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मैं भी हुआ नस्लीय भेदभाव का शिकार: भूटिया
दीपक वर्मा/अमर उजाला, सोनीपत
Updated Wed, 05 Mar 2014 10:41 AM IST
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मैं भी नस्लीय हिंसा का शिकार हो चुका हूं। कई बार तो इस पर बड़ा गुस्सा आता था, लेकिन फिर धीरे-धीरे समझ आ गई। यहां तक की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फुटबाल खेलने के बाद भी मुझे नस्लीय भेदभाव का शिकार होना पड़ा है। ये कहना है अंतरराष्ट्रीय फुटबालर रहे बाइचिंग भूटिया का।
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सिक्किमस स्नीपर के नाम से साथियों में प्रसिद्ध बाइचिंग भूटिया मंगलवार को ज्ञान गंगा ग्लोबल स्कूल में आयोजित कार्यक्रम के दौरान बतौर मुख्य अतिथि मौजूद थे। इस दौरान भारतीय फुटबाल टीम के पूर्व कप्तान बाइचिंग भूटिया ने अमर उजाला से विशेष बातचीत में अपने जिंदगी के कुछ अनछुए पहलुओं पर चर्चा की।
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यूरोपियन क्लब के लिए पहले भारतीय
बाइचिंग भूटिया का जन्म 15 दिसंबर 1976 को हुआ था। भूटिया ने बताया कि सबसे पहले वे ईस्ट-बंगाल क्लब के लिए अनुबंधित किए गए थे। इसके बाद 1999 में 23 साल की उम्र में इंग्लिश फुटबाल क्लब ब्यूरी के लिए अनुबंधित किया गया। उस समय वे पहले भारतीय थे, जो यूरोपियन क्लब के लिए अनुबंधित हुए थे। भारत के लिए सबसे ज्यादा फुटबाल मैच खेलने का रिकॉर्ड भी भूटिया के नाम है।
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झलक दिखला जा से बढ़ी लोकप्रियता
बाइचिंग भूटिया ने माना कि पहले उन्हें लोग सीमित संख्या में जानते थे, लेकिन जब उन्होंने वर्ष 2009 में झलक दिखला जा रियालटी शो में हिस्सा लेकर जीत दर्ज की तो उसके बाद उनकी लोकप्रियता में इजाफा हुआ। इसके बाद देश के कोने-कोने में लोग उन्हें जानने लगे। भूटिया इकलौते ऐसे खिलाड़ी हैं, जिनके रिटायरमेंट से पहले जब वे खेल रहे थे, तब ही उनके नाम से एक स्टेडियम भी बनाया गया।
कुछ विवाद भी रहेंगे याद
फुटबाल के इस जादूगर के साथ कई विवाद भी जुड़े रहे हैं। इनके संदर्भ में बातचीत करने के बाद भूटिया बताते हैं कि विवाद भी याद रहेंगे। इन विवादों में प्रमुख विवाद तिब्बत आंदोलन का हिस्सा होने के कारण उनका ओलंपिक मशाल दौड़ से बॉयकाट करना रहा। वे पहले ऐसे खिलाड़ी थे, जिनका ओलंपिक मशाल दौड़ में बॉयकाट किया गया था। फर्जी वोटिंग करवाने का भी आरोप लगा था।