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Ambala News: धनुष तोड़ जानकी जी के हो गए श्रीराम

Sun, 06 Oct 2024 04:28 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sun, 06 Oct 2024 04:28 AM IST
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Shri Ram broke the bow and became Janaki's
अंबाला। छावनी के खुखरैन भवन में श्रीराम लीला कमेटी बजाजा बाजार द्वारा श्री रामलीला दशहरा महोत्सव दो अक्टूबर से लेकर 12 अक्टूबर तक धूमधाम से मनाया जा रहा है।
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चौथे दिन नगर दर्शन, प्रभु श्रीराम, लखन लाल द्वारा जनक पुरी घूमना, पूर्वासियों से मिलन, पुष्प बगिया, रामजी और जानकी जी का प्रथम मिलन, जानकी जी की ओर से गौरा पूजन, सभी राजाओं को स्वयंवर में आना, रावण, बारासुर संवाद, जनक संवाद, लखन संवाद, जयमाला प्रसंग, धनुष का खंडन, जानकी जी का श्रीराम जी के साथ विवाह, जयमाला प्रसंग, लक्ष्मण, परशुराम संवाद लीला के माध्यम से दिखाया गया।
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श्रीधाम वृंदावन से पधारे नीलांचल मंंडल के पंडित देवदत्त वशिष्ठ और प्रेम चंद वशिष्ठ ने बताया कि सबसे पहले श्रीगणेश जी का पूजन किया गया। कि जब पुर्वासी श्रीराम जी से मिले, इसके बाद उन्होने श्री राजमी को बताया कि जनक जी का महल है, जनक सभा कहां है, वहीं राजा जनक की पत्नी के भवन के बारे में भी बताया। इसके बाद उन्होंने गिरजा मां, भगवती कात्यायनी जी का मंदिर भी बताया। इसके साथ ही धनुष यज्ञ का मेला की जानकारी दी।
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यह जानने के बाद श्रीराम गुरू विश्वामित्र की आज्ञा से पुष्प बगिया में पुष्प लेने गए। यहां पर श्रीराम जी का सीता जी के साथ प्रथम मिलन हुआ। इसके बाद सीताजी द्वारा गिरजा जी का पूजन किया गया। जब सीताजी का स्वयंवर शुरू हुआ तो उसमें अनेक राज्यों के राजाओं का आना हुआ। इसमें पाताल निवासी बारासुर आए, लंका पति रावण भी पहुंचे। इस दौरान रावण और बारासुक के बीच संवाद हुआ, संवाद में दोनों ने अपनी अपनी वीरता का बखान किया।
जब स्वयंवर शुरू हुआ तो सभी राजाओं ने बारी-बारी से धनुष तोड़ने का प्रयास किया। लेकिन धनुष नहीं टूटा। यह देख राजा जनक जी को क्रोध आया। उन्होंने स्वयंवर सभा में मौजूद सभी राजाओं से संवाद करते हुए कहा कि यह पृथ्वी क्षत्रियों से विहीन है, यह सुनकर लक्ष्मण जी को क्रोध आया।
लक्ष्मण जी ने संवाद शुरू करते हुए क्षत्रिय कुल व अपने और रामजी के बारे में बतलाया। यह देख रामजी ने लखन जी को शांत करवाया। इसके बाद गुरू की आज्ञा ने राम जी ने धनुष का खंडन किया। धनुष खंडन के बाद सीता जी आईं और उन्होंने श्रीराम जी के गले में वरमाला पहनाई। तभी परशुराम जी भी आ गए। उन्होंने जब धनुष के खंड खंड देखे तो उन्हें क्रोध आ गया। इसके बाद उन्होंने जनक राज महाराज पर क्रोध किया।

यह देख श्रीराम जी आए और उन्होंने अपने आप को कहा कि दास ने यह काम किया है। यह सुनकर परशुराम जी और क्रोधित हो गए। इस बीच लखन लाल को भी क्रोध आ गया। इसके बाद परशुराम और लखन लाल के बीच संवाद हुआ।
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