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Ambala News: सांस्कृतिक संगम से दिखाई तेलंंगाना राज्य की संस्कृति
Fri, 29 Aug 2025 02:13 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला
संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला
Updated Fri, 29 Aug 2025 02:13 AM IST
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पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय में लोक नृत्य प्रस्तुत करते प्रतिभागी। संवाद
- फोटो : samvad
संवाद न्यूज एजेंसी,
अंबाला। पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय-2 में वीरवार को केंद्रीय विद्यालय संगठन एवं राष्ट्रीय एकता पर्व के तहत एक भारत श्रेष्ठ भारत एवं कला उत्सव की संभाग स्तरीय प्रतियोगिताओं का शुभारंभ हुआ। इस प्रतियोगिता में हरियाणा और हिमाचल प्रदेश के केंद्रीय विद्यालयों के 450 विद्यार्थियों ने प्रतिभाग किया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि उपायुक्त अजय सिंह तोमर, विशिष्ट अतिथि केवीएस गुरुग्राम संभाग के उपायुक्त वरुण मित्र रहे। इस दौरान हरियाणा का युग्मित राज्य तेलंगाना को बनाया गया है, जिसमें हरियाणा के विद्यार्थियों को तेलंगाना की संस्कृति को प्रदर्शित करना था। इसी क्रम में विद्यार्थियों ने तेलंगाना राज्य के लोक नृत्य प्रस्तुत किए। वहीं एकल गीत प्रतियोगिता में भी तेलंगाना राज्य से जुड़े गीतों को प्रस्तुत किया।
शिक्षाविदों और कला विशेषज्ञों ने किया मूल्यांकन
इस अवसर पर निर्णायक मंडल में विभिन्न विद्यालयों एवं महाविद्यालयों से आए विशिष्ट शिक्षाविद् और कला विशेषज्ञ भी सम्मिलित हुए, जिन्होंने प्रस्तुतियों का मूल्यांकन किया। इस कार्यक्रम में जो टीम चयनित होगी उसे राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिलेगा। ये प्रतियोगिताएं 29 अगस्त तक चलेंगी, जिनमें चित्रकला, नाट्य एवं लोककला की मनोहारी प्रस्तुतियां होंगी, इसके अतिरिक्त पर्यावरणविद एवं चिकित्सक डॉ. जोगिन्दर सिंह, पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय क्रमांक 1 के प्रधानाचार्य अजीत कुमार यादव, पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय क्रमांक 3 के प्रधानाचार्य अमित अरोड़ा एवं केंद्रीय विद्यालय क्रमांक 4 के प्रधानाचार्य अमन गुप्ता उपस्थित रहे।
प्रतिभागियों ने इन नृत्यों को किया प्रस्तुत
विद्यार्थियों ने तेलंगाना के कुछ प्रमुख नृत्यों को प्रस्तुत किया, जिनमें पेरिनी शिवतांडवम, जिसमें भगवान शिव को समर्पित वीर नृत्य, जिसे आनंद तांडव भी कहते हैं। बुर्रकथा में गीत, नृत्य और वादन का मिश्रण दिखाया। लंबाडी नृत्य को रंग-बिरंगे परिधान और आभूषणों के साथ किया गया। ढोलकल नृत्य में ढोल की थाप पर प्रतिभागी झूमते दिखे। इसी प्रकार गुसादी नृत्य, ओग्गु कथा और कोलाट्टम की प्रस्तुति दी गई।
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कला ही समाज को जोड़ने की कड़ी : उपायुक्त
उपायुक्त अजय सिंह तोमर ने कहा कि भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी शक्ति है उसकी विविधता में एकता निहित है। आज के मंच ने इस सत्य को सजीव कर दिया है। विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों ने यह सिद्ध किया कि कला ही समाज को जोड़ने की सबसे बड़ी कड़ी है। प्रधानाचार्य हरिन्द्र सिंह लाम्बा ने कहा कि यह उत्सव विद्यार्थियों को अपनी कला प्रदर्शित करने का अवसर ही नहीं देता, बल्कि राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक बंधुत्व का सजीव संदेश भी देता है।
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अंबाला। पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय-2 में वीरवार को केंद्रीय विद्यालय संगठन एवं राष्ट्रीय एकता पर्व के तहत एक भारत श्रेष्ठ भारत एवं कला उत्सव की संभाग स्तरीय प्रतियोगिताओं का शुभारंभ हुआ। इस प्रतियोगिता में हरियाणा और हिमाचल प्रदेश के केंद्रीय विद्यालयों के 450 विद्यार्थियों ने प्रतिभाग किया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि उपायुक्त अजय सिंह तोमर, विशिष्ट अतिथि केवीएस गुरुग्राम संभाग के उपायुक्त वरुण मित्र रहे। इस दौरान हरियाणा का युग्मित राज्य तेलंगाना को बनाया गया है, जिसमें हरियाणा के विद्यार्थियों को तेलंगाना की संस्कृति को प्रदर्शित करना था। इसी क्रम में विद्यार्थियों ने तेलंगाना राज्य के लोक नृत्य प्रस्तुत किए। वहीं एकल गीत प्रतियोगिता में भी तेलंगाना राज्य से जुड़े गीतों को प्रस्तुत किया।
शिक्षाविदों और कला विशेषज्ञों ने किया मूल्यांकन
इस अवसर पर निर्णायक मंडल में विभिन्न विद्यालयों एवं महाविद्यालयों से आए विशिष्ट शिक्षाविद् और कला विशेषज्ञ भी सम्मिलित हुए, जिन्होंने प्रस्तुतियों का मूल्यांकन किया। इस कार्यक्रम में जो टीम चयनित होगी उसे राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिलेगा। ये प्रतियोगिताएं 29 अगस्त तक चलेंगी, जिनमें चित्रकला, नाट्य एवं लोककला की मनोहारी प्रस्तुतियां होंगी, इसके अतिरिक्त पर्यावरणविद एवं चिकित्सक डॉ. जोगिन्दर सिंह, पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय क्रमांक 1 के प्रधानाचार्य अजीत कुमार यादव, पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय क्रमांक 3 के प्रधानाचार्य अमित अरोड़ा एवं केंद्रीय विद्यालय क्रमांक 4 के प्रधानाचार्य अमन गुप्ता उपस्थित रहे।
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प्रतिभागियों ने इन नृत्यों को किया प्रस्तुत
विद्यार्थियों ने तेलंगाना के कुछ प्रमुख नृत्यों को प्रस्तुत किया, जिनमें पेरिनी शिवतांडवम, जिसमें भगवान शिव को समर्पित वीर नृत्य, जिसे आनंद तांडव भी कहते हैं। बुर्रकथा में गीत, नृत्य और वादन का मिश्रण दिखाया। लंबाडी नृत्य को रंग-बिरंगे परिधान और आभूषणों के साथ किया गया। ढोलकल नृत्य में ढोल की थाप पर प्रतिभागी झूमते दिखे। इसी प्रकार गुसादी नृत्य, ओग्गु कथा और कोलाट्टम की प्रस्तुति दी गई।
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कला ही समाज को जोड़ने की कड़ी : उपायुक्त
उपायुक्त अजय सिंह तोमर ने कहा कि भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी शक्ति है उसकी विविधता में एकता निहित है। आज के मंच ने इस सत्य को सजीव कर दिया है। विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों ने यह सिद्ध किया कि कला ही समाज को जोड़ने की सबसे बड़ी कड़ी है। प्रधानाचार्य हरिन्द्र सिंह लाम्बा ने कहा कि यह उत्सव विद्यार्थियों को अपनी कला प्रदर्शित करने का अवसर ही नहीं देता, बल्कि राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक बंधुत्व का सजीव संदेश भी देता है।

पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय में लोक नृत्य प्रस्तुत करते प्रतिभागी। संवाद- फोटो : samvad

पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय में लोक नृत्य प्रस्तुत करते प्रतिभागी। संवाद- फोटो : samvad

पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय में लोक नृत्य प्रस्तुत करते प्रतिभागी। संवाद- फोटो : samvad