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एक हजार ब्रांचों पर लटके ताले, 500 करोड़ का लेनदेन प्रभावित

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 17 Dec 2021 12:48 AM IST
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Locks hanging on one thousand branches, 500 crore transactions affected
घंटाघर एसबीआई बैंक के बाहर धरने पर बैठकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते बैंक कर्मचारी व अधिकारी। स? - फोटो : Bhiwani
भिवानी। बैंकिंग कानून संशोधन बिल 2021 के विरोध में जिले में एक हजार ब्रांचों पर वीरवार को ताला लटका रहा। बैंकों की हड़ताल के चलते करीब 500 करोड़ रुपयों का लेनदेन भी प्रभावित। बैंक कर्मचारियों की दो दिवसीय हड़ताल को लेकर पांच हजार कर्मचारी हड़ताल में शामिल हुए।
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लेनदेन को लेकर लोग बैंक पहुंचे तो हड़ताल की वजह से उन्हें निराश होकर लौटना पड़ा। सबसे अधिक परेशानी तो पेंशनर और लोन लेने वाले लोगों को हुई, क्योंकि उन्हें अपने कामकाज के लिए बैंक शाखाओं में ही पहुंचना जरूरी था। बैंकों की हड़ताल के पहले दिन ही शहर की एटीएम भी खाली हो गईं। वहीं हड़ताली कर्मचारियों ने घंटाघर स्थित एसबीआई की मुख्य ब्रांच के बाहर धरना देकर बैंकिंग कानून संशोधन बिल 2021 व निजीकरण के खिलाफ नारेबाजी की। हड़ताली कर्मचारियों ने उपायुक्त के माध्यम से केंद्रीय वित्तमंत्री के नाम ज्ञापन भेजा। बैंक कर्मचारियों की हड़ताल का अखिल भारतीय किसान सभा, सर्व कर्मचारी संघ, बिजली बोर्ड कर्मचारी संघ, बर्खास्त पीटीआई संगठन, भारतीय डाक सेवा कर्मचारी सहित अन्य जनसंगठनों ने भी समर्थन किया।
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हड़ताली बैंक कर्मचारियों को संबोधित करते हुए कामरेड कंवर सिंह, कामरेड चिरंजीलाल कामरेड प्रदीप और कामरेड सत्यशील कौशिक, कामरेड ओमप्रकाश ने संयुक्त रूप से कहा कि सरकार एक-एक कर सभी सार्वजनिक क्षेत्रों का निजीकरण कर रही है। बैंकों का निजीकरण कर बैंकों में जनता की जमा राशि पर सरकार की नजर है, जिसका हाल ही में हुए पीएमसी बैंक के दिवालिया, यस बैंक, रिलायंस कैपिटल उदाहरण हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने पहले तो बैंकों में जमा राशि को लोन के रूप में बड़े घरानों को वितरित कराया, फिर उनको बैलेंस शीट से राइट ऑफ करा दिया और बैंकों का घाटे में आना शुरू हो गया, जिससे जनता को यह लगे की बैंक सही रूप से कार्य नहीं कर रहे और बैंकों को दोषी दिखाकर बैंकों का निजीकरण करना जनता के समर्थन के साथ आसान हो जाएगा। उन्होंने कहा कि अब जनता और कर्मचारी वर्ग भी जागरूक हो गया है। अब सरकार को उसके इस नापाक इरादों में कामयाब नहीं होने देंगे। जिसके लिए अनिश्चितकालीन हड़ताल भी जाना पड़े तो जाएंगे। धरने में एसबीआई से कामरेड अनिल कुमार, मंदीप, पीएनबी से कृष्ण यादव, यूको बैंक से कामरेड योगेश महता, कारपोरेशन बैंक से कामरेड अभिषेक, केनरा बैंक से संदीप चौधरी, इंडियन ओवरसीज बैंक से कामरेड सुमन सहित अन्य कर्मचारियों ने भाग लिया।
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एटीएम से नहीं निकले रुपये
दो दिन तक बैंकों की हड़ताल की वजह से पहले ही दिन शहर की अधिकतर एटीएम भी खाली हो गईं। कई लोग एटीएम में पैसे निकालने पहुंचे, मगर काफी देर मशीन से माथापच्ची के बाद पर्ची ही बाहर आई, जबकि कैश नहीं निकला। हड़ताल के दूसरे दिन भी लोगों को एटीएम में अगर पैसे नहीं मिले तो काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा।
मुझे बैंक से लोन लेना था, इसलिए सुबह ही घर से बैंक के काम से यहां आया था, यहां आने के बाद मुझे पता चला कि दो दिन तक बैंक में हड़ताल है। अब मेरा काम भी नहीं बना और लौटना होगा। हड़ताल की मुझे कोई जानकारी नहीं थी। पहले पता होता तो यहां आना नहीं पड़ता।

-हवा सिंह कौशिक, निवासी बापोड़ा।
मैं बैंक में जरूरी काम से आया था। बाहर गेट पर हड़ताल का बड़ा बोर्ड लगा मिला। कर्मचारियों ने बताया कि दो दिन तक हड़ताल है। इसके बाद फिर शनिवार और रविवार आ जाएगा। इन दोनों दिनों में भी बैंकों के अंदर कोई कामकाज नहीं होगा। इसलिए मुझे सोमवार को फिर से बैंक में दोबारा आना पड़ेगा। मेरी तरह अन्य लोग भी परेशान हुए हैं।
-महेंद्र सिंह, निवासी हालुवास।
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