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Bhiwani News: 100 साल बाद पितृ पक्ष में बनेगा चंद्र और सूर्य ग्रहण का दुर्लभ संयोग

Sun, 24 Aug 2025 10:53 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी Updated Sun, 24 Aug 2025 10:53 PM IST
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After 100 years, a rare combination of lunar and solar eclipse will occur in Pitru Paksha.
तोशाम। इस बार का पितृ पक्ष बेहद खास रहने वाला है। 100 वर्षों बाद ऐसा दुर्लभ संयोग बन रहा है जब इसकी शुरुआत चंद्र ग्रहण से होगी और समापन सूर्य ग्रहण से। पितृ पक्ष का आरंभ 7 सितंबर को चंद्र ग्रहण के साथ होगा और समापन 21 सितंबर को सूर्य ग्रहण से। हालांकि सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा लेकिन इसका ज्योतिषीय महत्व बना रहेगा। विद्वानों का मानना है कि इस संयोग में किए गए श्राद्ध, दान और तर्पण का फल कई गुना बढ़कर मिलता है।
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पंडित श्रीकांत शास्त्री के अनुसार पितृ पक्ष में ग्रहण का आना शुभ माना जाता है। ग्रहण काल के दौरान किए गए दान, मंत्र-जप और संकल्प से पितरों की आत्मा तृप्त होकर आशीर्वाद देती है और पितृदोष शांत होता है। उन्होंने कहा कि यह संयोग घर-परिवार में सुख, शांति और समृद्धि लाने वाला है।
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पंद्रह दिन का होगा श्राद्ध पक्ष
श्रीकांत शास्त्री ने बताया कि तिथि क्षय के कारण इस बार श्राद्ध पक्ष 15 दिन का होगा। षष्ठी और सप्तमी तिथि का श्राद्ध एक ही दिन 13 सितंबर को होगा। हालांकि षष्ठी का श्राद्ध 12 सितंबर को सुबह 10 बजे के बाद भी किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि चंद्र ग्रहण का सूतक 7 सितंबर को दोपहर 12 बजकर 56 मिनट से लगेगा। ऐसे में उस दिन सभी श्राद्ध कर्म दोपहर पूर्व ही पूरे करने होंगे। चंद्र ग्रहण 7 सितंबर की रात 9.56 बजे से शुरू होकर 1.27 बजे तक चलेगा। वहीं सूर्य ग्रहण 21 सितंबर को रात 10.59 बजे से शुरू होकर 22 सितंबर की सुबह 3.23 बजे तक रहेगा। चूंकि यह भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए इसका सूतक प्रभाव भी मान्य नहीं होगा।
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इन राशि वालों को मिलेगा लाभ
पंडित श्रीकांत शास्त्री ने बताया कि 100 साल बाद बन रहे इस अद्भुत संयोग का सकारात्मक प्रभाव कई राशियों पर पड़ेगा। विशेष रूप से मिथुन, धनु और मकर राशि के जातकों को कॅरिअर, धन और प्रतिष्ठा में बड़े लाभ की प्राप्ति होगी। उन्होंने कहा कि इस दुर्लभ संयोग में किए गए श्राद्ध, दान और पूजन से न केवल पितरों की आत्मा को शांति मिलेगी बल्कि घर-परिवार में सौभाग्य और समृद्धि भी बढ़ेगी।
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