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Ambala News: रूमा रानी खुद स्वावलंबी बनीं साथ 250 महिलाओं को दिया रोजगार

Sun, 23 Nov 2025 01:51 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला
संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला Updated Sun, 23 Nov 2025 01:51 AM IST
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Ruma Rani became self-reliant and also provided employment to 250 women.
महिलाओं को समूह के बारे में जानकारी देती रूमा रानी। स्रोत : स्वयं
पानीपत। गोयला खुर्द की रूमा रानी स्वयं सहायता समूह से जुड़कर पहले आत्मनिर्भर बनी है और अब गांव की महिलाओं को भी रोजगार दे रही है। रूमा पांच साल में 23 समूह बनाकर करीब 250 महिलाओं को रोजगार दे चुकी हैं। इससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार होने के साथ स्वयं की भी पहचान बनी है। रूमा को कई बार सम्मानित भी किया जा चुका है। वे एक तरह से महिलाओं के लिए प्रेरणा का काम कर रही है।
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रूमा रानी ने बताया कि वह पांच साल पहले स्वयं सहायता समूह से जुड़ी थी। उस समय गांव में 16 स्वयं सहायता समूह चल रहे थे लेकिन पांच गतिविधियां न होने के कारण टूट गए। उन्होंने अपने मेहनत से स्वयं सहायता समूह बनाना शुरू किए। अब 23 समूह बना दिए हैं। गांव की महिलाओं को जागरूक कर समूह से जोड़ा जा रहा है। प्रत्येक समूह में 10 से 12 सदस्य हैं जो समूह से जुड़ने के बाद स्वयं की पहचान बना रही है। रूमा ने अपने समूह का नाम एकता महिला और नया सवेरा ग्राम संगठन है। इसके माध्यम से महिलाओं को जागरूक कर रही हैं और उन्हें समूह से जोड़ती है। इसके लिए रूमा को 20 जनवरी 2025 को मेड मिलियन प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित भी किया गया है और उसका नाम गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज हो चुका है। इसके साथ वह गांव में जल एवं स्वच्छता से संबंधित जागरूकता अभियान में भी अहम भूमिका निभा रही है। इसमें वह घर-घर जाकर लोगों को जल बचाव व स्वच्छता के लिए जागरूक करती है।
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रूमा ने बताया कि वह भारतीय जीवन बीमा निगम ( एलआईसी ) में दो साल से अपने टारगेट पूरे कर रही है। साल में टारगेट 12 पॉलिसी करने का होता है लेकिन वह दो साल में 60 पाॅलिसी कर चुकी है जिससे उसे 26 जनवरी को भारतीय जीवन बीमा उच्च अधिकारियों और ग्राम पंचायत द्वारा सम्मानित भी किया गया है।
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बापौली में खुलवा चुकी कैंटीन
रूमा के पति ने बताया कि रूमा ने एक साल पहले ही बापौली में किसान कैंटीन खुलवाई है, जिसमें गांव की दो महिलाएं रोजगार पा रही हैं। गांव की निर्मला को अचार बनाने के लिए रूमा ने जागरूक किया, जिससे निर्मला आज अपने हाथों से अचार बनाकर अच्छी आजीविका कमा रही है। रूमा ने महिलाओं को समूह से जोड़ा जिससे बाद में वे महिलाएं मिड-डे मील और आंगनबाड़ी में काम कर रही हैं।
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