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Ambala News: ट्रेनों पर पत्थरबाजी की घटनाओं को रोकने के लिए आरपीएफ ने गठित की विशेष टीम
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अंबाला। ट्रेन नंबर 20978 अजमेर वंदे भारत सहित ट्रेन नंबर 12903 गोल्डन टेंपल मेल और 12057 जनशताब्दी में हुई पत्थरबाजी को देखते हुए आरपीएफ ने संवेदनशील स्थानों पर सादी वर्दी में कर्मचारी तैनात कर दिए हैं। इस वर्ष जनवरी माह से जुलाई तक लगभग सात माह में 20 ट्रेनों पर पत्थरबाजी की घटनाएं हो चुकी हैं। हालांकि सात मामलों में आरपीएफ ने पत्थर मारने वाले सात व्यक्तियों को गिरफ्तार किया है, इसमें कुछ बच्चे भी शामिल हैं, जिन्हें संरक्षण में लेकर बाल सुधार गृह भेजा गया है।
थाना प्रबंधकों को सौंपी जिम्मेदारी
वीआईपी ट्रेन वंदे भारत और शताब्दी की सुरक्षा पर रेलवे ने विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए हैं, इसकी जिम्मेदारी संबंधित थाना प्रबंधक को सौंपी गई है जोकि इन वीआईपी ट्रेनों के संचालन के दौरान खुद भी मौके का औचक निरीक्षण करेंगे ताकि कर्मचारियों की कार्यशैली पर नजर रखी जा सके, इसके अलावा कुछ स्थानीय लोगों को भी मुखबिर बनाया गया है जोकि ट्रेनों में पत्थर मारने वाले शरारती तत्वों पर नजर जमाए हुए हैं।
जल्द बनेगी दीवार
अंबाला-लुधियाना सहित चंडीगढ़ रेल खंड पर रेल लाइनों की सुरक्षा के लिए जल्द ही दीवार बनाने का काम शुरू किया जाएगा ताकि तेजगति ट्रेनों का संचालन सुरक्षित तरीके से हो सके। वहीं कुछ संवेदनशील स्थानों को लोहे की चादर लगाकर कवर किया जाएगा ताकि कोई शरारती तत्व या बच्चा रेलवे लाइन तक न पहुंच पाए।
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बोर्ड बैठक में चर्चा
ट्रेनों के सुरक्षित संचालन और पत्थरबाजी की घटनाओं को लेकर रेलवे बोर्ड की बैठक में भी चिंतन किया जाता है। बैठक में भारतीय रेलवे के सभी मंडल रेल प्रबंधक जुड़ते हैं, उनसे सुरक्षा को लेकर भी विस्तार से चर्चा की जाती है। इस मौके पर विशेषज्ञ भी अपने विचार साझा करते हैं ताकि पत्थरबाजी की घटनाओं को रोकने के लिए तकनीक का इस्तेमाल किया जा सके।
संवदेनशील स्थान
आरपीएफ ने अंबाला रेलवे स्टेशन के पास कुछ जगह को संवेदशील श्रेणी में डाला है। इसमें अंबाला-चंडीगढ़ रेल मार्ग पर सेंट्रल जेल के निकट पुल, धूलकोट रेलवे स्टेशन और हरियाणा व पंजाब सीमा पर बना घग्गर रेलवे पुल शामिल है। पूर्व की घटनाओं में कुछ बच्चों की संलिप्तता भी ट्रेनों में पत्थरबाजी के दौरान मिली थी।
चला रहे अभियान
रेलवे लाइनों के पास बनी बस्तियों और रिहायशी क्षेत्रों में लगातार अभियान चलाकर लोगों को जागरूक किया जा रहा है, इसके अलावा नजदीकी स्कूलों में भी बच्चों को प्रेरित किया जा रहा है कि वो ट्रेनों पर किसी प्रकार की पत्थरबाजी न करें, अगर कोई करता है तो इसकी जानकारी अपने परिजनों के माध्यम से पुलिस को दें।
दंडनीय अपराध
अंबाला छावनी रेलवे स्टेशन की आरपीएफ पोस्ट के प्रभारी रविंद्र सिंह ने बताया कि ट्रेनों पर पत्थरबाजी की घटनाओं में रेलवे एक्ट 154 के तहत कार्रवाई की जाती है। इसमें एक वर्ष तक की जेल, जुर्माना या फिर दोनों हो सकते हैं, इसलिए परिजनों से बार-बार आग्रह किया जाता है कि वो अपने बच्चों पर नजर रखें कि कहीं वो ट्रेनों में पत्थरबाजी की घटनाओं में संलिप्त तो नहीं हैं।
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थाना प्रबंधकों को सौंपी जिम्मेदारी
वीआईपी ट्रेन वंदे भारत और शताब्दी की सुरक्षा पर रेलवे ने विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए हैं, इसकी जिम्मेदारी संबंधित थाना प्रबंधक को सौंपी गई है जोकि इन वीआईपी ट्रेनों के संचालन के दौरान खुद भी मौके का औचक निरीक्षण करेंगे ताकि कर्मचारियों की कार्यशैली पर नजर रखी जा सके, इसके अलावा कुछ स्थानीय लोगों को भी मुखबिर बनाया गया है जोकि ट्रेनों में पत्थर मारने वाले शरारती तत्वों पर नजर जमाए हुए हैं।
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जल्द बनेगी दीवार
अंबाला-लुधियाना सहित चंडीगढ़ रेल खंड पर रेल लाइनों की सुरक्षा के लिए जल्द ही दीवार बनाने का काम शुरू किया जाएगा ताकि तेजगति ट्रेनों का संचालन सुरक्षित तरीके से हो सके। वहीं कुछ संवेदनशील स्थानों को लोहे की चादर लगाकर कवर किया जाएगा ताकि कोई शरारती तत्व या बच्चा रेलवे लाइन तक न पहुंच पाए।
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बोर्ड बैठक में चर्चा
ट्रेनों के सुरक्षित संचालन और पत्थरबाजी की घटनाओं को लेकर रेलवे बोर्ड की बैठक में भी चिंतन किया जाता है। बैठक में भारतीय रेलवे के सभी मंडल रेल प्रबंधक जुड़ते हैं, उनसे सुरक्षा को लेकर भी विस्तार से चर्चा की जाती है। इस मौके पर विशेषज्ञ भी अपने विचार साझा करते हैं ताकि पत्थरबाजी की घटनाओं को रोकने के लिए तकनीक का इस्तेमाल किया जा सके।
संवदेनशील स्थान
आरपीएफ ने अंबाला रेलवे स्टेशन के पास कुछ जगह को संवेदशील श्रेणी में डाला है। इसमें अंबाला-चंडीगढ़ रेल मार्ग पर सेंट्रल जेल के निकट पुल, धूलकोट रेलवे स्टेशन और हरियाणा व पंजाब सीमा पर बना घग्गर रेलवे पुल शामिल है। पूर्व की घटनाओं में कुछ बच्चों की संलिप्तता भी ट्रेनों में पत्थरबाजी के दौरान मिली थी।
चला रहे अभियान
रेलवे लाइनों के पास बनी बस्तियों और रिहायशी क्षेत्रों में लगातार अभियान चलाकर लोगों को जागरूक किया जा रहा है, इसके अलावा नजदीकी स्कूलों में भी बच्चों को प्रेरित किया जा रहा है कि वो ट्रेनों पर किसी प्रकार की पत्थरबाजी न करें, अगर कोई करता है तो इसकी जानकारी अपने परिजनों के माध्यम से पुलिस को दें।
दंडनीय अपराध
अंबाला छावनी रेलवे स्टेशन की आरपीएफ पोस्ट के प्रभारी रविंद्र सिंह ने बताया कि ट्रेनों पर पत्थरबाजी की घटनाओं में रेलवे एक्ट 154 के तहत कार्रवाई की जाती है। इसमें एक वर्ष तक की जेल, जुर्माना या फिर दोनों हो सकते हैं, इसलिए परिजनों से बार-बार आग्रह किया जाता है कि वो अपने बच्चों पर नजर रखें कि कहीं वो ट्रेनों में पत्थरबाजी की घटनाओं में संलिप्त तो नहीं हैं।