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फायरिंग हो सकता था अंतरराष्ट्रीय विवाद, बीएसएफ जवान की बर्खास्तगी सही : हाईकोर्ट
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-शराब पीकर कांस्टेबल ने सीमापार किए थे अपने सर्विस वैपन से 13 फायर
-बर्खास्तगी को चुनौती देने वाली याचिका को हाईकोर्ट ने किया सिरे से खारिज
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। अंतरराष्ट्रीय सीमा पर तैनाती के दौरान अपने सर्विस हथियार से अंधाधुंध गोलीबारी करने के दोषी पाए गए सीमा सुरक्षा बल के कांस्टेबल की बर्खास्तगी को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने सही करार दिया है। कोर्ट ने कहा कि इस तरह की कार्रवाई से दो देशों के बीच गंभीर अंतरराष्ट्रीय विवाद पैदा हो सकता है। कांस्टेबल राजेश कुमार ने अंतरराष्ट्रीय सीमा पर तैनाती के दौरान नशे की हालत में अपने सर्विस हथियार से 13 राउंड फायरिंग करने का दोषी पाए जाने के बाद बीएसएफ से अपनी बर्खास्तगी को चुनौती दी थी। अदालत ने कहा कि अनावश्यक रूप से और वह भी शराब के नशे में गोलीबारी करना बदतर है। सीमा पर तैनात सैनिकों से ऐसे संवेदनशील क्षेत्र में आवश्यक अनुशासन बनाए रखने की अपेक्षा की जाती है ताकि किसी भी देश को किसी भी अनावश्यक और तुच्छ कार्रवाई के आधार पर जांच के दायरे में न लाया जाए।
राजेश कुमार को 2009 में सुरक्षा बल अदालत द्वारा कदाचार का दोषी पाए जाने के बाद बर्खास्त कर दिया गया था। उनके खिलाफ आरोपों में शराब के नशे में ड्यूटी पर रिपोर्ट करना और बाद में बिना उकसावे के 13 राउंड गोलियां चलाना शामिल था। इसे चुनौती देते हुए याची ने तर्क दिया कि उन्हें अपना बचाव तैयार करने के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया गया, क्योंकि कार्यवाही शुरू होने से केवल दो दिन पहले ही उन्हें महत्वपूर्ण साक्ष्य सौंपे गए थे। तर्क दिया कि उनका अपराध स्वीकारोक्ति, जो अनुशासनात्मक कार्रवाई का आधार था, संशोधित नियम के अनुसार ठीक से दर्ज नहीं किया गया था। पीठ ने कहा कि कुमार की कार्यवाही के समय, दोष स्वीकारोक्ति पर हस्ताक्षर करना अनिवार्य नहीं था। इस शर्त को शामिल करने वाला संशोधन घटना के काफी समय बाद, नवंबर 2011 में ही पेश किया गया था। कोर्ट ने कहा कि कुमार को आरोपों की जानकारी थी, उन्होंने दोष स्वीकार करने के परिणामों के बारे में बताया था।
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-बर्खास्तगी को चुनौती देने वाली याचिका को हाईकोर्ट ने किया सिरे से खारिज
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। अंतरराष्ट्रीय सीमा पर तैनाती के दौरान अपने सर्विस हथियार से अंधाधुंध गोलीबारी करने के दोषी पाए गए सीमा सुरक्षा बल के कांस्टेबल की बर्खास्तगी को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने सही करार दिया है। कोर्ट ने कहा कि इस तरह की कार्रवाई से दो देशों के बीच गंभीर अंतरराष्ट्रीय विवाद पैदा हो सकता है। कांस्टेबल राजेश कुमार ने अंतरराष्ट्रीय सीमा पर तैनाती के दौरान नशे की हालत में अपने सर्विस हथियार से 13 राउंड फायरिंग करने का दोषी पाए जाने के बाद बीएसएफ से अपनी बर्खास्तगी को चुनौती दी थी। अदालत ने कहा कि अनावश्यक रूप से और वह भी शराब के नशे में गोलीबारी करना बदतर है। सीमा पर तैनात सैनिकों से ऐसे संवेदनशील क्षेत्र में आवश्यक अनुशासन बनाए रखने की अपेक्षा की जाती है ताकि किसी भी देश को किसी भी अनावश्यक और तुच्छ कार्रवाई के आधार पर जांच के दायरे में न लाया जाए।
राजेश कुमार को 2009 में सुरक्षा बल अदालत द्वारा कदाचार का दोषी पाए जाने के बाद बर्खास्त कर दिया गया था। उनके खिलाफ आरोपों में शराब के नशे में ड्यूटी पर रिपोर्ट करना और बाद में बिना उकसावे के 13 राउंड गोलियां चलाना शामिल था। इसे चुनौती देते हुए याची ने तर्क दिया कि उन्हें अपना बचाव तैयार करने के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया गया, क्योंकि कार्यवाही शुरू होने से केवल दो दिन पहले ही उन्हें महत्वपूर्ण साक्ष्य सौंपे गए थे। तर्क दिया कि उनका अपराध स्वीकारोक्ति, जो अनुशासनात्मक कार्रवाई का आधार था, संशोधित नियम के अनुसार ठीक से दर्ज नहीं किया गया था। पीठ ने कहा कि कुमार की कार्यवाही के समय, दोष स्वीकारोक्ति पर हस्ताक्षर करना अनिवार्य नहीं था। इस शर्त को शामिल करने वाला संशोधन घटना के काफी समय बाद, नवंबर 2011 में ही पेश किया गया था। कोर्ट ने कहा कि कुमार को आरोपों की जानकारी थी, उन्होंने दोष स्वीकार करने के परिणामों के बारे में बताया था।
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