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हालात : रक्त की कमी से जूझ रहे जिले के दो सरकारी ब्लड बैंक
Sun, 30 Nov 2025 12:52 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला
संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला
Updated Sun, 30 Nov 2025 12:52 AM IST
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अंबाला कैंट के नागरिक अस्पताल का ब्लड बैंक: संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला। रक्तदान से बड़ा कोई दान नहीं है, जो मरीज की जिंदगी व मौत के बीच लटकी जान को बचा सकती है, लेकिन पिछले एक सप्ताह से इस महादान की कमी से जिले के दो सरकारी ब्लड बैंक जूझ रहे हैं। अंबाला कैंट व सिटी के नागरिक अस्पतालों के ब्लड बैंक के स्टॉक में रक्त की यूनिट लगभग खत्म हो चुकी है।
जिस भी मरीज को जरूरत होती है तो पहले उसे अपने रिश्तेदारों या फिर जान पहचान के लोगों से रक्तदान की गुहार लगानी पड़ रही है। डोनर देने के बाद उन्हें रक्त मिल पा रहा है। या फिर उन्हें निजी संस्थाओं के ब्लड बैंक में जाकर रुपये चुकाने पड़ रहे हैं। बावजूद अस्पताल प्रबंधन की तरफ से केवल प्रयास करने की बात बोलकर पल्ला झाड़ा जा रहा है, जबकि दोनों बैंकों में रोजाना 50 यूनिट ब्लड की खपत होती है।
गर्भवती व थैलेसीमिया के मरीजों को रहती है जरूरत : सड़क हादसों में घायल होने वाले मरीजों के अलावा प्रसूति विभाग में गर्भवती महिलाओं व थैलेसीमिया के मरीजों को भी जरूरत पड़ती है। डिलीवरी के दौरान महिलाओं में खून की मात्रा काफी कम हो जाती है। ऐसे में उन्हें पहले रक्त की व्यवस्था करनी पड़ती है।
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रक्त की कमी को पूरा करने के लिए स्वास्थ्य विभाग की तरफ से सामाजिक संगठनों से आह्वान किया जा रहा है कि वे छोटे- छोटे रक्तदान शिविर का आयोजन कर रक्तदान करवाएं ताकि खून की कमी से किसी मरीज की जान न जा सके। हालांकि अस्पताल में आने वाले मरीज भी सेवाभाव से आगे आकर रक्तदान कर रहे हैं ताकि दूसरे मरीज को भी रक्त मिल सके।
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अंबाला। रक्तदान से बड़ा कोई दान नहीं है, जो मरीज की जिंदगी व मौत के बीच लटकी जान को बचा सकती है, लेकिन पिछले एक सप्ताह से इस महादान की कमी से जिले के दो सरकारी ब्लड बैंक जूझ रहे हैं। अंबाला कैंट व सिटी के नागरिक अस्पतालों के ब्लड बैंक के स्टॉक में रक्त की यूनिट लगभग खत्म हो चुकी है।
जिस भी मरीज को जरूरत होती है तो पहले उसे अपने रिश्तेदारों या फिर जान पहचान के लोगों से रक्तदान की गुहार लगानी पड़ रही है। डोनर देने के बाद उन्हें रक्त मिल पा रहा है। या फिर उन्हें निजी संस्थाओं के ब्लड बैंक में जाकर रुपये चुकाने पड़ रहे हैं। बावजूद अस्पताल प्रबंधन की तरफ से केवल प्रयास करने की बात बोलकर पल्ला झाड़ा जा रहा है, जबकि दोनों बैंकों में रोजाना 50 यूनिट ब्लड की खपत होती है।
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गर्भवती व थैलेसीमिया के मरीजों को रहती है जरूरत : सड़क हादसों में घायल होने वाले मरीजों के अलावा प्रसूति विभाग में गर्भवती महिलाओं व थैलेसीमिया के मरीजों को भी जरूरत पड़ती है। डिलीवरी के दौरान महिलाओं में खून की मात्रा काफी कम हो जाती है। ऐसे में उन्हें पहले रक्त की व्यवस्था करनी पड़ती है।
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रक्त की कमी को पूरा करने के लिए स्वास्थ्य विभाग की तरफ से सामाजिक संगठनों से आह्वान किया जा रहा है कि वे छोटे- छोटे रक्तदान शिविर का आयोजन कर रक्तदान करवाएं ताकि खून की कमी से किसी मरीज की जान न जा सके। हालांकि अस्पताल में आने वाले मरीज भी सेवाभाव से आगे आकर रक्तदान कर रहे हैं ताकि दूसरे मरीज को भी रक्त मिल सके।

अंबाला कैंट के नागरिक अस्पताल का ब्लड बैंक: संवाद

अंबाला कैंट के नागरिक अस्पताल का ब्लड बैंक: संवाद