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Chandigarh-Haryana News: डीड राइटरों की चेतावनी, पेपरलेस रजिस्ट्री में त्रुटियां दूर नहीं हुईं तो जाएंगे कोर्ट
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- हरियाणा डीड राइटर एसोसिएशन ने पेपरलेस रजिस्ट्री की प्रक्रिया पर उठाए कई सवाल
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़।
हरियाणा सरकार की पेपरलेस रजिस्ट्री की प्रक्रिया को लेकर डीड राइटरों ने सवाल उठाए हैं। शुक्रवार को चंडीगढ़ प्रेसक्लब में पत्रकारों से वार्ता करते हुए डीड राइटरों की राज्य कार्यकारिणी के पदाधिकारियों ने पेपरलेस रजिस्ट्री में अभी भी कई खामियां होने का दावा किया है। कहा कि टोकन का उपयोग आमजन 4 दिनों में नहीं कर पाता तो उसे हर बार टोकन लेने पर 503 रुपये देने होंगे। टोकन की इस प्रक्रिया को खत्म करने की मांग की गई जिससे आमजन पर टोकन को लेकर बेवजह का बोझ न पड़े। कुछ स्थानों पर पेपरलेस रजिस्ट्री कराने के दाैरान एडिटिंग करके फर्जीवाड़ा होने का दावा किया गया और यह भी चेतावनी दी है कि पेपरलेस रजिस्ट्री की प्रक्रिया में त्रुटियां दूर नहीं हुईं तो वह कोर्ट जाएंगे।
हरियाणा डीड राइटर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप शर्मा, सचिव भूपेंद्र सिंह, बरखाराम, बलवान, अश्वनी ने संयुक्त प्रेसवार्ता करके आरोप लगाया कि सबसे जटिल प्रक्रिया यही है कि रजिस्ट्री कराने के दाैरान ओटीपी (वन टाइम पासवर्ड) तहसीलदारों के पास आता है। तहसीलदार फील्ड में होने के कारण ओटीपी न मिलने से काम अटक रहे हैं इसलिए इस प्रक्रिया को सुधार करते हुए सरल बनाया जाए। आरोप लगाया कि सिटीजन आईडी के नाम पर कंप्यूटर ऑपरेटर फर्जीवाड़ा कर रहे हैं और एडिटिंग करके गलत तरीके से रजिस्ट्री करा रहे हैं। अभी भी पेपरलेस रजिस्ट्री की प्रक्रिया में दस्तावेज लिखकर अपलोड किए जा रहे हैं। रजिस्ट्री क्लर्क आमजन से दोबारा से पहचान पत्र के रूप में आधार कार्ड जैसे दस्तावेज मांग रहे हैं। एसोसिएशन के उप प्रधान सुरेंद्र सिंगला, धर्मपाल, ज्ञान सिंह, रिछपाल आदि ने आरोप लगाए हैं कि अभी भी पेपरलेस रजिस्ट्री केवल ऑनलाइन प्रक्रिया जैसी है, दस्तावेज पहले से अधिक लग रहे हैं। सिटीजन के नाम पर टोकन का खेल होने का आरोप लगाते हुए कहा कि आमजन के फर्जी नामों से आईडी बनाकर कंप्यूटर ऑपरेटर रजिस्ट्री करा रहे हैं। इस कार्य को तुरंत रोका जाए। अभी भी पेपरलेस रजिस्ट्री में बीघा, बिस्वा और कनाल, मरला को अपडेट नहीं किया गया है। एसोसिएशन का यह भी आरोप है कि अभी भी रजिस्ट्री कराने की प्रक्रिया इतनी धीमी है कि काम कराने के लिए दो घंटे से लेकर चार दिन तक लग रहे हैं। सरकार से मांग की गई कि सभी समस्याओं की सुनवाई के लिए प्रत्येक जिले से 3-3 डीड राइटरों के प्रतिनिधियों को शामिल करके मुख्यालय पर बैठक हो। मुख्यालय के अधिकारियों ने अभी तक मुलाकात का भी समय नहीं दिया है।
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़।
हरियाणा सरकार की पेपरलेस रजिस्ट्री की प्रक्रिया को लेकर डीड राइटरों ने सवाल उठाए हैं। शुक्रवार को चंडीगढ़ प्रेसक्लब में पत्रकारों से वार्ता करते हुए डीड राइटरों की राज्य कार्यकारिणी के पदाधिकारियों ने पेपरलेस रजिस्ट्री में अभी भी कई खामियां होने का दावा किया है। कहा कि टोकन का उपयोग आमजन 4 दिनों में नहीं कर पाता तो उसे हर बार टोकन लेने पर 503 रुपये देने होंगे। टोकन की इस प्रक्रिया को खत्म करने की मांग की गई जिससे आमजन पर टोकन को लेकर बेवजह का बोझ न पड़े। कुछ स्थानों पर पेपरलेस रजिस्ट्री कराने के दाैरान एडिटिंग करके फर्जीवाड़ा होने का दावा किया गया और यह भी चेतावनी दी है कि पेपरलेस रजिस्ट्री की प्रक्रिया में त्रुटियां दूर नहीं हुईं तो वह कोर्ट जाएंगे।
हरियाणा डीड राइटर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप शर्मा, सचिव भूपेंद्र सिंह, बरखाराम, बलवान, अश्वनी ने संयुक्त प्रेसवार्ता करके आरोप लगाया कि सबसे जटिल प्रक्रिया यही है कि रजिस्ट्री कराने के दाैरान ओटीपी (वन टाइम पासवर्ड) तहसीलदारों के पास आता है। तहसीलदार फील्ड में होने के कारण ओटीपी न मिलने से काम अटक रहे हैं इसलिए इस प्रक्रिया को सुधार करते हुए सरल बनाया जाए। आरोप लगाया कि सिटीजन आईडी के नाम पर कंप्यूटर ऑपरेटर फर्जीवाड़ा कर रहे हैं और एडिटिंग करके गलत तरीके से रजिस्ट्री करा रहे हैं। अभी भी पेपरलेस रजिस्ट्री की प्रक्रिया में दस्तावेज लिखकर अपलोड किए जा रहे हैं। रजिस्ट्री क्लर्क आमजन से दोबारा से पहचान पत्र के रूप में आधार कार्ड जैसे दस्तावेज मांग रहे हैं। एसोसिएशन के उप प्रधान सुरेंद्र सिंगला, धर्मपाल, ज्ञान सिंह, रिछपाल आदि ने आरोप लगाए हैं कि अभी भी पेपरलेस रजिस्ट्री केवल ऑनलाइन प्रक्रिया जैसी है, दस्तावेज पहले से अधिक लग रहे हैं। सिटीजन के नाम पर टोकन का खेल होने का आरोप लगाते हुए कहा कि आमजन के फर्जी नामों से आईडी बनाकर कंप्यूटर ऑपरेटर रजिस्ट्री करा रहे हैं। इस कार्य को तुरंत रोका जाए। अभी भी पेपरलेस रजिस्ट्री में बीघा, बिस्वा और कनाल, मरला को अपडेट नहीं किया गया है। एसोसिएशन का यह भी आरोप है कि अभी भी रजिस्ट्री कराने की प्रक्रिया इतनी धीमी है कि काम कराने के लिए दो घंटे से लेकर चार दिन तक लग रहे हैं। सरकार से मांग की गई कि सभी समस्याओं की सुनवाई के लिए प्रत्येक जिले से 3-3 डीड राइटरों के प्रतिनिधियों को शामिल करके मुख्यालय पर बैठक हो। मुख्यालय के अधिकारियों ने अभी तक मुलाकात का भी समय नहीं दिया है।
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