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Ambala News: महिलाओं ने जमीन की सुरक्षा के लिए लगाया ठीकरी पहरा
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अंबाला। तोपखाना परेड में 21 एकड़ जमीन को लेकर अब स्थानीय निवासी खुलकर सामने आ गए हैं। उन्होंने कैंटोनमेंट बोर्ड की तारबंदी का विरोध करने ठीकरी पहरा शुरु कर दिया है और इसकी जिम्मेदारी स्थानीय महिलाओं ने संभाली है।
इसके लिए उन्होंने जमीन के आसपास टैंट भी लगा दिया है ताकि अगर बोर्ड की टीम आए तो उसे शांतिपूर्ण तरीके से तारबंदी करने से रोका जा सके। वहीं स्थानीय लोगों ने प्रबुद्ध लोगों एक प्रतिनिधिमंडल भी तैयार किया है जो हरियाणा के मुख्यमंत्री से मिलकर मदद की गुहार लगाएंगे ताकि खेती और मजदूरी के लिए उपलब्ध करवाई गई जमीन पर बोर्ड अपना कब्जा न ले सके।
बरसों पहले इस जमीन को अंग्रेजों ने श्रमिकों को बसाने के लिए खेती पर दिया था। इसके बाद कैंटोनमेंट बोर्ड ने अंग्रेजों के कार्यकाल के बाद अपने अधीन ले लिया और इसे स्थानीय निवासियों को छह हजार की लीज पर दे दिया गया। लेकिन धीरे-धीरे लीज की राशि को बढ़ाया गया जोकि 40 हजार प्रति एकड़ तक पहुंच गई जो खेतीहर मजूदरों के लिए चुकाना नामुमकिन हो गया। इसके बाद यह राशि 90 लाख रुपये तक पहुंच गई। इस राशि की प्राप्ति के लिए बोर्ड ने कोर्ट में याचिका दायर की और इसका फैसला भी बोर्ड के पक्ष में आया। इसके बाद उन्होंने 21 एकड़ जमीन पर कब्जा को लेकर बुधवार को कार्यवाही की और जमीन पर खड़ी फसल को नष्ट करवा दिया।
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22 परिवारों की आजिविका का साधन तोपखाना परेड के 22 परिवारों की आजीविका का साधन यह 21 एकड़ जमीन है। इस जमीन से तीन पीढि़यां जुड़ी हुई हैं। खेती करने वाले श्रमिक मनोज, ज्ञानचंद, अजय व मनीष ने बताया कि उनके दादा व पिता यहीं खेती करके बमुश्किल परिवार का गुजर बसर करते थे और अब वो उनके सिखाए काम को करके पेट का भरण पोषण कर रहे हैं। लेकिन कैंटोनमेंट बोर्ड ने उन्हें अब भूखे मरने पर मजबूर कर दिया है। संवाद
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इसके लिए उन्होंने जमीन के आसपास टैंट भी लगा दिया है ताकि अगर बोर्ड की टीम आए तो उसे शांतिपूर्ण तरीके से तारबंदी करने से रोका जा सके। वहीं स्थानीय लोगों ने प्रबुद्ध लोगों एक प्रतिनिधिमंडल भी तैयार किया है जो हरियाणा के मुख्यमंत्री से मिलकर मदद की गुहार लगाएंगे ताकि खेती और मजदूरी के लिए उपलब्ध करवाई गई जमीन पर बोर्ड अपना कब्जा न ले सके।
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बरसों पहले इस जमीन को अंग्रेजों ने श्रमिकों को बसाने के लिए खेती पर दिया था। इसके बाद कैंटोनमेंट बोर्ड ने अंग्रेजों के कार्यकाल के बाद अपने अधीन ले लिया और इसे स्थानीय निवासियों को छह हजार की लीज पर दे दिया गया। लेकिन धीरे-धीरे लीज की राशि को बढ़ाया गया जोकि 40 हजार प्रति एकड़ तक पहुंच गई जो खेतीहर मजूदरों के लिए चुकाना नामुमकिन हो गया। इसके बाद यह राशि 90 लाख रुपये तक पहुंच गई। इस राशि की प्राप्ति के लिए बोर्ड ने कोर्ट में याचिका दायर की और इसका फैसला भी बोर्ड के पक्ष में आया। इसके बाद उन्होंने 21 एकड़ जमीन पर कब्जा को लेकर बुधवार को कार्यवाही की और जमीन पर खड़ी फसल को नष्ट करवा दिया।
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22 परिवारों की आजिविका का साधन तोपखाना परेड के 22 परिवारों की आजीविका का साधन यह 21 एकड़ जमीन है। इस जमीन से तीन पीढि़यां जुड़ी हुई हैं। खेती करने वाले श्रमिक मनोज, ज्ञानचंद, अजय व मनीष ने बताया कि उनके दादा व पिता यहीं खेती करके बमुश्किल परिवार का गुजर बसर करते थे और अब वो उनके सिखाए काम को करके पेट का भरण पोषण कर रहे हैं। लेकिन कैंटोनमेंट बोर्ड ने उन्हें अब भूखे मरने पर मजबूर कर दिया है। संवाद