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Ambala News: यार्ड में खड़ी होने वाली ट्रेनों का डाटा खंगाल रही आरपीएफ और जीआरपी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 29 Jul 2024 05:22 AM IST
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RPF and GRP are scrutinizing the data of trains parked in the yard
अंबाला कैंट रेलवे स्टेशन के नजदीक यार्ड से गुजरती पार्सल ट्रेन। संवाद
अंबाला। अंबाला का रेल यार्ड चोरों और झपटमारों का सबसे पसंदीदा क्षेत्र बन गया है, क्योंकि धीमी ट्रेन में चढ़कर वारदात को अंजाम देना और फिर चलती ट्रेन से कूदकर भाग जाना, यह अब आरोपियों का विशेष तरीका बन गया है और इसका खामियाजा ट्रेन में सफर करने वाले यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है। इसलिए रेलवे ने ऐसी ट्रेनों का डाटा खंगालना शुरू कर दिया है।
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इसके लिए आरपीएफ और जीआरपी की संयुक्त टीमें भी कार्रवाई में जुट गई हैं, जिससे कि पिछले छह में जिन ट्रेनों में ज्यादातर घटनाएं हुई हैं, उन्हें चिह्नित करके सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध किए जा सकें और आरोपियों को पकड़ा जा सके। इस मामले को लेकर मंडल रेल प्रबंधक मंदीप सिंह भाटिया भी ट्रेनों की समीक्षा में जुट गए हैं और उन्हें संबंधित विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि रेलवे यार्ड में बेवजह किसी ट्रेन को न रोका जाए और उसे सीधा प्लेटफार्म पर खड़ा किया जाए।
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पिछले दिनों हुई पत्रकारवार्ता के दौरान भी इस मामले को लेकर जब उनसे पूछताछ की गई तो उन्होंने बताया कि अंबाला कैंट रेलवे स्टेशन पर दो नई रेलवे लाइनों के निर्माण की प्रस्तावित योजना पर काम किया जा रहा है। अगर यह योजना सिरे चढ़ती है तो फिर कोई भी ट्रेन रेलवे यार्ड के बाहरी क्षेत्र में खड़ी नहीं होगी। इससे ट्रेनों में चोरी व छीना-झपटी का डर भी खत्म हो जाएगा। वहीं आरपीएफ के वरिष्ठ सुरक्षा आयुक्त अरुण त्रिपाठी ने बताया कि कुछ ट्रेनों को चिह्नित किया गया है और इनके रेलवे यार्ड में आवागमन के दौरान कर्मचारियों की तैनाती भी की गई है ताकि कोई घटना न हो पाए और आरोपियों की भी धरपकड़ की जा सके।
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रोजाना दर्ज हो रहे मामले
शायद ही कोई ऐसा दिन हो जब अंबाला कैंट के जीआरपी थाने में चोरी की एफआईआर न दर्ज हो। हालांकि इसमें अधिकांश ऐसे मामले होते हैं जोकि दूसरे राज्यों की जीआरपी द्वारा भेजे जाते हैं और इन मामलों में जब जांच-पड़ताल की जाती है तो घटनास्थल अंबाला कैंट रेलवे स्टेशन से काफी दूर होता है,बावजूद इसके जीआरपी को मामला दर्ज करना पड़ता है।

वर्जन
जीआरपी थाने में अधिकांश दूसरे राज्यों से जीरो एफआईआर आती है। यात्रियों की परेशानी को देखते हुए इस पर मुकदमा दर्ज करना पड़ता है। ऐसे मामलों को लेकर जीआरपी दूसरे राज्यों में जाकर जांच-पड़ताल भी करती है और कई बार आरोपी भी पकड़े जाते हैं। गलत जानकारी के कारण कुछ मामलों की जांच लंबी खिंच जाती है।
धर्मवीर सिंह, प्रभारी जीआरपी अंबाला।
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