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Bhiwani News: पराली जलाने पर पांच स्तरों पर होगी निगरानी, 173 नोडल अधिकारी तैनात
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भिवानी। जिले में पराली जलाने पर रोक लगाने के लिए उपायुक्त साहिल गुप्ता के आदेश पर पांच स्तरों पर निगरानी व्यवस्था बनाई गई है। कृषि विभाग ने 173 नोडल अधिकारी नियुक्त किए हैं और प्रत्येक 15 नोडल अधिकारियों पर एक पर्यवेक्षक लगाया है।
पंचायत भवन में वीरवार दोपहर ढाई बजे जागरूकता कार्यक्रम होगा। इसमें बवानीखेड़ा, भिवानी और तोशाम क्षेत्र के धान उत्पादक 73 संवेदनशील गांवों के सरपंचों के साथ ग्राम सचिव तथा पुलिस, राजस्व, पंचायत और शिक्षा विभाग के अधिकारी शामिल होंगे। जिले में धान की कटाई करीब 20 अक्तूबर से शुरू होने की संभावना है। उपायुक्त ने जिले में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 लागू की है और उपग्रह के माध्यम से भी निगरानी की जाएगी।
उप कृषि निदेशक राजेश सिहाग ने बताया कि जिले के 105 गांवों में 54,734 एकड़ में धान की खेती हुई है। इससे करीब 82 हजार मीट्रिक टन पराली उत्पादन का अनुमान है। पराली जलाने पर पांच हजार से 30 हजार रुपये तक जुर्माना, प्राथमिकी, मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल पर प्रतिकूल प्रविष्टि और अगले दो साल तक न्यूनतम समर्थन मूल्य पर फसल बेचने पर प्रतिबंध का प्रावधान है।
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ऐसे काम करेगी पांच स्तरीय निगरानी व्यवस्था
कृषि अभियंता नसीब सिंह धनखड़ ने बताया कि प्रत्येक 100 किसानों पर एक नोडल अधिकारी तैनात किया गया है। हर 15 नोडल अधिकारियों पर द्वितीय श्रेणी का राजपत्रित पर्यवेक्षक नियुक्त है। गांव स्तर पर पुलिस, राजस्व, कृषि और पंचायत विभाग की प्रवर्तन टीमें बनाई गई हैं। प्रत्येक खंड में कृषि विभाग का नोडल अधिकारी तैनात है। जिला, उपमंडल और खंड स्तर के साथ मोबाइल टीमें भी पराली जलाने की निगरानी करेंगी और उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई करेंगी।
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पंचायत भवन में वीरवार दोपहर ढाई बजे जागरूकता कार्यक्रम होगा। इसमें बवानीखेड़ा, भिवानी और तोशाम क्षेत्र के धान उत्पादक 73 संवेदनशील गांवों के सरपंचों के साथ ग्राम सचिव तथा पुलिस, राजस्व, पंचायत और शिक्षा विभाग के अधिकारी शामिल होंगे। जिले में धान की कटाई करीब 20 अक्तूबर से शुरू होने की संभावना है। उपायुक्त ने जिले में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 लागू की है और उपग्रह के माध्यम से भी निगरानी की जाएगी।
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उप कृषि निदेशक राजेश सिहाग ने बताया कि जिले के 105 गांवों में 54,734 एकड़ में धान की खेती हुई है। इससे करीब 82 हजार मीट्रिक टन पराली उत्पादन का अनुमान है। पराली जलाने पर पांच हजार से 30 हजार रुपये तक जुर्माना, प्राथमिकी, मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल पर प्रतिकूल प्रविष्टि और अगले दो साल तक न्यूनतम समर्थन मूल्य पर फसल बेचने पर प्रतिबंध का प्रावधान है।
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ऐसे काम करेगी पांच स्तरीय निगरानी व्यवस्था
कृषि अभियंता नसीब सिंह धनखड़ ने बताया कि प्रत्येक 100 किसानों पर एक नोडल अधिकारी तैनात किया गया है। हर 15 नोडल अधिकारियों पर द्वितीय श्रेणी का राजपत्रित पर्यवेक्षक नियुक्त है। गांव स्तर पर पुलिस, राजस्व, कृषि और पंचायत विभाग की प्रवर्तन टीमें बनाई गई हैं। प्रत्येक खंड में कृषि विभाग का नोडल अधिकारी तैनात है। जिला, उपमंडल और खंड स्तर के साथ मोबाइल टीमें भी पराली जलाने की निगरानी करेंगी और उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई करेंगी।