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Ambala News: नियमों में उलझे राइस मिलर, सौंपा ज्ञापन
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मुलाना। नए नियमों के पेच में उलझी मुलाना राइस मिल एसोसिएशन ने डीसी के नाम एसडीएम को ज्ञापन सौंपा। मुलाना राइस मिलर्स के अनुसार वह सीएमआर की डिलीवरी नहीं दे पाएंगे। राइस मिलर्स ने एफआरके पर जीएसटी का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि कई बार अपील करने के बाद भी इसे ठीक नहीं किया है। एफआरके पर 18 फीसद जीएसटी लगता है जबकि सरकार उन्हें पांच फीसद जीएसटी देती है। राइस मिलर्स ने मांग की कि सरकार उन्हें एफआरके लेकर दे।
ज्ञापन में राइस मिलर्स ने विंग्स एप को ठीक करने की मांग की। उन्होंने कहा कि कई साथियों की लिंकेज उनके लोकल स्टेशन के हिसाब से नहीं हो रही। इसे वैसा ही किया जाए जैसा पहले होता था। चावल की गाड़ियों में जीपीएस सिस्टम व्यावहारिक नहीं है। राइस मिलर किराए पर गाड़ी लेते हैं। ऐसे में यह नियम वापस लिया जाए।
यह है पूरा मामला
प्रदेश सरकार ने हरियाणा की मंडियों से एमएसपी पर 58 लाख 95 हजार 973 एमटीपीआर धान खरीदकर प्रदेश के राइस मिलर्स को सौंप रखा है। उन्हें कुटाई के बाद धान का 67 प्रतिशत चावल एफसीआई में जमा कराना है, जोकि 39 लाख 50 हजार 302 एमटी बनता है। मार्केट रेट के हिसाब से इसकी कीमत खरबों में है। राइस मिलर्स को सरकारी चावल में एफआरके मिक्स करके देना है। एफआरके की सप्लाई में देरी से पूरे प्रदेश में बहुत कम गाड़ियां लग पा रही है। अब एफआरके की सप्लाई आई तो जीएसटी और सैंपल की जिम्मेदारी सहित अन्य मांगों को लेकर राइस मिलर्स परेशान है।
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ज्ञापन में राइस मिलर्स ने विंग्स एप को ठीक करने की मांग की। उन्होंने कहा कि कई साथियों की लिंकेज उनके लोकल स्टेशन के हिसाब से नहीं हो रही। इसे वैसा ही किया जाए जैसा पहले होता था। चावल की गाड़ियों में जीपीएस सिस्टम व्यावहारिक नहीं है। राइस मिलर किराए पर गाड़ी लेते हैं। ऐसे में यह नियम वापस लिया जाए।
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यह है पूरा मामला
प्रदेश सरकार ने हरियाणा की मंडियों से एमएसपी पर 58 लाख 95 हजार 973 एमटीपीआर धान खरीदकर प्रदेश के राइस मिलर्स को सौंप रखा है। उन्हें कुटाई के बाद धान का 67 प्रतिशत चावल एफसीआई में जमा कराना है, जोकि 39 लाख 50 हजार 302 एमटी बनता है। मार्केट रेट के हिसाब से इसकी कीमत खरबों में है। राइस मिलर्स को सरकारी चावल में एफआरके मिक्स करके देना है। एफआरके की सप्लाई में देरी से पूरे प्रदेश में बहुत कम गाड़ियां लग पा रही है। अब एफआरके की सप्लाई आई तो जीएसटी और सैंपल की जिम्मेदारी सहित अन्य मांगों को लेकर राइस मिलर्स परेशान है।
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