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गांव नग्गल, खैरा, नडियाली समेत अन्य गांवों में डूबी धान की फसल

Thu, 18 Jul 2019 01:03 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Thu, 18 Jul 2019 01:03 AM IST
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rain in amabal
अंबाला सिटी। किसान जिस बेसब्री से मानसून की पहली बारिश का इंतजार कर रहे थे। उसी पहली बारिश के कारण किसानों के चेहरों पर चिंता की लकीरें नजर आ रही हैं। तीन दिन पहले हुई मूसलाधार वर्षा के बाद आखिर वही हुआ जिसका किसानों को डर था। भारी बारिश के बाद नग्गल क्षेत्र के दर्जनों गांवों की फसल पूरी तरह जलमग्र हो गई। ज्यादातर किसानों के खेतों में पांच फीट पानी जमा हो गया, जिसने जीरी व हरे चारे की फसल को अपनी आगोश में ले लिया है।
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अंबाला शहर के गांव नग्गल, खैरा, नडियाली, जंघेहड़ी, अमीपुर, चौडमस्तपुर, ईस्माईलपुर, बिडंगा सहित दर्जनों गांवों के किसानों की फसलें बर्बाद होने की कगार पर हैं। इन गांवों में से सर्वाधिक नुकसान नग्गल के किसानों का हुआ है। क्योंकि यहां पर पंजाब के पानी व कैंट से आने वाले गुड़गुड़िया नाले के पानी की दोहरी मार पड़ती है। परिणामस्वरूप यहां जलभराव भी काफी अधिक हो जाता है। वर्तमान स्थित यह है कि नग्गल व खैरा के किसानों की धान की फसल पिछले तीन दिन से पानी में डूबी हुई है, लेकिन पानी की निकासी के लिए प्रशासन ने अभी तक किसी प्रकार का कोई कार्य नहीं किया। नग्गल के किसान रणजीत सिंह, बलबीर सिंह, हरनेक सिंह, लाभ सिंह, बलवंत सिंह, करनैल सिंह, निर्मल सिंह, महाबीर सिंह व हरबीर सिंह ने बताया कि उन्हें अभी तक पिछले नुकसान की मुआवजा राशि नहीं मिल पाई। इस बारिश से और ऊपर से कुदरत की मार ने एक बार फिर उनकी कमर तोड़ दी है। खैरा के किसान गुरमीत सिंह, हरबिंद्र सिंह व कुलवंत सिंह ने बताया है कि उन्होंने अपनी धान की रोपाई का काम पूरा करने के बाद उसमें खाद व दवाई भी डाल दी थी। अब तक उनका फसल पर तकरीबन पांच हजार रुपये प्रति एकड़ की दर से खर्च भी हो चुका था, लेकिन बारिश के एक ही झटके में धान की सब फसल साफ हो गई।
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किसानों को खेत खाली न रह जाने की सताने लगी चिंता
कुदरत की मार झेल रहे नग्गल व खैरा के किसानों को अब इस बात की चिंता सता रही है कि अबकी बार कहीं उनके खेत धान रोपाई से खाली न रह जाऐं, क्योंकि धान रोपाई के लिए बिहार से आई लेबर अपना काम निपटाकर वापिस चली गई है। उक्त किसानों ने बताया कि अब उनके पास धान की रोपाई करने के लिए नर्सरी (धान की पौध) भी उपलब्ध नहीं है। दूसरा धान की रोपाई का समय में निकलता जा रहा है।
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