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सरकारी ग्रांट का दुरुपयोग, पूर्व सरपंच पर केस
मंडी अटेली (नारनौल)/ब्यूरो
Updated Mon, 18 Nov 2013 07:26 PM IST
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अदालत के आदेश पर पुलिस ने गांव भौड़ी के पूर्व सरपंच पर सरकारी राशि का दुरुपयोग और मनरेगा स्कीम में गबन करने का मामला दर्ज किया है। इस मामले में ग्राम सचिव को भी आरोपी बनाया गया है। गांव के ही अशोक ने अदालत में इस संदर्भ में शिकायत दर्ज कराई थी।
जानकारी के अनुसार अशोक ने अपनी शिकायत में कहा कि गांव के पूर्व सरपंच जगमोहन, ग्राम सचिव सुरेन्द्र कुमार और अन्य पंचायत सदस्यों ने मिलकर सरकारी राशि का दुरुपयोग किया। वहीं मनरेगा स्कीम के तहत राशि का भी गबन किया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि आरोपियों ने बीआरजीएफ स्कीम के तहत 4 लाख 63 हजार की राशि से आंगनबाड़ी का निर्माण कार्य कराया था।
इस निर्माण कार्य में घटिया व कम गुणवता की सामग्री को इस्तेमाल किया गया। इससे यह इमारत वर्तमान में जर्जर अवस्था में है। एक अन्य आरोप में कहा गया है कि पूर्व सरपंच ने वर्तमान सरपंच को पिछली पंचायत का रिकार्ड नहीं सौंपा। अदालत में लगाए आरोपों में कहा गया कि मनरेगा योजना के तहत सरपंच ने अपने बेटे वेदपाल, विनोद और बहू को भी कार्य करते दर्शाया है। जबकि हकीकत में उन्होंने कोई काम नहीं किया।
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उनके नाम पर झूठे मस्टरोल, जॉब कार्ड व फर्जी बिल बनाकर दर्शाए गए। इसके साथ ही शिकायतकर्ता अशोेक कुमार के भाई असवीर और उसकी पत्नी शर्मिला के नाम पर भी झूठे जॉब कार्ड व फर्जी बिल बनाए गए। मनरेगा योजना में 2 लाख 41 हजार 767 रुपये के दुरुपयोग करने के साथ अन्य कई आरोप लगाए गए है। पुलिस ने अदालत के आदेश पर आरोपियों पर धारा 420, 409, 406, 467, 468, 471 व 120 बी के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
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जानकारी के अनुसार अशोक ने अपनी शिकायत में कहा कि गांव के पूर्व सरपंच जगमोहन, ग्राम सचिव सुरेन्द्र कुमार और अन्य पंचायत सदस्यों ने मिलकर सरकारी राशि का दुरुपयोग किया। वहीं मनरेगा स्कीम के तहत राशि का भी गबन किया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि आरोपियों ने बीआरजीएफ स्कीम के तहत 4 लाख 63 हजार की राशि से आंगनबाड़ी का निर्माण कार्य कराया था।
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इस निर्माण कार्य में घटिया व कम गुणवता की सामग्री को इस्तेमाल किया गया। इससे यह इमारत वर्तमान में जर्जर अवस्था में है। एक अन्य आरोप में कहा गया है कि पूर्व सरपंच ने वर्तमान सरपंच को पिछली पंचायत का रिकार्ड नहीं सौंपा। अदालत में लगाए आरोपों में कहा गया कि मनरेगा योजना के तहत सरपंच ने अपने बेटे वेदपाल, विनोद और बहू को भी कार्य करते दर्शाया है। जबकि हकीकत में उन्होंने कोई काम नहीं किया।
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उनके नाम पर झूठे मस्टरोल, जॉब कार्ड व फर्जी बिल बनाकर दर्शाए गए। इसके साथ ही शिकायतकर्ता अशोेक कुमार के भाई असवीर और उसकी पत्नी शर्मिला के नाम पर भी झूठे जॉब कार्ड व फर्जी बिल बनाए गए। मनरेगा योजना में 2 लाख 41 हजार 767 रुपये के दुरुपयोग करने के साथ अन्य कई आरोप लगाए गए है। पुलिस ने अदालत के आदेश पर आरोपियों पर धारा 420, 409, 406, 467, 468, 471 व 120 बी के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।