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Bhiwani News: महिला सफाई कर्मचारी को छुट्टी के लिए मासिक धर्म साबित करने के मामले में मानवाधिकार आयोग ने दिया नोटिस
Thu, 06 Nov 2025 01:19 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Thu, 06 Nov 2025 01:19 AM IST
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प्रिया असीजा
भिवानी। रोहतक के महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (एमडीयू) में एक महिला सफाई कर्मचारी को छुट्टी के लिए मासिक धर्म साबित करने के लिए अंतर्वस्त्र उतारने को मजबूर किए जाने के मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने कड़ा संज्ञान लिया है। भिवानी के सेक्टर-13 निवासी महिला अधिकार कार्यकर्ता प्रिया असीजा द्वारा दी गई शिकायत पर कार्रवाई करते हुए आयोग ने एमडीयू के कुलपति और रोहतक के पुलिस अधीक्षक को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर जांच रिपोर्ट तलब की है।
प्रिया असीजा ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में शिकायत दर्ज कराते हुए इस चौंकाने वाली घटना की जानकारी दी थी। शिकायत में बताया कि एमडीयू में कार्यरत एक महिला सफाई कर्मचारी को छुट्टी के लिए मासिक धर्म साबित करने के लिए अंतर्वस्त्र उतारने को मजबूर किया गया। यह कृत्य महिलाओं की गरिमा, निजता और समानता के अधिकार का घोर उल्लंघन है और भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 और 21, पीओएसएच अधिनियम तथा मानवाधिकार अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन करता है। प्रिया असीजा ने आयोग से मांग की कि इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए, पीड़िता की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और सम्मानजनक मासिक धर्म अवकाश नीति को लेकर राष्ट्रव्यापी दिशानिर्देश जारी किए जाएं ताकि भविष्य में किसी भी महिला को ऐसी अपमानजनक स्थिति का सामना न करना पड़े। शिकायत में लगाए गए आरोपों पर आयोग ने प्रथम दृष्टया पीड़िता के मानवाधिकारों का उल्लंघन माना है।
मैंने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को पत्र लिखकर जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की थी। आयोग ने नोटिस जारी कर दो सप्ताह में जवाब मांगा है। किसी भी महिला के साथ भविष्य में ऐसी शर्मनाक घटना न हो यह सुनिश्चित किया जाना बेहद जरूरी है। यह मुद्दा महिलाओं के सम्मान और स्वाभिमान से जुड़ा है। - प्रिया असीजा, महिला अधिकार कार्यकर्ता
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प्रिया असीजा ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में शिकायत दर्ज कराते हुए इस चौंकाने वाली घटना की जानकारी दी थी। शिकायत में बताया कि एमडीयू में कार्यरत एक महिला सफाई कर्मचारी को छुट्टी के लिए मासिक धर्म साबित करने के लिए अंतर्वस्त्र उतारने को मजबूर किया गया। यह कृत्य महिलाओं की गरिमा, निजता और समानता के अधिकार का घोर उल्लंघन है और भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 और 21, पीओएसएच अधिनियम तथा मानवाधिकार अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन करता है। प्रिया असीजा ने आयोग से मांग की कि इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए, पीड़िता की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और सम्मानजनक मासिक धर्म अवकाश नीति को लेकर राष्ट्रव्यापी दिशानिर्देश जारी किए जाएं ताकि भविष्य में किसी भी महिला को ऐसी अपमानजनक स्थिति का सामना न करना पड़े। शिकायत में लगाए गए आरोपों पर आयोग ने प्रथम दृष्टया पीड़िता के मानवाधिकारों का उल्लंघन माना है।
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मैंने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को पत्र लिखकर जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की थी। आयोग ने नोटिस जारी कर दो सप्ताह में जवाब मांगा है। किसी भी महिला के साथ भविष्य में ऐसी शर्मनाक घटना न हो यह सुनिश्चित किया जाना बेहद जरूरी है। यह मुद्दा महिलाओं के सम्मान और स्वाभिमान से जुड़ा है। - प्रिया असीजा, महिला अधिकार कार्यकर्ता
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