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Chandigarh-Haryana News: अवैध निर्माणों को वैध करने की पॉलिसी पर जवाब में देरी, सरकार पर 10 हजार जुर्माना
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-रेगुलर करने के लिए गए निर्णय इस याचिका पर आने वाले फैसले पर होंगे निर्भर
-हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड पेश करने का हरियाणा सरकार को जारी किया आदेश
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा सरकार द्वारा अवैध निर्माणों को वैध करने के लिए बनाई गई पॉलिसी को चुनौती देने वाली याचिका पर जवाब में देरी करने पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने सरकार पर 10 हजार रुपये जुर्माना लगाया है। साथ ही कोर्ट ने इस नीति से जुड़ा पूरा रिकॉर्ड अगली सुनवाई पर सौंपने का आदेश दिया है।
जनहित याचिका दाखिल करते हुए कृष्ण लाल गेरा ने हाईकोर्ट को फरीदाबाद के हाल के बारे में बताया। याची ने कहा कि लोगों ने अवैध तरीके से निर्माण करते हुए पब्लिक लैंड पर ही कब्जा किया हुआ है। निर्माण करते हुए न तो बिल्डिंग बाय लॉज का ध्यान रखा जाता है और न ही पार्किंग पॉलिसी। इसके खिलाफ हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट भी समय-समय पर आदेश जारी करते आए हैं। इस सब के बावजूद सरकार ने 26 जून 2018 को एक नोटिफिकेशन जारी कर अवैध निर्माणों को वैध करने की घोषणा कर दी। इसके लिए फीस निर्धारित की गई है। याची ने कहा कि ऐसा करना गलत और म्यूनसिपल एक्ट के खिलाफ है। याची ने कहा कि सरकार की इस नोटिफिकेशन को खारिज किया जाना चाहिए और अवैध निर्माण करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
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-हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड पेश करने का हरियाणा सरकार को जारी किया आदेश
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा सरकार द्वारा अवैध निर्माणों को वैध करने के लिए बनाई गई पॉलिसी को चुनौती देने वाली याचिका पर जवाब में देरी करने पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने सरकार पर 10 हजार रुपये जुर्माना लगाया है। साथ ही कोर्ट ने इस नीति से जुड़ा पूरा रिकॉर्ड अगली सुनवाई पर सौंपने का आदेश दिया है।
जनहित याचिका दाखिल करते हुए कृष्ण लाल गेरा ने हाईकोर्ट को फरीदाबाद के हाल के बारे में बताया। याची ने कहा कि लोगों ने अवैध तरीके से निर्माण करते हुए पब्लिक लैंड पर ही कब्जा किया हुआ है। निर्माण करते हुए न तो बिल्डिंग बाय लॉज का ध्यान रखा जाता है और न ही पार्किंग पॉलिसी। इसके खिलाफ हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट भी समय-समय पर आदेश जारी करते आए हैं। इस सब के बावजूद सरकार ने 26 जून 2018 को एक नोटिफिकेशन जारी कर अवैध निर्माणों को वैध करने की घोषणा कर दी। इसके लिए फीस निर्धारित की गई है। याची ने कहा कि ऐसा करना गलत और म्यूनसिपल एक्ट के खिलाफ है। याची ने कहा कि सरकार की इस नोटिफिकेशन को खारिज किया जाना चाहिए और अवैध निर्माण करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
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