फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Ambala News ›   stress increase in teacher,relexcation therepy gives rahat

शिक्षकों में बढ़ रहा स्ट्रेस, रिलेक्सेशन थैरेपी देगी राहत

Sat, 06 Jun 2015 01:13 AM IST
ब्यूूराे/अमर उजाला अंबाला
ब्यूूराे/अमर उजाला अंबाला Updated Sat, 06 Jun 2015 01:13 AM IST
विज्ञापन
छात्रों के साथ-साथ शिक्षकों में भी स्ट्रैस लगातार बढ़ रहा है। स्कूलों में बच्चों की और फिर घरों की जिम्मेदारियों ने शिक्षकों में भी तनाव की स्थिति लगातार बढ़ रही है।
विज्ञापन


इसलिए स्कूली छात्रों को अब रिलेक्सेशन थैरेपी से रूबरू करवाया जाएगा। सीबीएसई के निर्देशों के चलते प्राइवेट स्कूलों के शिक्षकों को ये ट्रेनिंग दी जा रही है।
विज्ञापन


अंबाला में विभिन्न प्राइवेट स्कूलों के नब्बे के करीब शिक्षक ये ट्रेनिंग ले रहे हैं। फिलहाल पहले चरण में नर्सरी से लेकर दूसरी कक्षा पढ़ाने वाले शिक्षकों को रिलेक्सेशन थैरेपी की ट्रेनिंग दी जा रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन



इसलिए बढ़ता है शिक्षकों में तनाव
मनोविशेषज्ञ प्रोफेसर सज्जन सिंह बताते हैं कि शिक्षकों में दबाव की स्थिति पहले से ही है, मगर आज के परिवेश में ये दबाव काफी बढ़ रहा है।

आज एजुकेशन ट्रेंड इतना अपडेट हो चुका है कि छात्रों को पढ़ाई के साथ-साथ अन्य एक्टिविटी में भी आगे रखना और प्रतिस्पर्धा में उन्हे पिछडने न देने का दबाव भी शिक्षकों पर बहुत ज्यादा बढ़ चुका है। उनके अनुसार खासकर प्राइवेट स्कूलों के शिक्षकों में ये दबाव बहुत ज्यादा देखा गया है।

 प्रोफेसर सिंह बताते हैं कि प्राइवेट ही नहीं सरकारी स्कूलों के शिक्षकों पर भी पढ़ाने के साथ-साथ अन्य तरह की सरकारी ड्यूटियां का दबाव रहता है, रिजल्ट सुधारने का दबाव बना रहता है।

इसलिए कुल मिलाकर आज के परिवेश में शिक्षकों में तनाव की स्थिति बहुत ज्यादा बढ़ रही है, जिसका दूरगामी असर कहीं न कहीं शिक्षकों की पढ़ाई पर भी पढ़ता है। इसलिए ऐसी स्थिति में आज शिक्षकों के लिए रिलेक्सेशन थैरेपी बहुत जरूरी है।

ये है रिलेक्सेशन थैरेपी की तकनीक

शिक्षकों को इस थैरेपी में ऑटोजैनिक रिलेक्सेशन, प्रोग्रेसिव मसल्स रिलेक्सेशन, विजुअलाइजेशन, डीप ब्रीथिंग, हाइपनोसिस, मेडिटेशन, योगा, म्यूजिक एंड आर्ट इत्यादि कई तरह के तकनीक ऐसी हैं, जिससे शिक्षकों को रिलेक्स रखने में काफी मदद मिलती है।

इन तकनीकों का इस्तेमाल दिन में लंबे समय पर करने की जरूरत नहीं होती। इन्हें दिन में केवल 20 से 30 मिनट तक पूरी एकाग्रता से करना होता है। इससे एक लंबे समय तक शिक्षकों को रिलेक्स मिलता है और तनाव भी काफी कम होता है।

---

प्राइवेट स्कूलों के करीबन नब्बे शिक्षकों को रिलेक्सेशन थैरेपी की ट्रेनिंग दी जा रही है। शिक्षक इस थैरेपी को सीखकर आगे अपने बच्चों को भी इसका ज्ञान दे सकते हैं। ताकि बच्चे भी इन तकनीकों का इस्तेमाल खुद को रिलेक्स करने में कर सकें।
-मोनिका परिहार, विशेषज्ञ-

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed