्र अहलावत ने 12 जून को सुरेश कुमार को वन दरोगा से घटाकर वन रक्षक (एफपीएल-3) बनाने का आदेश दिया। पांच साल तक पदोन्नति का लाभ भी नहीं मिलना था। एक अन्य शिकायत में पेड़ कटवाने के बदले 80 हजार रुपये मांगने का आरोप भी था।
विज्ञापन
वन दरोगा ने की थी अपील
सुरेश कुमार ने 13 जुलाई को इस आदेश के खिलाफ अपील की। 24 अगस्त को व्यक्तिगत सुनवाई में उन्होंने कहा कि काटे गए पेड़ों की कीमत सरकारी खजाने में जमा हो चुकी है इसलिए सरकार को वित्तीय नुकसान नहीं हुआ। समीक्षा में विभाग ने भी माना कि सरकार को वित्तीय हानि नहीं हुई। इसके बाद डॉ. केसी मीना ने 21 सितंबर 2026 को पांच साल की डिमोशन का आदेश बदल दिया। अब सुरेश कुमार वन दरोगा के पद पर बहाल रहेंगे लेकिन दो वार्षिक वेतन वृद्धियां भविष्य पर प्रभाव डाले बिना रोक दी जाएंगी।
विज्ञापन