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Ambala News: प्राकृतिक खेती से सेवानिवृत्त प्राध्यापक दिखा रहे उन्नति की राह
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किसान लालचंद से जानकारी लेते उपायुक्त व अन्य अधिकारी। सूचना विभाग
अंबाला। शिक्षा विभाग से लेक्चरार के पद से सेवानिवृत्त होने के बाद गांव चुडि़याली निवासी लालचंद भारद्वाज प्राकृतिक खेती करते हैं। इस प्रचार से खेती कर वह लोगों के स्वास्थ्य का तो ख्याल रख रहे हैं, साथ ही उन्हें प्राकृतिक खेती करनी भी सिखा रहे हैं।
लालचंद के काम की चर्चा डीसी ऑफिस तक पहुंची तो साेमवार को डीसी पार्थ गुप्ता भी कृषि विभाग के अधिकारियों के साथ उनके खेतों पर पहुंच गए। इस दौरान किसान लालचंद भारद्वाज ने बताया कि शिक्षा विभाग से सेवानिवृत होने के बाद वह यहां पर अपने खेत में लगभग दो एकड़ क्षेत्र में गन्ने और गेहूं की खेती का कार्य प्राकृतिक खेती के माध्यम से कर रहा हैं। यहां पर देसी गाय के गोबर व गोमूत्र से जीव अमृत बनाकर वह खाद व कीटनाशक के रूप में प्रयोग करते हैं।
खेती के दौरान किसी भी तरफ के यूरिया और केमिकल का प्रयोग नहीं किया जाता, यदि खाद की आवश्यकता होती है तो वह गोबर से तैयार की गई खाद का प्रयोग करते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि जहां वह गेहूं की खेती करते वहीं गन्ने की खेती के साथ-साथ मोटे अनाज की भी खेती करते हैं। गन्ने की खेती के उपरांत बिना मसाले का गुड़ भी तैयार करवाते हैं, ऐसा करने से उनकी आमदनी में भी बढ़ोत्तरी हुई हैं।
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किसान लालचंद ने बताया कि उनके खेत में जो गेहूं की पैदावार होती है उसकी डिमांड काफी रहती हैं। करीब 5500 रूपए प्रति किवंटल के भाव से उनकी गेहूं बिकती हैं जोकि प्राकृतिक खेती की उपज से पैदा की जाती हैं। परिवार के साथ-साथ अन्य जो उनके नजदीकी हैं वह एडवांस में ही गेहूं खरीदने के लिए उन्हें भुगतान भी कर देते हैं। लालचंद भारद्वाज ने यह भी बताया कि मोटे अनाज की खेती भी वह करते हैं और अंबाला छावनी में मोटे अनाज से से संबंधित उनका एक आउटलेट भी है। यहां से तैयार होने वाले मिलेटस देशभर में भेजा जाता है।
जिला में इस वर्ष 3500 एकड़ प्राकृतिक खेती का लक्ष्य
कृषि विभाग के उपनिदेशक डॉ. जसविंद्र सिंह ने बताया कि उपायुक्त के मार्गदर्शन में इस वर्ष जिला में 3500 एकड़ में प्राकृतिक खेती करने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने बताया कि देसी गाय को खरीदने पर 25 हजार रुपये प्रति गाय और चार हजार रुपये डेमोंस्ट्रेशन प्लांट लगाने के लिए विभाग द्वारा किसान को अनुदान राशि प्रदान की जाती हैं। उन्होंने भी कहा कि लालचंद भारद्वाज प्रगतिशील किसान के रूप में अन्य किसानों को जागरूक करने का जो कार्य कर रहे हैं यह काफी सराहनीय हैं।
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लालचंद के काम की चर्चा डीसी ऑफिस तक पहुंची तो साेमवार को डीसी पार्थ गुप्ता भी कृषि विभाग के अधिकारियों के साथ उनके खेतों पर पहुंच गए। इस दौरान किसान लालचंद भारद्वाज ने बताया कि शिक्षा विभाग से सेवानिवृत होने के बाद वह यहां पर अपने खेत में लगभग दो एकड़ क्षेत्र में गन्ने और गेहूं की खेती का कार्य प्राकृतिक खेती के माध्यम से कर रहा हैं। यहां पर देसी गाय के गोबर व गोमूत्र से जीव अमृत बनाकर वह खाद व कीटनाशक के रूप में प्रयोग करते हैं।
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खेती के दौरान किसी भी तरफ के यूरिया और केमिकल का प्रयोग नहीं किया जाता, यदि खाद की आवश्यकता होती है तो वह गोबर से तैयार की गई खाद का प्रयोग करते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि जहां वह गेहूं की खेती करते वहीं गन्ने की खेती के साथ-साथ मोटे अनाज की भी खेती करते हैं। गन्ने की खेती के उपरांत बिना मसाले का गुड़ भी तैयार करवाते हैं, ऐसा करने से उनकी आमदनी में भी बढ़ोत्तरी हुई हैं।
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किसान लालचंद ने बताया कि उनके खेत में जो गेहूं की पैदावार होती है उसकी डिमांड काफी रहती हैं। करीब 5500 रूपए प्रति किवंटल के भाव से उनकी गेहूं बिकती हैं जोकि प्राकृतिक खेती की उपज से पैदा की जाती हैं। परिवार के साथ-साथ अन्य जो उनके नजदीकी हैं वह एडवांस में ही गेहूं खरीदने के लिए उन्हें भुगतान भी कर देते हैं। लालचंद भारद्वाज ने यह भी बताया कि मोटे अनाज की खेती भी वह करते हैं और अंबाला छावनी में मोटे अनाज से से संबंधित उनका एक आउटलेट भी है। यहां से तैयार होने वाले मिलेटस देशभर में भेजा जाता है।
जिला में इस वर्ष 3500 एकड़ प्राकृतिक खेती का लक्ष्य
कृषि विभाग के उपनिदेशक डॉ. जसविंद्र सिंह ने बताया कि उपायुक्त के मार्गदर्शन में इस वर्ष जिला में 3500 एकड़ में प्राकृतिक खेती करने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने बताया कि देसी गाय को खरीदने पर 25 हजार रुपये प्रति गाय और चार हजार रुपये डेमोंस्ट्रेशन प्लांट लगाने के लिए विभाग द्वारा किसान को अनुदान राशि प्रदान की जाती हैं। उन्होंने भी कहा कि लालचंद भारद्वाज प्रगतिशील किसान के रूप में अन्य किसानों को जागरूक करने का जो कार्य कर रहे हैं यह काफी सराहनीय हैं।