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सफर की मुश्किल डगर
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अंबाला। छठ पूजा को लेकर यूपी-बिहार जाने वाले यात्रियों का सैलाब रेलवे स्टेशन पर उमड़ पड़ा। हजारों की संख्या में यात्री सुबह से लेकर रात तक स्टेशन पर पहुंचकर अपनी ट्रेन के आने का इंतजार कर रहे हैं। जैसे ही ट्रेन के आने की घोषणा होती है तो स्टेशन पर अफरा-तफरी का माहौल बन रहा है। यात्री ट्रेन में चढ़ने के लिए मारामारी कर रहे हैं।
अफरा-तफरी में यात्री यह तक नहीं देख रहे हैं कि आखिर वह ट्रेन में किस डिब्बे में चढ़ रहे हैं। भीड़ का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यात्री कुली की मदद से खिड़की से ट्रेन में घुस रहे हैं। वहीं जिन यात्रियों को ट्रेन में चढ़ने के बाद जगह नहीं मिली, उन्होंने ट्रेन के शौचालय में ठिकाना बना लिया। भीड़ इतनी ज्यादा है कि आरपीएफ, जीआरपी से लेकर रेलवे प्रशासन तक इस व्यवस्था को संभालने में असमर्थ दिखाई दे रहे हैं।
हालात यह हैं कि कुछ यात्री जान जोखिम में डालकर दरवाजे पर लटककर सफर करने को मजबूर हैं। दूसरी ओर यात्रियों ने छठ पूजा को देखते हुए ट्रेनों की संख्या बढ़ाने की मांग की है, ताकि कुछ राहत मिल सके। कुछ कोच के दरवाजे खुले मिले, जबकि बहुत से डिब्बों के दरवाजों पर यात्रियों ने कुंडी तक लगा रखी है।
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आरक्षित डिब्बों में अनारक्षित यात्रियों का कब्जा
जिन यात्रियों ने पहले सीट बुक करवा ली थी या फिर तत्काल में सीट बुक करवाई थी, उन्हें भी ट्रेन में चढ़ने के लिए मशक्कत करनी पड़ रही है। अगर किसी तरह चढ़ गए तो उन्हें पहले से उनकी सीट पर बैठे यात्रियों को उठाने के लिए बहस करनी पड़ रही है, जोकि उनके लिए परेशानी का सबब बन गया है।
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अफरा-तफरी में यात्री यह तक नहीं देख रहे हैं कि आखिर वह ट्रेन में किस डिब्बे में चढ़ रहे हैं। भीड़ का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यात्री कुली की मदद से खिड़की से ट्रेन में घुस रहे हैं। वहीं जिन यात्रियों को ट्रेन में चढ़ने के बाद जगह नहीं मिली, उन्होंने ट्रेन के शौचालय में ठिकाना बना लिया। भीड़ इतनी ज्यादा है कि आरपीएफ, जीआरपी से लेकर रेलवे प्रशासन तक इस व्यवस्था को संभालने में असमर्थ दिखाई दे रहे हैं।
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हालात यह हैं कि कुछ यात्री जान जोखिम में डालकर दरवाजे पर लटककर सफर करने को मजबूर हैं। दूसरी ओर यात्रियों ने छठ पूजा को देखते हुए ट्रेनों की संख्या बढ़ाने की मांग की है, ताकि कुछ राहत मिल सके। कुछ कोच के दरवाजे खुले मिले, जबकि बहुत से डिब्बों के दरवाजों पर यात्रियों ने कुंडी तक लगा रखी है।
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आरक्षित डिब्बों में अनारक्षित यात्रियों का कब्जा
जिन यात्रियों ने पहले सीट बुक करवा ली थी या फिर तत्काल में सीट बुक करवाई थी, उन्हें भी ट्रेन में चढ़ने के लिए मशक्कत करनी पड़ रही है। अगर किसी तरह चढ़ गए तो उन्हें पहले से उनकी सीट पर बैठे यात्रियों को उठाने के लिए बहस करनी पड़ रही है, जोकि उनके लिए परेशानी का सबब बन गया है।