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बाढ़सा में कैंसर इंस्टीट्यूट, बहादुरगढ़ में न्यूक्लियर साइंस यूनिवर्सिटी
झज्जर/ब्यूरो
Updated Thu, 26 Dec 2013 11:05 PM IST
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नए साल में हरियाणा को कई सौगात मिलने जा रही है। झज्जर के गांव बाढ़सा में
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बन रहे एम्स-2 कैंपस में नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट के लिए कैबिनेट ने 2035
करोड़ रुपये मंजूर किए हैं।
इसके बाद हरियाणा के कैंसर पीड़ितों को इलाज के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। उन्हें झज्जर में ही एम्स की तर्ज पर तमाम सुविधाएं मिल जाएंगी। यह इंस्टीट्यूट 45 माह में बनकर तैयार हो जाएगा। हालांकि बताया जा रहा है कि ओपीडी पहले ही शुरू कर दी जाएगी।
गौरतलब है कि राष्ट्रीय कैंसर संस्थान को हरियाणा में लाने के लिए सांसद दीपेंद्र हुड्डा पिछले लंबे समय से प्रयास कर रहे थे। पिछले दिनों उन्होंने इस बात का इशारा भी दे दिया था कि राष्ट्रीय कैंसर संस्थान हरियाणा में स्थापित होगा। देश में कैंसर से संबंधित बड़ा अस्पताल टाटा मेमोरियल इंस्टीट्यूट मुंबई में ही है। यह संस्थान टाटा ग्रुप एवं सरकार के सहयोग से कैंसर के इलाज व अनुसंधान के क्षेत्र में कार्य कर रहा है।
सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने इसके लिए प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह एवं केंद्रीय मंत्रिमंडल के मंत्रियों का आभार जताया है। उन्होंने कहा कि गरीब और जरूरतमंद लोगों के लिए राष्ट्रीय कैंसर संस्थान एक वरदान साबित होगा।
आईआईटी का विस्तार केंद्र भी खुलेगा
बाढ़सा में 21 दिसंबर को केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री डॉ. एमएम पल्लम राजू और हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) दिल्ली के विस्तार परिसर की आधारशिला रखी थी। इसके तहत इस विस्तार में आईआईटी की ओर से स्किल डेवलपमेंट सेंटर और बायो साइंसेज रिसर्च पार्क शुरू होने हैं। ऐसे में बाढ़सा में एम्स और आईआईटी मिलकर बायो-साइंस के क्षेत्र में रिसर्च कार्य करेंगे। इसका लाभ न केवल हरियाणा बल्कि देश और दुनिया को होगा।
विकसित देशों के वैज्ञानिक करेंगे परमाणु संबंधी अनुसंधान
बहादुरगढ़। बहादुरगढ़ के साथ लगते गांव जसौर खेड़ी में ग्लोबल परमाणु अनुसंधान केंद्र की आधारशिला प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह तीन जनवरी को रखेंगे। विश्व स्तर के इस अनुसंधान केंद्र के साथ ही न केवल बहादुरगढ़ बल्कि पूरे हरियाणा का नाम अंतरराष्ट्रीय मानचित्र पर आ जाएगा।
बारह दिसंबर को सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने पीएम से मुलाकात कर जसौर खेड़ी में परमाणु अनुसंधान केंद्र और गोरखपुर में लगने वाले परमाणु संयंत्र केंद्र की आधारशिला के लिए समय मांगा था। सांसद ने बताया कि ग्लोबल परमाणु अनुसंधान कें द्र एक तरह से दुनिया की पहली न्यूक्लियर साइंस यूनिवर्सिटी होगी। अमेरिका की यात्रा के दौरान पीएम इसकी घोषणा भी कर चुके हैं।
यह होगा केंद्र में
अनुसंधान केंद्र की साइट पर पहुंचे प्रोजेक्ट निदेशक वाईएस माया ने बताया कि 400 करोड़ रुपये की लागत से करीब 225 एकड़ में यह केंद्र लगभग चार साल में बनकर तैयार होगा। इसमें 109 एकड़ में रिहायशी और 116 एकड़ में पांच अलग-अलग क्षेत्रों के अनुसंधान केंद्र खोले जाएंगे। इसमें देश-विदेश के वैज्ञानिक परमाणु अनुसंधान का कार्य करेंगे। इसमें परमाणु ऊर्जा से मानव विकास के नए रास्ते खुलेंगे। इस केंद्र को पांच भागों में बांटा जाएगा। इनमें विकिरण प्रौद्योगिकी, एडवांस रिएक्टर सुरक्षा, रेडिएशन सुरक्षा, परमाणु केंद्र की सुरक्षा व रखरखाव और परमाणु मैटीरियल कंट्रोल करने जैसे विषयाें पर अनुसंधान वैज्ञानिकों द्वारा किए जाएंगे।
कई देशों के वैज्ञानिक हमेशा रहेंगे मौजूद
निदेशक ने बताया कि कें द्र में भारत सरकार का जिन देशों के साथ परमाणु समझौता है उन देशों के वैज्ञानिक यहां अनुसंधान कर सकेंगे। इनमें अमेरिका, रूस, फ्रांस और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के समझौते से जुड़े देशों के वैज्ञानिक प्रमुख रूप से शामिल होंगे। उन्होंने बताया कि इस केंद्र के चालू होने के बाद देश-विदेश के सैकड़ों वैज्ञानिक इस केंद्र में हमेशा मौजूद रहेंगे। निदेशक ने कहा कि न्यूक्लियर ऊर्जा से बिजली उत्पादन के साथ-साथ आम आदमी के जीवन को सुधारने में महत्वपूर्ण कदम प्रयोग किए जाते हैं। चिकित्सा, कृषि उत्पादन, फसलों के रखरखाव, बीजों को उपचारित करने, फसलों के उत्पाद को विकिरण से लंबे समय तक सुरक्षित रखने सहित कई अन्य क्षेत्रों में अहम भूमिका निभाई जा सकती है। आधारशिला समारोह स्थल का एसडीएम सतीश यादव, डीएसपी राजीव देशवाल, नायब तहसीलदार सुशील शर्मा, निदेशक डीईएसईएम एनएस गुबाने, डीईएसईएम के हेड कॉआर्डिनेटर एलआर जांगड़ा, चीफ इंजीनियर प्रदीप अग्रवाल, अंशु गुप्ता, डीवीएस दहिया ने जायजा लिया।
इसके बाद हरियाणा के कैंसर पीड़ितों को इलाज के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। उन्हें झज्जर में ही एम्स की तर्ज पर तमाम सुविधाएं मिल जाएंगी। यह इंस्टीट्यूट 45 माह में बनकर तैयार हो जाएगा। हालांकि बताया जा रहा है कि ओपीडी पहले ही शुरू कर दी जाएगी।
गौरतलब है कि राष्ट्रीय कैंसर संस्थान को हरियाणा में लाने के लिए सांसद दीपेंद्र हुड्डा पिछले लंबे समय से प्रयास कर रहे थे। पिछले दिनों उन्होंने इस बात का इशारा भी दे दिया था कि राष्ट्रीय कैंसर संस्थान हरियाणा में स्थापित होगा। देश में कैंसर से संबंधित बड़ा अस्पताल टाटा मेमोरियल इंस्टीट्यूट मुंबई में ही है। यह संस्थान टाटा ग्रुप एवं सरकार के सहयोग से कैंसर के इलाज व अनुसंधान के क्षेत्र में कार्य कर रहा है।
सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने इसके लिए प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह एवं केंद्रीय मंत्रिमंडल के मंत्रियों का आभार जताया है। उन्होंने कहा कि गरीब और जरूरतमंद लोगों के लिए राष्ट्रीय कैंसर संस्थान एक वरदान साबित होगा।
आईआईटी का विस्तार केंद्र भी खुलेगा
बाढ़सा में 21 दिसंबर को केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री डॉ. एमएम पल्लम राजू और हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) दिल्ली के विस्तार परिसर की आधारशिला रखी थी। इसके तहत इस विस्तार में आईआईटी की ओर से स्किल डेवलपमेंट सेंटर और बायो साइंसेज रिसर्च पार्क शुरू होने हैं। ऐसे में बाढ़सा में एम्स और आईआईटी मिलकर बायो-साइंस के क्षेत्र में रिसर्च कार्य करेंगे। इसका लाभ न केवल हरियाणा बल्कि देश और दुनिया को होगा।
विकसित देशों के वैज्ञानिक करेंगे परमाणु संबंधी अनुसंधान
बहादुरगढ़। बहादुरगढ़ के साथ लगते गांव जसौर खेड़ी में ग्लोबल परमाणु अनुसंधान केंद्र की आधारशिला प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह तीन जनवरी को रखेंगे। विश्व स्तर के इस अनुसंधान केंद्र के साथ ही न केवल बहादुरगढ़ बल्कि पूरे हरियाणा का नाम अंतरराष्ट्रीय मानचित्र पर आ जाएगा।
बारह दिसंबर को सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने पीएम से मुलाकात कर जसौर खेड़ी में परमाणु अनुसंधान केंद्र और गोरखपुर में लगने वाले परमाणु संयंत्र केंद्र की आधारशिला के लिए समय मांगा था। सांसद ने बताया कि ग्लोबल परमाणु अनुसंधान कें द्र एक तरह से दुनिया की पहली न्यूक्लियर साइंस यूनिवर्सिटी होगी। अमेरिका की यात्रा के दौरान पीएम इसकी घोषणा भी कर चुके हैं।
यह होगा केंद्र में
अनुसंधान केंद्र की साइट पर पहुंचे प्रोजेक्ट निदेशक वाईएस माया ने बताया कि 400 करोड़ रुपये की लागत से करीब 225 एकड़ में यह केंद्र लगभग चार साल में बनकर तैयार होगा। इसमें 109 एकड़ में रिहायशी और 116 एकड़ में पांच अलग-अलग क्षेत्रों के अनुसंधान केंद्र खोले जाएंगे। इसमें देश-विदेश के वैज्ञानिक परमाणु अनुसंधान का कार्य करेंगे। इसमें परमाणु ऊर्जा से मानव विकास के नए रास्ते खुलेंगे। इस केंद्र को पांच भागों में बांटा जाएगा। इनमें विकिरण प्रौद्योगिकी, एडवांस रिएक्टर सुरक्षा, रेडिएशन सुरक्षा, परमाणु केंद्र की सुरक्षा व रखरखाव और परमाणु मैटीरियल कंट्रोल करने जैसे विषयाें पर अनुसंधान वैज्ञानिकों द्वारा किए जाएंगे।
कई देशों के वैज्ञानिक हमेशा रहेंगे मौजूद
निदेशक ने बताया कि कें द्र में भारत सरकार का जिन देशों के साथ परमाणु समझौता है उन देशों के वैज्ञानिक यहां अनुसंधान कर सकेंगे। इनमें अमेरिका, रूस, फ्रांस और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के समझौते से जुड़े देशों के वैज्ञानिक प्रमुख रूप से शामिल होंगे। उन्होंने बताया कि इस केंद्र के चालू होने के बाद देश-विदेश के सैकड़ों वैज्ञानिक इस केंद्र में हमेशा मौजूद रहेंगे। निदेशक ने कहा कि न्यूक्लियर ऊर्जा से बिजली उत्पादन के साथ-साथ आम आदमी के जीवन को सुधारने में महत्वपूर्ण कदम प्रयोग किए जाते हैं। चिकित्सा, कृषि उत्पादन, फसलों के रखरखाव, बीजों को उपचारित करने, फसलों के उत्पाद को विकिरण से लंबे समय तक सुरक्षित रखने सहित कई अन्य क्षेत्रों में अहम भूमिका निभाई जा सकती है। आधारशिला समारोह स्थल का एसडीएम सतीश यादव, डीएसपी राजीव देशवाल, नायब तहसीलदार सुशील शर्मा, निदेशक डीईएसईएम एनएस गुबाने, डीईएसईएम के हेड कॉआर्डिनेटर एलआर जांगड़ा, चीफ इंजीनियर प्रदीप अग्रवाल, अंशु गुप्ता, डीवीएस दहिया ने जायजा लिया।