अंबाला सिटी। गांव बलाना के दर्जनों किसानों की धान की फसल जलमग्न हो गई। किसानों की जमीन पंजाब बॉर्डर के गांव नारायणगढ़ झुग्गियों में पड़ती है। इस क्षेत्र में सैकड़ों एकड़ धान की फसल है। किसान दलबीर सिंह, अजैब सिंह, गोपाल कृष्ण, राम गोपाल, बाल कृष्ण, रामपाल, करनैल सिंह, हरनेक सिंह, नैब सिंह, जय सिंह, कुलवंत सिंह, हरबंस सिंह, सुरेश कुमार, तेजिंदर सिंह, रघुवीर सिंह, हॉकम सिंह आदि ने बताया कि बारिश का पानी उनके खेतों से दस दिन से पहले नहीं उतरेगा। यदि इस दौरान और बारिश आ जाती है तो किसानों को दोबारा धान की रोपाई का काम करवाना पड़ेगा। पानी की उचित निकासी न होने के कारण उनकी सारी धान की फसल समाप्त हो गई है।
उन्होंने बताया कि धान की रोपाई के लिए प्रति एकड़ उन्होंने 3 हजार रुपये पहले लेबर को दिए। इस बाढ़ के कारण जिन खेतों से धान की फसल खराब हो गई, उसकी जगह दोबारा से धान की रोपाई करने के लिए 3 हजार रुपये ओर देने होंगे। इसके अलावा धान की पैदावार अगेती फसल में ज्यादा होती है। धान की रोपाई पछेती होने के कारण उसकी पैदावार पर भी असर पड़ेगा। किसानों का कहना है कि नए बाईपास मार्ग के कारण फसलों में पानी घुस गया है। इसकी निकासी न होने के कारण किसानों की फसल बुरी तरह से प्रभावित हो रही है। प्रशासनिक अधिकारियों ने भी इस एरिया की सुध लेनी अच्छी नहीं समझी। किसानों के खेतों के पानी निकासी के लिए केवल पाइप दबवाए हुए हैं, लेकिन यहां पर पानी कई किलोमीटर दूर तक का आता है। लेकिन, पानी पाइप लाइनों के जरिये नहीं निकल पाता, जिस कारण जलभराव होता है। किसानों का कहना है जो खाई खोदी गई है उसमें भी कई जगह अवरोध हैं। उसकी भी सफाई होनी अनिवार्य है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि डूबी हुई फसल का सर्वे करवाया जाए। ताकि प्रभावित किसानों को मुआवजा मिल सके।