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पूर्व सैनिकों की विधवाओं को मिलेंगी दोनों पेंशनः हुड्डा
अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 11 Jan 2014 09:13 AM IST
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हरियाणा सरकार के अधीन नौकरी करके रिटायर हुए पूर्व सैनिकों की मृत्यु के बाद उनकी विधवाओं को सेना से मिलने वाली अपने पति की पेंशन के साथ-साथ सरकारी नौकरी से बनी पेंशन भी मिलेगी।
मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने इस बारे में सामने आए एक मामले पर फैसला देते हुए प्रदेश में यह प्रावधान लागू करने का ऐलान किया है।
अमर उजाला के पाक्षिक कॉलम ‘आपके सवाल-सीएम के जवाब’ में गुड़गांव के शिकोहपुर गांव की रामरती देवी ने मुख्यमंत्री से सवाल पूछा था कि उनके पति श्रीचंद सेना से 1978 में रिटायर हुए थे।
उसके बाद पशु चिकित्सालय में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के तौर पर कार्यरत रहे। 31 जुलाई, 2005 को पशु चिकित्सालय की नौकरी से रिटायर होने के बाद विभाग की ओर से उन्हें पेंशन मिलने लगी।
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उस दौरान उन्हें सेना से भी पेंशन मिल रही थी। 16 मई, 2011 को उनका स्वर्गवास होने के बाद उनकी पेंशन पत्नी (रामरती) को मिलनी शुरू हो गई।
कुछ समय तक तो पत्नी को दोनों पेंशन मिलती रहीं लेकिन अब एक पेंशन बंद कर दी गई है। रामरती ने मुख्यमंत्री हुड्डा से सवाल पूछा था कि जब केंद्र सरकार की ओर से ऐसे मामलों में दोनों पेंशन दिए जाने का प्रावधान है तो हरियाणा में इस संबंध में क्या प्रावधान किया गया है?
मुख्यमंत्री कार्यालय से जब यह सवाल राज्य सैनिक बोर्ड को भेजा गया तो बोर्ड ने कहा कि सेना और सिविल नौकरी की पेंशन संबंधित कर्मचारी, अफसर को देने का प्रावधान है लेकिन विधवा को सिर्फ एक ही पेंशन का अधिकार है।
बोर्ड ने यह भी कहा कि हालांकि केंद्र सरकार ने ऐसे मामलों में दोनों पेंशन दिए जाने का प्रावधान कर रखा है, फिर भी हरियाणा में इस बाबत केंद्र का प्रावधान लागू करने की मंजूरी मुख्यमंत्री द्वारा ही दी जा सकती है।
राज्य सैनिक बोर्ड के जवाब के साथ जब रामरती के सवाल वाली फाइल मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के पास पहुंची तो उन्होंने न सिर्फ रामरती को दोनों पेंशन दिए जाने को मंजूरी दे दी, राज्य में ऐसे मामलों में दोनों पेंशन दिए जाने का प्रावधान लागू किए जाने की घोषणा भी कर दी।
अब रामरती देवी के साथ-साथ प्रदेश में पूर्व सैनिकों के उन परिवारों को भी लाभ मिलेगा, जिनमें पूर्व सैनिक सेना के रिटायरमेंट के बाद सरकारी नौकरी से रिटायर हुए थे। पूर्व सैनिक की यह दोनों अब उनकी विधवा पत्नी को मिल सकेगी।
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मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने इस बारे में सामने आए एक मामले पर फैसला देते हुए प्रदेश में यह प्रावधान लागू करने का ऐलान किया है।
अमर उजाला के पाक्षिक कॉलम ‘आपके सवाल-सीएम के जवाब’ में गुड़गांव के शिकोहपुर गांव की रामरती देवी ने मुख्यमंत्री से सवाल पूछा था कि उनके पति श्रीचंद सेना से 1978 में रिटायर हुए थे।
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उसके बाद पशु चिकित्सालय में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के तौर पर कार्यरत रहे। 31 जुलाई, 2005 को पशु चिकित्सालय की नौकरी से रिटायर होने के बाद विभाग की ओर से उन्हें पेंशन मिलने लगी।
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उस दौरान उन्हें सेना से भी पेंशन मिल रही थी। 16 मई, 2011 को उनका स्वर्गवास होने के बाद उनकी पेंशन पत्नी (रामरती) को मिलनी शुरू हो गई।
कुछ समय तक तो पत्नी को दोनों पेंशन मिलती रहीं लेकिन अब एक पेंशन बंद कर दी गई है। रामरती ने मुख्यमंत्री हुड्डा से सवाल पूछा था कि जब केंद्र सरकार की ओर से ऐसे मामलों में दोनों पेंशन दिए जाने का प्रावधान है तो हरियाणा में इस संबंध में क्या प्रावधान किया गया है?
मुख्यमंत्री कार्यालय से जब यह सवाल राज्य सैनिक बोर्ड को भेजा गया तो बोर्ड ने कहा कि सेना और सिविल नौकरी की पेंशन संबंधित कर्मचारी, अफसर को देने का प्रावधान है लेकिन विधवा को सिर्फ एक ही पेंशन का अधिकार है।
बोर्ड ने यह भी कहा कि हालांकि केंद्र सरकार ने ऐसे मामलों में दोनों पेंशन दिए जाने का प्रावधान कर रखा है, फिर भी हरियाणा में इस बाबत केंद्र का प्रावधान लागू करने की मंजूरी मुख्यमंत्री द्वारा ही दी जा सकती है।
राज्य सैनिक बोर्ड के जवाब के साथ जब रामरती के सवाल वाली फाइल मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के पास पहुंची तो उन्होंने न सिर्फ रामरती को दोनों पेंशन दिए जाने को मंजूरी दे दी, राज्य में ऐसे मामलों में दोनों पेंशन दिए जाने का प्रावधान लागू किए जाने की घोषणा भी कर दी।
अब रामरती देवी के साथ-साथ प्रदेश में पूर्व सैनिकों के उन परिवारों को भी लाभ मिलेगा, जिनमें पूर्व सैनिक सेना के रिटायरमेंट के बाद सरकारी नौकरी से रिटायर हुए थे। पूर्व सैनिक की यह दोनों अब उनकी विधवा पत्नी को मिल सकेगी।