{"_id":"6a10bdaf1521ed17820954c2","slug":"the-decomposed-bodies-of-two-sisters-living-in-poverty-were-found-in-a-locked-house-ambala-news-c-36-1-sknl1017-163602-2026-05-23","type":"story","status":"publish","title_hn":"Ambala News: मुफलिसी में रह रही दो सगी बहनों के बंद मकान में मिले गले-सड़े शव","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Ambala News: मुफलिसी में रह रही दो सगी बहनों के बंद मकान में मिले गले-सड़े शव
विज्ञापन
प्रीत नगर स्थित मकान में पड़े लिफाफे में बंधे कूड़े के ढेर: संवाद
अंबाला। कैंट स्थित प्रीत नगर पॉश इलाके के एक बंद मकान में मुफलिसी में जीवन व्यतीत कर रही दो बहनों के शव गली-सड़ी अवस्था में मिले। दुर्गंध होने पर इलाकावासियों ने शुक्रवार की सुबह 8 बजे पुलिस बुलाई तो इसका खुलासा हुआ। पुलिस के अनुसार, दरवाजा तोड़कर भीतर दाखिल हुए तो एक ही कमरे में छोटी बहन अंजना कश्यप (40) का शव बेड के नीचे तो मानसिक रूप से परेशान मानु कश्यप (45) साल का शव बेड के ऊपर मिला। दोनों बहनें माता-पिता की मौत के बाद 10 साल से अकेली रह रही थी। कोई वारिस न मिलने पर फोरेंसिक एक्सपर्ट से पोस्टमार्टम के बाद पुलिस ने शव समाजसेवी संस्था को सौंप दिए हैं। जिन्होंने करनाल में दोनों बहनों का संस्कार किया।
पन्नी में बंद डायपरों व कूड़े के लगे थे जगह-जगह ढेर
महेश नगर पुलिस थाना प्रभारी जितेंद्र सिंह ढिल्लों के मुताबिक, जब स्थानीय लोगों की मौजूदगी में घर का मुख्य दरवाजा तोड़ा दाखिल हुए तो अंदर का मंजर बेहद दयनीय और झकझोर देने वाला था। कमरा मल मूत्र से सना था। जगह-जगह लिफाफों में बंद कूड़ा व मानसिक रूप से परेशान मानू (45) के डायपरों के ढेर लगे हुए थे। इस मंजर को देखकर साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि दोनों बहनें बेहद लाचारी, मुफलिसी और खराब परिस्थितियों में अपना जीवन बसर कर रही थीं। हालांकि पुलिस ने अंजना का मोबाइल फोन अपने कब्जे में ले लिया है। फोन की कॉल डिटेल भी खंगाली जाएगी। दोनों बहनों की मौत की गुत्थी अभी भी अनसुलझी है। अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि उनकी मौत भूख से हुई है या बीमारी या फिर कोई और वजह है।
माता की 15 तो पिता की 10 साल पहले हो चुकी है मौत
स्थानीय निवासियों के मुताबिक, यह परिवार 1990 से भी पहले अंबाला कैंट के प्रीत नगर में आकर बसा था। पिता प्रेम चंद अंबाला कैंट नगर परिषद में चतुर्थी श्रेणी कर्मी थे। 15 साल पहले प्रेम चंद की पत्नी की मौत हुई थी व 10 साल पहले प्रेम चंद की बीमारी से मौत हो गई थी तभी से दोनों बहनें एक साथ घर में रहती थीं। मानू मानसिक रूप से परेशान होने के कारण अंजना उसकी देखभाल करती थी और घर से बाहर ज्यादा नहीं निकलती थी। पड़ोसियों या रिश्तेदारों से कोई ज्यादा मिलना-जुलना नहीं था। वह पूरी तरह से सामाजिक तौर पर कट चुकी थीं। दोनों बहनें पिता की पेंशन पर ही अपनी गुजर बसर करती थीं।
विज्ञापन
दोनों बहनों के शवों का फोरेंसिक एक्सपर्ट से पोस्टमार्टम करवा दिया गया है। परिवार के किसी भी अन्य सदस्य का पता नहीं चल पाया है। पोस्टमार्टम के बाद शवों का एक निजी संस्था द्वारा संस्कार करवाया गया है। मौत के असल कारणों का पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही चल पाएगा। मामले की हर एंगल से जांच की जा रही है।
- जितेंद्र सिंह ढिल्लों, थाना प्रभारी, महेश नगर
लाखों की मालकिन थी दोनों बहनें, अपनों की बेरुखी से मिली गुमनाम मौत
अंबाला। लाखों की मालकिन...लेकिन नसीब हुई तो सिर्फ लावारिस मौत। कैंट के प्रीत नगर में हुई इस दिल दहला देने वाली घटना ने खून के रिश्तों को तार-तार कर दिया है। जिस मकान से कभी खुशियों की आवाजें आती थीं, उसी मकान के भीतर दोनों सगी बहनों ने घुट-घुट कर दम तोड़ दिया। हद तो तब हो गई जब मौत के बाद भी अपनों का दिल नहीं पसीजा। मौत के बाद भी कोई रिश्तेदार अर्थी को कंधा देने तक नहीं आया। आखिर में पुलिस के जरिये सूचना मिलने के बाद हरियाणा के जन सेवा दल ने दोनों बहनों का जिम्मा उठाया। करनाल में अंजना व मानू का विधि विधान से संस्कार किया। पुलिस के अनुसार, दोनों बहनों की एक रिश्तेदार मासी से संपर्क हुआ था तो उन्होंने दूर होने की बात बोलकर आने से मना कर दिया था।
पिता की पेंशन से चलता था दोनों बहनों का घर, अंजना करती थी ऑनलाइन शॉपिंग
पड़ोसी गुरविंद्र ने बताया कि पिता प्रेम चंद के देहांत के बाद मानसिक रूप से परेशान मानू के नाम पेंशन करवा दी थी। पंजाब नेशनल बैंक में आने वाली करीब 12 हजार रुपये पेंशन से ही उनका घर चलता था। अंजना अपनी बहन के कारण इधर-उधर भी नहीं जाती थी, दोनों बहनों में बेहद प्रेम था, इसलिए अंजना ज्यादा ऑनलाइन ही शॉपिंग करती थी। घर पर कोई सामान देने आता था तो गेट के ऊपर से लिफाफे पकड़ लेती थी, गेट तक नहीं खोलती थी। घर में भी पैकिंग बॉक्स का ढेरा लगा हुआ था। बताया कि कुछ महीनों से तो अंजना ने अपनी एक्टिवा से बिल्कुल ही निकलना बंद कर दिया था। केवल घर में ही रहती थी।
एक माह पहले आया था सिलिंडर, दूध लेना तक कर दिया था बंद
अंजना ने डेढ़ माह पहले ही अपने घर का सिलिंडर बुक करवाया था। एक माह पहले एचपी कंपनी का कर्मचारी सिलिंडर लेकर आया था। पहले दिन तो वो दरवाजा न खुलने के कारण लौट गया था। दूसरे दिन पड़ोसी गुरविंद्र से मिलकर अंजना को फोन कर बुलाया था, तब जाकर सिलिंडर लिया था। हैरानी की बात यह है कि वह सिलिंडर भी ऐसे ही बाहर बरामदे में पड़ा था, जबकि दूध देने वाले मुकेश ने बताया कि 30 अप्रैल से ही दूध लेने से मना कर दिया था। पड़ोसी के मुताबिक करीब एक माह पहले एक सालों बाद रिश्तेदार आए थे लेकिन अंजना ने उन्हें भीतर घुसकर चंद ही मिनटों में लौटा दिया था।
तीन साल पहले आखिरी बार एक कार्यक्रम में गई थी दोनों बहनें
इलाकावासी अमित ने बताया कि अंजना के पिता प्रेम चंद के देहांत के बाद उनकी मुलाकात अंजना से हुई थी। उस समय भी उनका कोई रिश्तेदार संस्कार के समय नहीं आया था। इलाकावासियों ने मिलकर संस्कार करवाया था और अंजना ने ही अपने पिता को मुखाग्नि दी थी। उसके बाद बोलचाल शुरू हो गई थी। 2023 में बेटे के जन्मदिन पर दोनों बहनें एक साथ उनके कार्यक्रम में आई थी। उसके बाद दोबारा उन्हें कभी बाहर एक साथ आते-जाते नहीं देखा।
शव को देख लग रहा कि मानू की पहले व अंजना की बाद में हुई मौत
कमरे में मिले शव गले सड़े हुए थे। मानू के शव की हालत ज्यादा खराब थी तो कंकाल जैसा दिख रहा था। हालांकि अभी मांस पूरी तरह से लटका हुआ था। जबकि अंजना के शरीर में कुछ अंग ठीक मिले हैं और मांस भी पूरी तरह से नहीं सड़ा था। फोरेंसिक एक्सपर्ट डॉ. सुमित का कहना है कि रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि आखिर किसकी पहले मौत हुई है। शवों में कीड़े नहीं थे।
मृत अंजना के मोबाइल से खुलेगा राज कि किससे होती थी बात
इस पूरे मामले में अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि आखिर मौत हुई कैसे, अंजना फोन पर परिवार के किस सदस्य से बात करती थी। हालांकि पुलिस ने अंजना का फोन अपने कब्जे में ले लिया है। मोबाइल की कॉल डिटेल से इन सवालों के जवाब मिल सकते हैं। उधर, पोस्टमार्टम के बाद दोनों बहनों का बिसरा, डीएनए व वेजाइनल स्वैब टेस्ट भी जांच के लिए भेज दिया है ताकि यह पता चल सके कि आखिर दोनों बहनें ही थी, उनके साथ कोई गलत हरकत या छेड़छाड़ तो नहीं हुई। इस एंगल से भी देखा जा रहा है कि अंजना की मौत पहले हुई होगी तो मानसिक रूप से लाचार छोटी बहन ने भूख और बेबसी के कारण दम तोड़ दिया होगा। हालांकि, पुलिस अभी किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से बच रही है।
विज्ञापन
पन्नी में बंद डायपरों व कूड़े के लगे थे जगह-जगह ढेर
महेश नगर पुलिस थाना प्रभारी जितेंद्र सिंह ढिल्लों के मुताबिक, जब स्थानीय लोगों की मौजूदगी में घर का मुख्य दरवाजा तोड़ा दाखिल हुए तो अंदर का मंजर बेहद दयनीय और झकझोर देने वाला था। कमरा मल मूत्र से सना था। जगह-जगह लिफाफों में बंद कूड़ा व मानसिक रूप से परेशान मानू (45) के डायपरों के ढेर लगे हुए थे। इस मंजर को देखकर साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि दोनों बहनें बेहद लाचारी, मुफलिसी और खराब परिस्थितियों में अपना जीवन बसर कर रही थीं। हालांकि पुलिस ने अंजना का मोबाइल फोन अपने कब्जे में ले लिया है। फोन की कॉल डिटेल भी खंगाली जाएगी। दोनों बहनों की मौत की गुत्थी अभी भी अनसुलझी है। अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि उनकी मौत भूख से हुई है या बीमारी या फिर कोई और वजह है।
विज्ञापन
माता की 15 तो पिता की 10 साल पहले हो चुकी है मौत
स्थानीय निवासियों के मुताबिक, यह परिवार 1990 से भी पहले अंबाला कैंट के प्रीत नगर में आकर बसा था। पिता प्रेम चंद अंबाला कैंट नगर परिषद में चतुर्थी श्रेणी कर्मी थे। 15 साल पहले प्रेम चंद की पत्नी की मौत हुई थी व 10 साल पहले प्रेम चंद की बीमारी से मौत हो गई थी तभी से दोनों बहनें एक साथ घर में रहती थीं। मानू मानसिक रूप से परेशान होने के कारण अंजना उसकी देखभाल करती थी और घर से बाहर ज्यादा नहीं निकलती थी। पड़ोसियों या रिश्तेदारों से कोई ज्यादा मिलना-जुलना नहीं था। वह पूरी तरह से सामाजिक तौर पर कट चुकी थीं। दोनों बहनें पिता की पेंशन पर ही अपनी गुजर बसर करती थीं।
विज्ञापन
दोनों बहनों के शवों का फोरेंसिक एक्सपर्ट से पोस्टमार्टम करवा दिया गया है। परिवार के किसी भी अन्य सदस्य का पता नहीं चल पाया है। पोस्टमार्टम के बाद शवों का एक निजी संस्था द्वारा संस्कार करवाया गया है। मौत के असल कारणों का पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही चल पाएगा। मामले की हर एंगल से जांच की जा रही है।
- जितेंद्र सिंह ढिल्लों, थाना प्रभारी, महेश नगर
लाखों की मालकिन थी दोनों बहनें, अपनों की बेरुखी से मिली गुमनाम मौत
अंबाला। लाखों की मालकिन...लेकिन नसीब हुई तो सिर्फ लावारिस मौत। कैंट के प्रीत नगर में हुई इस दिल दहला देने वाली घटना ने खून के रिश्तों को तार-तार कर दिया है। जिस मकान से कभी खुशियों की आवाजें आती थीं, उसी मकान के भीतर दोनों सगी बहनों ने घुट-घुट कर दम तोड़ दिया। हद तो तब हो गई जब मौत के बाद भी अपनों का दिल नहीं पसीजा। मौत के बाद भी कोई रिश्तेदार अर्थी को कंधा देने तक नहीं आया। आखिर में पुलिस के जरिये सूचना मिलने के बाद हरियाणा के जन सेवा दल ने दोनों बहनों का जिम्मा उठाया। करनाल में अंजना व मानू का विधि विधान से संस्कार किया। पुलिस के अनुसार, दोनों बहनों की एक रिश्तेदार मासी से संपर्क हुआ था तो उन्होंने दूर होने की बात बोलकर आने से मना कर दिया था।
पिता की पेंशन से चलता था दोनों बहनों का घर, अंजना करती थी ऑनलाइन शॉपिंग
पड़ोसी गुरविंद्र ने बताया कि पिता प्रेम चंद के देहांत के बाद मानसिक रूप से परेशान मानू के नाम पेंशन करवा दी थी। पंजाब नेशनल बैंक में आने वाली करीब 12 हजार रुपये पेंशन से ही उनका घर चलता था। अंजना अपनी बहन के कारण इधर-उधर भी नहीं जाती थी, दोनों बहनों में बेहद प्रेम था, इसलिए अंजना ज्यादा ऑनलाइन ही शॉपिंग करती थी। घर पर कोई सामान देने आता था तो गेट के ऊपर से लिफाफे पकड़ लेती थी, गेट तक नहीं खोलती थी। घर में भी पैकिंग बॉक्स का ढेरा लगा हुआ था। बताया कि कुछ महीनों से तो अंजना ने अपनी एक्टिवा से बिल्कुल ही निकलना बंद कर दिया था। केवल घर में ही रहती थी।
एक माह पहले आया था सिलिंडर, दूध लेना तक कर दिया था बंद
अंजना ने डेढ़ माह पहले ही अपने घर का सिलिंडर बुक करवाया था। एक माह पहले एचपी कंपनी का कर्मचारी सिलिंडर लेकर आया था। पहले दिन तो वो दरवाजा न खुलने के कारण लौट गया था। दूसरे दिन पड़ोसी गुरविंद्र से मिलकर अंजना को फोन कर बुलाया था, तब जाकर सिलिंडर लिया था। हैरानी की बात यह है कि वह सिलिंडर भी ऐसे ही बाहर बरामदे में पड़ा था, जबकि दूध देने वाले मुकेश ने बताया कि 30 अप्रैल से ही दूध लेने से मना कर दिया था। पड़ोसी के मुताबिक करीब एक माह पहले एक सालों बाद रिश्तेदार आए थे लेकिन अंजना ने उन्हें भीतर घुसकर चंद ही मिनटों में लौटा दिया था।
तीन साल पहले आखिरी बार एक कार्यक्रम में गई थी दोनों बहनें
इलाकावासी अमित ने बताया कि अंजना के पिता प्रेम चंद के देहांत के बाद उनकी मुलाकात अंजना से हुई थी। उस समय भी उनका कोई रिश्तेदार संस्कार के समय नहीं आया था। इलाकावासियों ने मिलकर संस्कार करवाया था और अंजना ने ही अपने पिता को मुखाग्नि दी थी। उसके बाद बोलचाल शुरू हो गई थी। 2023 में बेटे के जन्मदिन पर दोनों बहनें एक साथ उनके कार्यक्रम में आई थी। उसके बाद दोबारा उन्हें कभी बाहर एक साथ आते-जाते नहीं देखा।
शव को देख लग रहा कि मानू की पहले व अंजना की बाद में हुई मौत
कमरे में मिले शव गले सड़े हुए थे। मानू के शव की हालत ज्यादा खराब थी तो कंकाल जैसा दिख रहा था। हालांकि अभी मांस पूरी तरह से लटका हुआ था। जबकि अंजना के शरीर में कुछ अंग ठीक मिले हैं और मांस भी पूरी तरह से नहीं सड़ा था। फोरेंसिक एक्सपर्ट डॉ. सुमित का कहना है कि रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि आखिर किसकी पहले मौत हुई है। शवों में कीड़े नहीं थे।
मृत अंजना के मोबाइल से खुलेगा राज कि किससे होती थी बात
इस पूरे मामले में अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि आखिर मौत हुई कैसे, अंजना फोन पर परिवार के किस सदस्य से बात करती थी। हालांकि पुलिस ने अंजना का फोन अपने कब्जे में ले लिया है। मोबाइल की कॉल डिटेल से इन सवालों के जवाब मिल सकते हैं। उधर, पोस्टमार्टम के बाद दोनों बहनों का बिसरा, डीएनए व वेजाइनल स्वैब टेस्ट भी जांच के लिए भेज दिया है ताकि यह पता चल सके कि आखिर दोनों बहनें ही थी, उनके साथ कोई गलत हरकत या छेड़छाड़ तो नहीं हुई। इस एंगल से भी देखा जा रहा है कि अंजना की मौत पहले हुई होगी तो मानसिक रूप से लाचार छोटी बहन ने भूख और बेबसी के कारण दम तोड़ दिया होगा। हालांकि, पुलिस अभी किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से बच रही है।

प्रीत नगर स्थित मकान में पड़े लिफाफे में बंधे कूड़े के ढेर: संवाद

प्रीत नगर स्थित मकान में पड़े लिफाफे में बंधे कूड़े के ढेर: संवाद

प्रीत नगर स्थित मकान में पड़े लिफाफे में बंधे कूड़े के ढेर: संवाद

प्रीत नगर स्थित मकान में पड़े लिफाफे में बंधे कूड़े के ढेर: संवाद