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Ambala News: ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूल नहीं, लाइसेंस के लिए कैथल-करनाल की लगा रहे दौड़ लोग
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अंबाला। जिले में अपना कोई इंस्टीटयूट ऑफ ड्राइविंग ट्रेनिंग एंड रिसर्स सेंटर नहीं है। इस कारण हैवी लाइसेंस बनवाने के लिए जिले से लोगों को रोजाना करनाल और कैथल, रोहतक व बहादुरगढ़ जाने को मजबूर होना पड़ रहा है। वहां पर कई युवाओं को हल्के व भारी मोटर वाहन चलाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। परिवहन विभाग ने जिले में सेंटर बनाने के लिए प्रक्रिया चलाई थी, मगर उन्हें अभी तक जगह ही नहीं मिली। इस कारण से लोगाें को घंटों समय बर्बाद करना पड़ रहा है।
हैवी लाइसेंस रोड सेफ्टी को-ऑर्डिनेटर हितेष ने बताया कि हैवी लाइसेंस बनवाने के लिए इंस्टीट्यूट ऑफ ड्राइविंग ट्रेनिंग एंड रिसर्स सेंटर में बीस दिन का कोर्स 34 घंटों में पूरा करवाया जाता है। शुरूआत में पहले और दूसरे दिन आठ9आठ घंटे की क्लास लगाई जाती है। इस क्लास के दौरान तीन दिन सिमेलेटर यानी कंप्यूटर मशीन पर ट्रेनिंग करवाई जाती है और 15 दिन का प्रेक्टिल करवाया जाता है। इन संस्थानों से प्रशिक्षण लेकर अच्छे चालक निकलते हैं।
अंतरराष्ट्रीय मानकों की सुविधाओं से लैस हैं ट्रैक
अंतरराष्ट्रीय मानकों के आधार पर तैयार इस संस्थान में ऑटोमेटिड ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक, आधुनिक प्रशिक्षण उपकरण और कंप्यूटीरीकृत प्रणाली से युक्त क्लास रूम, वर्कशॉप, इंजन रूम और इलेक्ट्रॉनिक्स डिस्प्ले बनाए गए हैं। यहां दोपहिया, तिपहिया, चाेपहिया, लाइट मोटर तथा भारी वाहनों चलाने की ट्रेनिंग दी जा रही है।
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आईडीटीआर से प्रपोजल का इंतजार है। जैसे ही यह प्रपोजल आती हैए अंबाला में भी ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट बनाने का काम शुरू किया जाएगा। ऐसा होने पर अंबाला के लोगों को कई किलोमीटर की दौड़ लगाने पर राहत मिलेगी।
-सुशील कुमार, आरटीए, अंबाला
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हैवी लाइसेंस रोड सेफ्टी को-ऑर्डिनेटर हितेष ने बताया कि हैवी लाइसेंस बनवाने के लिए इंस्टीट्यूट ऑफ ड्राइविंग ट्रेनिंग एंड रिसर्स सेंटर में बीस दिन का कोर्स 34 घंटों में पूरा करवाया जाता है। शुरूआत में पहले और दूसरे दिन आठ9आठ घंटे की क्लास लगाई जाती है। इस क्लास के दौरान तीन दिन सिमेलेटर यानी कंप्यूटर मशीन पर ट्रेनिंग करवाई जाती है और 15 दिन का प्रेक्टिल करवाया जाता है। इन संस्थानों से प्रशिक्षण लेकर अच्छे चालक निकलते हैं।
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अंतरराष्ट्रीय मानकों की सुविधाओं से लैस हैं ट्रैक
अंतरराष्ट्रीय मानकों के आधार पर तैयार इस संस्थान में ऑटोमेटिड ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक, आधुनिक प्रशिक्षण उपकरण और कंप्यूटीरीकृत प्रणाली से युक्त क्लास रूम, वर्कशॉप, इंजन रूम और इलेक्ट्रॉनिक्स डिस्प्ले बनाए गए हैं। यहां दोपहिया, तिपहिया, चाेपहिया, लाइट मोटर तथा भारी वाहनों चलाने की ट्रेनिंग दी जा रही है।
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आईडीटीआर से प्रपोजल का इंतजार है। जैसे ही यह प्रपोजल आती हैए अंबाला में भी ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट बनाने का काम शुरू किया जाएगा। ऐसा होने पर अंबाला के लोगों को कई किलोमीटर की दौड़ लगाने पर राहत मिलेगी।
-सुशील कुमार, आरटीए, अंबाला