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उद्घाटन के बाद पार्क को भूल गया विभाग
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मुलाना का बदहाल हर्बल पार्क। संवाद
- फोटो : Ambala
संवाद न्यूज एजेंसी
मुलाना। मुलाना से डेढ़ किलोमीटर दूर बना चौ. शंकरलाल हर्बल पार्क विभाग की अनदेखी चलते बदहाल हो गया है। करीब आठ साल पहले बने इस पार्क में बड़ी-बड़ी झाड़ियां उगी हुई हैं। पेड़ पौधे सिंचाई की सुविधा न होने से सूख रहे हैं। लोगों का कहना है कि इसके उद्घाटन के बाद वन विभाग ने पार्क की तरफ देखने तक की जरूरत नहीं समझी।
पार्क का मुख्य गेट तक गिरा हुआ है। शाम होते ही पार्क में नशेड़ियों का जमावड़ा लगा रहता है। क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि पार्क की स्थिति बदहाल होने के बाद भी वन विभाग इस पर ध्यान नहीं दे रहा है। उनका कहना है कि पार्क उद्घाटन सामारोह के समय यहां के हालात ठीक थे। उसके बाद विभागीय कर्मचारियों ने यहां के हालातों का जायजा तक नहीं लिया। इस पार्क का शुभारंभ 16 अगस्त 2014 को कांग्रेस पूर्व प्रदेशाध्यक्ष फूलचंद मुलाना द्वारा किया था। तब इसे मुलाना के पास लगती वन विभाग की खेड़ा गांव में चार एकड़ जमीन पर करीब 23.50 लाख रुपये की लागत से बनाया गया था।
दूर होने के कारण यहां नहीं जाते ग्रामीण
पार्क मुलाना से करीब डेढ़ किलोमीटर दूर स्थित है। ऐसे में मुलानावासी वहां जा पाने में असमर्थ है। जिसके चलते अब पार्क जंगल का रूप धारण करने लगा है। स्थानीय ग्रामीण रमेश, प्रवीण, मनीष, सचिन ने बताया कि एक ओर जहां सरकार शहरी पार्कों पर लाखों रुपये खर्च कर उन्हें सुंदर बना रही है, वहीं ग्रामीण क्षेत्र में बने पार्क अनदेखी के कारण अपनी सुंदरता खोने लगे है। उन्होंने बताया कि पार्क को मुलाना के नजदीक बनाना चाहिए था । ताकि ग्रामीण वहां जा सकते।
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मुलाना। मुलाना से डेढ़ किलोमीटर दूर बना चौ. शंकरलाल हर्बल पार्क विभाग की अनदेखी चलते बदहाल हो गया है। करीब आठ साल पहले बने इस पार्क में बड़ी-बड़ी झाड़ियां उगी हुई हैं। पेड़ पौधे सिंचाई की सुविधा न होने से सूख रहे हैं। लोगों का कहना है कि इसके उद्घाटन के बाद वन विभाग ने पार्क की तरफ देखने तक की जरूरत नहीं समझी।
पार्क का मुख्य गेट तक गिरा हुआ है। शाम होते ही पार्क में नशेड़ियों का जमावड़ा लगा रहता है। क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि पार्क की स्थिति बदहाल होने के बाद भी वन विभाग इस पर ध्यान नहीं दे रहा है। उनका कहना है कि पार्क उद्घाटन सामारोह के समय यहां के हालात ठीक थे। उसके बाद विभागीय कर्मचारियों ने यहां के हालातों का जायजा तक नहीं लिया। इस पार्क का शुभारंभ 16 अगस्त 2014 को कांग्रेस पूर्व प्रदेशाध्यक्ष फूलचंद मुलाना द्वारा किया था। तब इसे मुलाना के पास लगती वन विभाग की खेड़ा गांव में चार एकड़ जमीन पर करीब 23.50 लाख रुपये की लागत से बनाया गया था।
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दूर होने के कारण यहां नहीं जाते ग्रामीण
पार्क मुलाना से करीब डेढ़ किलोमीटर दूर स्थित है। ऐसे में मुलानावासी वहां जा पाने में असमर्थ है। जिसके चलते अब पार्क जंगल का रूप धारण करने लगा है। स्थानीय ग्रामीण रमेश, प्रवीण, मनीष, सचिन ने बताया कि एक ओर जहां सरकार शहरी पार्कों पर लाखों रुपये खर्च कर उन्हें सुंदर बना रही है, वहीं ग्रामीण क्षेत्र में बने पार्क अनदेखी के कारण अपनी सुंदरता खोने लगे है। उन्होंने बताया कि पार्क को मुलाना के नजदीक बनाना चाहिए था । ताकि ग्रामीण वहां जा सकते।
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