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Chandigarh-Haryana News: स्कूल के ऊपर से गुजरने वाली हाईटेंशन तारों पर आयोग गंभीर, अधिकारी तलब
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हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने लिया संज्ञान, कहा- बच्चों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने स्कूल के ऊपर से गुजरने वाली हाईटेंशन बिजली की तारों को गंभीर मानवाधिकार का उल्लंघन मानते हुए ऊर्जा विभाग के एसीएस व बिजली कंपनियों के प्रबंध निदेशक को तलब किया है। आयोग ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करें कि अब तक कितने स्कूलों के ऊपर से हाईटेंशन तारों को हटाया जा चुका है।
अध्यक्ष न्यायमूर्ति ललित बत्रा व दोनों सदस्यों कुलदीप जैन व दीप भाटिया के पूर्ण आयोग ने पाया कि 2013 में मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक में निर्णय लिया गया था कि सभी सरकारी स्कूलों, पॉलिटेक्निक, सिविल अस्पतालों एवं पशु चिकित्सालयों के ऊपर से गुजरने वाली हाईटेंशन लाइनें 15 जून 2013 तक हटाई जाएंगी। इसका खर्चा ऊर्जा विभाग वहन करेगा। इसके बावजूद आज तक यह कार्य अधूरा है। आयोग ने अतिरिक्त मुख्य सचिव (पावर), प्रबंध निदेशक (डीएचबीवीएन, यूएचबीवीएन, एचवीपीएनएल), निदेशक माध्यमिक शिक्षा एवं महानिदेशक प्रारंभिक शिक्षा को निर्देश दिए हैं कि दो माह के भीतर आयोग को विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करें कि अब तक क्या कार्रवाई हुई है। साथ ही कब तक हाईटेंशन लाइनों को हटाया जाएगा।
आयोग ने टिप्पणी की है कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि हजारों छात्र प्रतिदिन जान जोखिम में डालकर शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। यह न केवल संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन है, बल्कि संयुक्त राष्ट्र बाल अधिकारों की संधि के भी विपरीत है। आयोग के प्रोटोकॉल, सूचना व जनसंपर्क अधिकारी डॉ. पुनीत अरोड़ा ने बताया कि पूर्ण आयोग की ओर से हस्ताक्षरित इस आदेश की प्रति सभी संबंधित अधिकारियों को कार्रवाई के लिए भेजी जा रही है। इस मामले में अगली सुनवाई छह अगस्त को होगी।
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने स्कूल के ऊपर से गुजरने वाली हाईटेंशन बिजली की तारों को गंभीर मानवाधिकार का उल्लंघन मानते हुए ऊर्जा विभाग के एसीएस व बिजली कंपनियों के प्रबंध निदेशक को तलब किया है। आयोग ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करें कि अब तक कितने स्कूलों के ऊपर से हाईटेंशन तारों को हटाया जा चुका है।
अध्यक्ष न्यायमूर्ति ललित बत्रा व दोनों सदस्यों कुलदीप जैन व दीप भाटिया के पूर्ण आयोग ने पाया कि 2013 में मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक में निर्णय लिया गया था कि सभी सरकारी स्कूलों, पॉलिटेक्निक, सिविल अस्पतालों एवं पशु चिकित्सालयों के ऊपर से गुजरने वाली हाईटेंशन लाइनें 15 जून 2013 तक हटाई जाएंगी। इसका खर्चा ऊर्जा विभाग वहन करेगा। इसके बावजूद आज तक यह कार्य अधूरा है। आयोग ने अतिरिक्त मुख्य सचिव (पावर), प्रबंध निदेशक (डीएचबीवीएन, यूएचबीवीएन, एचवीपीएनएल), निदेशक माध्यमिक शिक्षा एवं महानिदेशक प्रारंभिक शिक्षा को निर्देश दिए हैं कि दो माह के भीतर आयोग को विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करें कि अब तक क्या कार्रवाई हुई है। साथ ही कब तक हाईटेंशन लाइनों को हटाया जाएगा।
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आयोग ने टिप्पणी की है कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि हजारों छात्र प्रतिदिन जान जोखिम में डालकर शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। यह न केवल संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन है, बल्कि संयुक्त राष्ट्र बाल अधिकारों की संधि के भी विपरीत है। आयोग के प्रोटोकॉल, सूचना व जनसंपर्क अधिकारी डॉ. पुनीत अरोड़ा ने बताया कि पूर्ण आयोग की ओर से हस्ताक्षरित इस आदेश की प्रति सभी संबंधित अधिकारियों को कार्रवाई के लिए भेजी जा रही है। इस मामले में अगली सुनवाई छह अगस्त को होगी।
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