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Ambala News: वारहीरोज स्टेडियम का मुख्य द्वार कागजों में अटका
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अंबाला। छावनी के निर्माणाधीन वार हीरोज मेमोरियल स्टेडियम के बाहर दोनों मुख्य गेटों के बीच बनने वाली कांच की दीवार न बनने की स्टेडियम की सुंदरता को ग्रहण लग रहा है।
बाकायदा कांच की दीवार बनाने के लिए इस जगह पर बनी सालों पुरानी किराये की नौ दुकानों को खाली करवाया गया था। उससे पहले किरायेदारों को स्टेडियम के ठीक सामने होस्टल की जगह पर नई दुकानें दी गई थी।
शिफ्टिंग के बाद कांच की दीवार बनाने की प्रक्रिया तो तेज हो गई थी लेकिन फिर ठंडे बस्ते में चली गई। करीब डेढ़ साल का समय बीतने के बावजूद अभी तक इस गेट को बनाने का काम शुरू नहीं किया गया है जबकि अब आचार संहिता लग गई है।
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स्टेडियम के बाहर ऐसा नजारा है कि सभी 9 दुकानों को तोड़ने के बाद जगह खाली पड़ी है। उसमें घास उगी हुई है और जगह-जगह कचरा भी पड़ा दिख रहा है। जबकि यह स्टेडियम करोड़ों रुपये की लागत से तैयार हो रहा है।
दरअसल, स्टेडियम के निर्माण के दौरान पहले दो मुख्य गेट निकाले गए थे। इन दोनों गेटों के बीच स्टेडियम की दुकानें पर किरायेदार थे। बाद में स्टेडियम की सुंदरता को बढ़ाने के लिए कांच की दीवार बनाने का निर्णय लिया गया था, ताकि दूसरे जिलों से आने वाले खिलाड़ी स्टेडियम का बाहर से देखें तो अच्छा लगे।
भ्रष्टाचार का मामला उठने के बाद ठेकेदार ने बंद कर दिया था काम
दरअसल, करोड़ों रुपये की लागत से निर्माणाधीन स्टेडियम के ठेकेदार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे। जिसके बाद मामला की जांच चल रही थी। इस बीच कोर्ट में मामला पहुंचने के बाद स्टेडियम का प्रोजेक्ट लंबे समय से ठप पड़ा था। यही कारण है कि मुख्य द्वार भी स्टेडियम का हिस्सा है। हालांकि कोर्ट के निर्देशों के बाद स्टेडियम का काम दोबारा से शुरू करने के लिए पीडब्ल्यूडी विभाग ने संबंधित ठेकेदार को निर्देश दिए है।
यह निर्माणाधीन स्टेडियम के ठेकेदार द्वारा ही बनाई जानी है। अभी फिलहाल काम रुका हुआ है। कोर्ट में भी मामला विचाराधीन है। आचार संहिता के बाद काम रफ्तार पकड़ने की उम्मीद है।
राजबीर, जिला खेल अधिकारी अंबाला।
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बाकायदा कांच की दीवार बनाने के लिए इस जगह पर बनी सालों पुरानी किराये की नौ दुकानों को खाली करवाया गया था। उससे पहले किरायेदारों को स्टेडियम के ठीक सामने होस्टल की जगह पर नई दुकानें दी गई थी।
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शिफ्टिंग के बाद कांच की दीवार बनाने की प्रक्रिया तो तेज हो गई थी लेकिन फिर ठंडे बस्ते में चली गई। करीब डेढ़ साल का समय बीतने के बावजूद अभी तक इस गेट को बनाने का काम शुरू नहीं किया गया है जबकि अब आचार संहिता लग गई है।
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स्टेडियम के बाहर ऐसा नजारा है कि सभी 9 दुकानों को तोड़ने के बाद जगह खाली पड़ी है। उसमें घास उगी हुई है और जगह-जगह कचरा भी पड़ा दिख रहा है। जबकि यह स्टेडियम करोड़ों रुपये की लागत से तैयार हो रहा है।
दरअसल, स्टेडियम के निर्माण के दौरान पहले दो मुख्य गेट निकाले गए थे। इन दोनों गेटों के बीच स्टेडियम की दुकानें पर किरायेदार थे। बाद में स्टेडियम की सुंदरता को बढ़ाने के लिए कांच की दीवार बनाने का निर्णय लिया गया था, ताकि दूसरे जिलों से आने वाले खिलाड़ी स्टेडियम का बाहर से देखें तो अच्छा लगे।
भ्रष्टाचार का मामला उठने के बाद ठेकेदार ने बंद कर दिया था काम
दरअसल, करोड़ों रुपये की लागत से निर्माणाधीन स्टेडियम के ठेकेदार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे। जिसके बाद मामला की जांच चल रही थी। इस बीच कोर्ट में मामला पहुंचने के बाद स्टेडियम का प्रोजेक्ट लंबे समय से ठप पड़ा था। यही कारण है कि मुख्य द्वार भी स्टेडियम का हिस्सा है। हालांकि कोर्ट के निर्देशों के बाद स्टेडियम का काम दोबारा से शुरू करने के लिए पीडब्ल्यूडी विभाग ने संबंधित ठेकेदार को निर्देश दिए है।
यह निर्माणाधीन स्टेडियम के ठेकेदार द्वारा ही बनाई जानी है। अभी फिलहाल काम रुका हुआ है। कोर्ट में भी मामला विचाराधीन है। आचार संहिता के बाद काम रफ्तार पकड़ने की उम्मीद है।
राजबीर, जिला खेल अधिकारी अंबाला।