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Hindi News ›   Haryana ›   Chandigarh-Haryana News ›   Allegations of arbitrariness in the transfer of employees of the Electricity Distribution Corporation, the High Court sought a reply.

Chandigarh-Haryana News: बिजली वितरण निगम के कर्मचारियों के ट्रांसफर में मनमानी करने का आरोप, हाईकोर्ट ने मांगा जवाब

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- हाईकोर्ट ने याचिका पर हरियाणा सरकार से 22 दिसंबर तक मांगी विस्तृत रिपोर्ट
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चंडीगढ़। पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को निर्देश दिया है कि वह राज्य की दो बिजली वितरण कंपनियों उत्तरी हरियाणा बिजली वितरण निगम व दक्षिणी हरियाणा बिजली वितरण निगम में कर्मचारियों के मनमाने तबादलों पर रोक लगाने और व्यवस्था सुधारने के लिए उठाए जाने वाले कदमों को स्पष्ट रूप से पेश करे।

जस्टिस एचएस बरार की पीठ कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। इनमें आरोप लगाया गया था कि इंटर-यूटिलिटी ट्रांसफर को अधिकारियों की मनमानी इच्छा पर किया जा रहा है और वह भी बिना किसी स्पष्ट नीति, उद्देश्य या मानदंड के। अदालत ने कहा कि सरकार को एक सुसंगत, स्पष्ट और व्यापक नीति बनानी होगी जो या तो ऐसे ट्रांसफर पूरी तरह समाप्त करे या फिर उनके लिए स्पष्ट उद्देश्य, मानदंड और शर्तें निर्धारित करे। न्यायालय ने संबंधित अतिरिक्त मुख्य सचिव से हलफनामा दाखिल करने को कहा है जिसमें अदालत की ओर से उठाए गए सभी मुद्दों पर प्रतिक्रिया और समाधान के लिए प्रस्तावित कदमों का विवरण देना होगा।
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कोर्ट ने कहा कि 1999 में दोनों निगमों के गठन के बाद से ही सरकार का रुख असंगत रहा है। करीब दो दशक से इंटर-यूटिलिटी ट्रांसफर अधिकारियों की मनमर्जी से किए जा रहे हैं जबकि 2019 में नीति जारी होने के बावजूद उसका पालन नहीं हो रहा। अदालत ने साफ किया कि ट्रांसफर भले ही कर्मचारी का अधिकार नहीं है लेकिन एक बार नीति बना दी जाए तो उसका पालन पूरी पारदर्शिता, निष्पक्षता और बिना भेदभाव के होना चाहिए।
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हाईकोर्ट ने कहा कि इस मनमाने रवैये के चलते ट्रांसफर से जुड़े मामलों की संख्या अदालत में लगातार बढ़ रही है जिससे लंबित मामलों पर बोझ बढ़ रहा है। एक स्पष्ट और न्यायसंगत नीति होने से अनावश्यक मुकदमेबाजी कम होगी और कर्मचारियों को अनचाही परेशानियों से राहत मिलेगी। सरकार की ओर से यह अनुरोध किया गया कि इन मामलों को राज्य या जिला स्तर की शिकायत समिति को भेजा जाए लेकिन अदालत ने इसे ठुकरा दिया।




अदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि लोक नियोक्ता के रूप में निगमों का यह दायित्व है कि वे सार्वजनिक हित, पारदर्शिता और संवैधानिक मूल्यों के अनुरूप काम करें। लेकिन लंबे समय से प्रशासनिक कमियां बनी हुई हैं और उन्हें दूर नहीं किया गया है। कोर्ट ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता अपनी वरिष्ठता छोड़ने को भी तैयार हैं, फिर भी उनके प्रस्तावित ट्रांसफर रोके जा रहे हैं।
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