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हरियाणा सरकार ने 87 हजार युवाओं से किया बड़ा धोखा
भिवानी/सुरेश मेहरा
Updated Sun, 06 Oct 2013 11:20 PM IST
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पशुपालन विभाग में 1034 एनिमल अटेंडेंट की भर्ती हरियाणा सरकार ने गुपचुप तरीके से रद्द कर दी है। यह खुलासा आरटीआई के तहत मांगी गई जानकारी में हुआ।
इस भर्ती के लिए लगभग 87 हजार अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था और लगभग 10 हजार ने तो इंटरव्यू में भी भाग लिया था। भर्ती रद्द करने के पीछे विभागीय कारण बताए जा रहे हैं, लेकिन इनका खुलासा नहीं किया गया। भर्ती रद्द होने की जानकारी मिलने पर अब दो साल से नियुक्ति का इंतजार कर रहे आवेदकों ने अदालत की शरण लेने की तैयारी शुरू कर दी है।
पशुपालन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार दो सितंबर 2011 को विभाग ने 1034 एनिमल अटेंडेंट के पदों के लिए आवेदन निकाले थे। इन पदों के लिए 10वीं के अलावा डेयरी डिप्लोमा और गोशाला का अनुभव प्रमाणपत्र मांगा गया था। 86925 बेरोजगारों ने इन पदों के लिए आवेदन किया था। विभाग ने 18 जुलाई 2012 को 9496 डिप्लोमाधारकों को इंटरव्यू के लिए बुलाया। मंडल स्तर पर गठित टीमों ने इंटरव्यू लिया और इसके बाद कोई परिणाम नहीं आया।
अभ्यर्थी पवन और मनफूल ने 29 अगस्त 2013 को इस संबंध में आरटीआई के तहत सूचना मांगी थी। पशुपालन विभाग ने चार अक्तूबर को यह जवाब दिया कि 1034 एनिमल अटेंडेंट की भर्ती विभागीय कारणों के चलते रद्द कर दी गई है। यह भर्ती अंदरखाने एक माह पहले ही रद्द की जा चुकी है। मनफूल आर्य ने बताया कि उन्होंने इससे पहले भी इस भर्ती के संबंध में 18 सितंबर 2012 को आरटीआई लगाई थी। उन्होंने पूछा था कि चयन कब तक होगा। इसके बाद चार फरवरी 2013 को उनको जवाब मिला था कि भर्ती प्रक्रिया जारी है। जल्द ही परिणाम घोषित कर दिया जाएगा।
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जल्द अदालत की शरण लेंगे आवेदक
आवेदक मनफूल सिंह आर्य और पवन कुमार ने बताया कि एनिमल अटेंडेंट के लिए आवेदन करने वाले करीब 87 हजार युवाओं से संपर्क करके जल्द ही हिसार में आवेदकों की राज्यस्तरीय महापंचायत बुलाई जाएगी। साक्षात्कार के छह माह बाद भर्ती को रद्द करने का कोई औचित्य नहीं बनता।
भर्ती रद्द करना युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ : छिल्लर
विधायक कर्नल रघुवीर सिंह छिल्लर ने बताया कि उन्होंने 1034 एनिमल अटेंडेंट की भर्ती के बारे में विधानसभा में भी सवाल उठाया था। इसका जवाब देने की बजाय विधानसभा से उनके साथी विधायकों को बाहर कर दिया गया। उन्होंने कहा कि सरकार ने जब आवेदकों से फीस ले ली। आवेदकों ने सारी प्रक्रियाएं पूरी कर दी तो भर्ती रद्द करने का कौन सा औचित्य बनता है।
एनिमल अटेंडेंट की भर्ती प्रक्रिया जब अंतिम चरण में थी तो उसे रद्द करना समझ से परे लगता है। जब सारी प्रक्रिया लगभग पूरी हो गई थी तो विभागीय कारणों को कैसे जिम्मेदार माना जा सकता है। यह तो प्रदेश सरकार का नैतिक दायित्व से दूर भागना है। सरकार को शीघ्र भर्ती करनी चाहिए।
- महेंद्र शास्त्री, पूर्व सदस्य, हरियाणा लोकसेवा आयोग
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इस भर्ती के लिए लगभग 87 हजार अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था और लगभग 10 हजार ने तो इंटरव्यू में भी भाग लिया था। भर्ती रद्द करने के पीछे विभागीय कारण बताए जा रहे हैं, लेकिन इनका खुलासा नहीं किया गया। भर्ती रद्द होने की जानकारी मिलने पर अब दो साल से नियुक्ति का इंतजार कर रहे आवेदकों ने अदालत की शरण लेने की तैयारी शुरू कर दी है।
पशुपालन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार दो सितंबर 2011 को विभाग ने 1034 एनिमल अटेंडेंट के पदों के लिए आवेदन निकाले थे। इन पदों के लिए 10वीं के अलावा डेयरी डिप्लोमा और गोशाला का अनुभव प्रमाणपत्र मांगा गया था। 86925 बेरोजगारों ने इन पदों के लिए आवेदन किया था। विभाग ने 18 जुलाई 2012 को 9496 डिप्लोमाधारकों को इंटरव्यू के लिए बुलाया। मंडल स्तर पर गठित टीमों ने इंटरव्यू लिया और इसके बाद कोई परिणाम नहीं आया।
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अभ्यर्थी पवन और मनफूल ने 29 अगस्त 2013 को इस संबंध में आरटीआई के तहत सूचना मांगी थी। पशुपालन विभाग ने चार अक्तूबर को यह जवाब दिया कि 1034 एनिमल अटेंडेंट की भर्ती विभागीय कारणों के चलते रद्द कर दी गई है। यह भर्ती अंदरखाने एक माह पहले ही रद्द की जा चुकी है। मनफूल आर्य ने बताया कि उन्होंने इससे पहले भी इस भर्ती के संबंध में 18 सितंबर 2012 को आरटीआई लगाई थी। उन्होंने पूछा था कि चयन कब तक होगा। इसके बाद चार फरवरी 2013 को उनको जवाब मिला था कि भर्ती प्रक्रिया जारी है। जल्द ही परिणाम घोषित कर दिया जाएगा।
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जल्द अदालत की शरण लेंगे आवेदक
आवेदक मनफूल सिंह आर्य और पवन कुमार ने बताया कि एनिमल अटेंडेंट के लिए आवेदन करने वाले करीब 87 हजार युवाओं से संपर्क करके जल्द ही हिसार में आवेदकों की राज्यस्तरीय महापंचायत बुलाई जाएगी। साक्षात्कार के छह माह बाद भर्ती को रद्द करने का कोई औचित्य नहीं बनता।
भर्ती रद्द करना युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ : छिल्लर
विधायक कर्नल रघुवीर सिंह छिल्लर ने बताया कि उन्होंने 1034 एनिमल अटेंडेंट की भर्ती के बारे में विधानसभा में भी सवाल उठाया था। इसका जवाब देने की बजाय विधानसभा से उनके साथी विधायकों को बाहर कर दिया गया। उन्होंने कहा कि सरकार ने जब आवेदकों से फीस ले ली। आवेदकों ने सारी प्रक्रियाएं पूरी कर दी तो भर्ती रद्द करने का कौन सा औचित्य बनता है।
एनिमल अटेंडेंट की भर्ती प्रक्रिया जब अंतिम चरण में थी तो उसे रद्द करना समझ से परे लगता है। जब सारी प्रक्रिया लगभग पूरी हो गई थी तो विभागीय कारणों को कैसे जिम्मेदार माना जा सकता है। यह तो प्रदेश सरकार का नैतिक दायित्व से दूर भागना है। सरकार को शीघ्र भर्ती करनी चाहिए।
- महेंद्र शास्त्री, पूर्व सदस्य, हरियाणा लोकसेवा आयोग