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Ambala News: सेक्टर 32-34 की हालत खस्ता, 1780 प्लॉट में से 245 ने ही बनाया आसियाना
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अंबाला छावनी के सेक्टर 34 के प्रवेश द्वार की टूटी सड़क के बीच में रखी झाड़ियां। संवाद
- लोग बोले- दो साल से बाढ़ जैसे हालात बनने से बढ़ी परेशानी, झाड़ियां उगने से जंगल जैसा हुआ नजारा
संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला। छावनी में रिहायशी क्षेत्र के विकास के लिए हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) ने सेक्टर 32 और 34 बनाए। इन सेक्टरों की हालत गांव से भी बदतर हो चुकी है। हालात यह हैं कि यहां कोई रहना नहीं चाहता है। दोनों सेक्टरों में 1780 प्लॉट हैं, जिसमें 245 प्लॉटधारकों ने ही मकान बनाए हैं। जबकि अन्य प्लॉट खाली पड़े हैं। इनमें झाड़ियां उग रही हैं तो कहीं जलभराव है। सिर्फ इतना ही नहीं बल्कि दोनों सेक्टरों की इंटरलॉकिंग सड़कें भी बारिश में उखड़ गईं तो सुरक्षा के इंतजाम भी कुछ नहीं हैं। एचएसवीपी ने यहां पार्क बनाया है तो वहां नशेड़ियों का डेरा रहता है।
सेक्टर के लोग दो साल से बाढ़ के पानी का दंश झेल रहे हैं। सेक्टर-34 वेलफेयर सोसाइटी के प्रधान प्रदीप शर्मा ने बताया कि जनवरी में एचएसवीपी के पंचकूला स्थित मुख्य प्रशासक से मिले थे जिसमें सेक्टर के हालात साझा किए। उन्होंने मांग की कि सेक्टर-34 में मार्केट कॉम्प्लेक्स की पार्किंग का काम तीन साल पहले पूरा हो चुका है फिर भी दुकानों की नीलामी प्रक्रिया फाइलों में दबी है। सेक्टर में एक भी दुकान नहीं है। लोगों को सामान खरीदने के लिए नन्हेड़ा मार्केट या फिर पांच किलोमीटर दूर स्थित बाजारों में जाना पड़ता है।
सट्रीट लाइटें टूटीं
पड़ताल में सामने आया कि सेक्टर-32 में 500 प्लॉट हैं जिनमें से केवल 15 घरों में लोग रह रहे हैं। इसी तरह सेक्टर-34 में 1280 प्लॉटों में से मात्र 230 में आबादी बसी है। सुविधाओं के अभाव में लोग मकान नहीं बना रहे, जिससे खाली प्लॉट झाड़ियों के जंगल बन चुके हैं। इंटरलॉकिंग टाइल्स वाली सड़कों के बीच से घास उग रही है, डिवाइडर टूट रहे हैं और खंभों पर लगी स्ट्रीट लाइटें टूटी हुई हैं। सुरक्षा के नाम पर कैमरों की कोई सुविधा नहीं है। जबकि पिछले साल क्षेत्र में सैर करते हुए सेवानिवृत्त कर्मचारी से लूट भी हो चुकी है।
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सफाई कर्मचारी नहीं आते
सेक्टर-34 वेलफेयर सोसाइटी के पदाधिकारियों ने बताया कि सेक्टरों में सफाई की जिम्मेदारी एचएसवीपी की है। तीन साल से यहां एक भी सफाई कर्मचारी नियुक्त नहीं हुआ। वहीं स्वीकृत 5 एमएलडी सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट केवल कागजों में है। जबकि धरातल पर सीवरेज सिस्टम जाम पड़ा है। बरसात के दिनों में यहां के हालात सबसे ज्यादा खराब हो जाते हैं। पिछले दो सालों से टांगरी नदी का पानी सेक्टर-34 में भर रहा है, जिसके कारण खाली प्लाट, सड़कें खराब तक हो जाती है। सोसाइटी के सचिव विजय ने बताया कि शाहपुर गुरुद्वारा से घसीटपुर तक करीब 1.5 किमी का बांध बनाना अनिवार्य है। सिंचाई विभाग और हुडा के बीच तालमेल की कमी के कारण जनता बाढ़ का दंश झेलने को मजबूर है।
सेक्टर में स्कूल की सुविधा नहीं
सेक्टर की आबादी बढ़ रही है, बच्चों के लिए कोई प्राइमरी स्कूल नहीं है। नन्हेड़ा और शाहपुर जैसे इलाकों में बच्चों को दूर पढ़ने जाना पड़ता है। पार्कों के लिए चिह्नित स्थान बंजर पड़े हैं और धार्मिक स्थल के लिए दी गई अर्जी पर भी प्रशासन ने संज्ञान नहीं लिया। प्रॉपर्टी डीलरों की मानें तो सेक्टर-32 में रेट 45-50 हजार और सेक्टर-34 में 65 हजार रुपये प्रति गज तक पहुंच गया है। पांच साल पहले यह महज 12 से 35 हजार था। रेट तो चार गुना बढ़ गए, लेकिन सुविधाएं नहीं। लाेगों ने यहां निवेश के हिसाब से प्लॉट तो खरीद लिए मगर सही समय का बिक्री के लिए कर इंतजार कर रहे हैं।
खाली प्लॉटों को लेकर अगर कोई शिकायत करता है तो प्लॉटधारक को नोटिस दिया जाता है। प्लॉट लोग समय पर बना लें इसकी को बाध्यता नहीं है। सेक्टर में विकास कराने को कुछ प्रस्ताव भेजे हैं।
- दर्शन कुमार, कार्यकारी अधिकारी, एचएसवीपी
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संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला। छावनी में रिहायशी क्षेत्र के विकास के लिए हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) ने सेक्टर 32 और 34 बनाए। इन सेक्टरों की हालत गांव से भी बदतर हो चुकी है। हालात यह हैं कि यहां कोई रहना नहीं चाहता है। दोनों सेक्टरों में 1780 प्लॉट हैं, जिसमें 245 प्लॉटधारकों ने ही मकान बनाए हैं। जबकि अन्य प्लॉट खाली पड़े हैं। इनमें झाड़ियां उग रही हैं तो कहीं जलभराव है। सिर्फ इतना ही नहीं बल्कि दोनों सेक्टरों की इंटरलॉकिंग सड़कें भी बारिश में उखड़ गईं तो सुरक्षा के इंतजाम भी कुछ नहीं हैं। एचएसवीपी ने यहां पार्क बनाया है तो वहां नशेड़ियों का डेरा रहता है।
सेक्टर के लोग दो साल से बाढ़ के पानी का दंश झेल रहे हैं। सेक्टर-34 वेलफेयर सोसाइटी के प्रधान प्रदीप शर्मा ने बताया कि जनवरी में एचएसवीपी के पंचकूला स्थित मुख्य प्रशासक से मिले थे जिसमें सेक्टर के हालात साझा किए। उन्होंने मांग की कि सेक्टर-34 में मार्केट कॉम्प्लेक्स की पार्किंग का काम तीन साल पहले पूरा हो चुका है फिर भी दुकानों की नीलामी प्रक्रिया फाइलों में दबी है। सेक्टर में एक भी दुकान नहीं है। लोगों को सामान खरीदने के लिए नन्हेड़ा मार्केट या फिर पांच किलोमीटर दूर स्थित बाजारों में जाना पड़ता है।
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सट्रीट लाइटें टूटीं
पड़ताल में सामने आया कि सेक्टर-32 में 500 प्लॉट हैं जिनमें से केवल 15 घरों में लोग रह रहे हैं। इसी तरह सेक्टर-34 में 1280 प्लॉटों में से मात्र 230 में आबादी बसी है। सुविधाओं के अभाव में लोग मकान नहीं बना रहे, जिससे खाली प्लॉट झाड़ियों के जंगल बन चुके हैं। इंटरलॉकिंग टाइल्स वाली सड़कों के बीच से घास उग रही है, डिवाइडर टूट रहे हैं और खंभों पर लगी स्ट्रीट लाइटें टूटी हुई हैं। सुरक्षा के नाम पर कैमरों की कोई सुविधा नहीं है। जबकि पिछले साल क्षेत्र में सैर करते हुए सेवानिवृत्त कर्मचारी से लूट भी हो चुकी है।
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सफाई कर्मचारी नहीं आते
सेक्टर-34 वेलफेयर सोसाइटी के पदाधिकारियों ने बताया कि सेक्टरों में सफाई की जिम्मेदारी एचएसवीपी की है। तीन साल से यहां एक भी सफाई कर्मचारी नियुक्त नहीं हुआ। वहीं स्वीकृत 5 एमएलडी सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट केवल कागजों में है। जबकि धरातल पर सीवरेज सिस्टम जाम पड़ा है। बरसात के दिनों में यहां के हालात सबसे ज्यादा खराब हो जाते हैं। पिछले दो सालों से टांगरी नदी का पानी सेक्टर-34 में भर रहा है, जिसके कारण खाली प्लाट, सड़कें खराब तक हो जाती है। सोसाइटी के सचिव विजय ने बताया कि शाहपुर गुरुद्वारा से घसीटपुर तक करीब 1.5 किमी का बांध बनाना अनिवार्य है। सिंचाई विभाग और हुडा के बीच तालमेल की कमी के कारण जनता बाढ़ का दंश झेलने को मजबूर है।
सेक्टर में स्कूल की सुविधा नहीं
सेक्टर की आबादी बढ़ रही है, बच्चों के लिए कोई प्राइमरी स्कूल नहीं है। नन्हेड़ा और शाहपुर जैसे इलाकों में बच्चों को दूर पढ़ने जाना पड़ता है। पार्कों के लिए चिह्नित स्थान बंजर पड़े हैं और धार्मिक स्थल के लिए दी गई अर्जी पर भी प्रशासन ने संज्ञान नहीं लिया। प्रॉपर्टी डीलरों की मानें तो सेक्टर-32 में रेट 45-50 हजार और सेक्टर-34 में 65 हजार रुपये प्रति गज तक पहुंच गया है। पांच साल पहले यह महज 12 से 35 हजार था। रेट तो चार गुना बढ़ गए, लेकिन सुविधाएं नहीं। लाेगों ने यहां निवेश के हिसाब से प्लॉट तो खरीद लिए मगर सही समय का बिक्री के लिए कर इंतजार कर रहे हैं।
खाली प्लॉटों को लेकर अगर कोई शिकायत करता है तो प्लॉटधारक को नोटिस दिया जाता है। प्लॉट लोग समय पर बना लें इसकी को बाध्यता नहीं है। सेक्टर में विकास कराने को कुछ प्रस्ताव भेजे हैं।
- दर्शन कुमार, कार्यकारी अधिकारी, एचएसवीपी

अंबाला छावनी के सेक्टर 34 के प्रवेश द्वार की टूटी सड़क के बीच में रखी झाड़ियां। संवाद

अंबाला छावनी के सेक्टर 34 के प्रवेश द्वार की टूटी सड़क के बीच में रखी झाड़ियां। संवाद

अंबाला छावनी के सेक्टर 34 के प्रवेश द्वार की टूटी सड़क के बीच में रखी झाड़ियां। संवाद

अंबाला छावनी के सेक्टर 34 के प्रवेश द्वार की टूटी सड़क के बीच में रखी झाड़ियां। संवाद