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Ambala News: निजी अस्पताल नहीं कर सकेंगे आयुष्मान में मोतियाबिंद और बच्चेदानी का उपचार

Thu, 05 Jun 2025 01:35 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Thu, 05 Jun 2025 01:35 AM IST
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Private hospitals will not be able to treat cataract and uterus under Ayushman
सुखबीर सिंह
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अंबाला सिटी। आयुष्मान और चिरायु योजना के तहत उपचार लेने वाले मरीजों की परेशानी बढ़ने वाली है। सरकार के निर्देशों पर अब आयुष्मान योजना के तहत होने वाले मोतियाबिंद और बच्चेदानी के ऑपरेशन अब निजी अस्पतालों में नहीं हो पाएगा।
स्वास्थ्य विभाग इस बाबत निर्देश जारी किए हैं। इसे मंगलवार से लागू कर दिया। निजी अस्पतालों में इन बीमारियों के उपचार को बंद करने के पीछे स्वास्थ्य विभाग का तर्क है कि इस फैसले से वह सरकारी अस्पतालों में उपचार को बढ़ावा देंगे।
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निजी में एक हजार से अधिक हो रहे ऑपरेशन
पिछले कुछ समय से देखने में आ रहा था कि मोतियाबिंद के ऑपरेशन सरकारी की तुलना में निजी अस्पतालों में अधिक हो रहे थे। इस कारण सरकार को एक बड़ी धनराशि निजी अस्पतालों को चुकानी पड़ रही थी। अंबाला की बात करें तो एक महीने में मोतियाबिंद के एक हजार से अधिक ऑपरेशन सिर्फ निजी अस्पताल में हाे रहे थे, जबकि सरकारी अस्पताल में ये संख्या 100 थी। इस फैसले के बाद बुजुर्गों की परेशानी बढ़ने वाली है। अंबाला जिले में ही पांच लाख से अधिक लोग आयुष्मान योजना के तहत उपचार ले रहे हैं। ऐसे में बुजुर्ग मरीजों को सबसे अधिक परेशानी होगी। सबसे ज्यादा मोतियाबिंद का उपचार निजी अस्पतालों में बुजुर्ग ही करवाते हैं।
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7500 रुपये का मिलता है भुगतान
अंबाला में करीब 45 अस्पताल आयुष्मान के पैनल पर पंजीकृत हैं। एक मोतियाबिंद के ऑपरेशन के लिए सरकार की ओर से निजी अस्पताल को 7500 रुपये का भुगतान किया जाता है। मरीज अपने स्तर पर ऑपरेशन कराना चाहे तो उसे 15 से 20 हजार रुपये खर्च करने पड़ सकते हैं। इसके साथ ही लेंस लगवाने का खर्च अलग है।
बुजुर्ग मरीजों पर पड़ेगा बोझ
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के जिला प्रधान डॉ. सतपाल बहल ने कहा कि यह सरकार का फैसला है। इसमें वे कुछ भी नहीं कर सकते हैं। हाल ही में आईएमए का भुगतान पूरा कर दिया गया है। इसके बाद ही ये निर्देश पारित हुए हैं। आईएमए अंबाला के सदस्य डॉ. रजत माथुर ने बताया कि सरकार के इस फैसले से 60 वर्ष से लेकर 90 वर्ष तक के मरीजों पर सीधा असर पड़ेगा। प्रति माह उनके अस्पताल में 100 से अधिक ऑपरेशन मोतियाबिंद के होते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को आयुष्मान योजना को ही जारी रखना चाहिए।
नागरिक अस्पतालों पर बढ़ेगा दबाव
पेंशनर्स वेलफेयर एसोसिएशन के प्रधान बलराज आनंद ने कहा कि यह फैसला बुजुर्गों के हित में नहीं है। इसके लिए वे अगली बैठक में मुद्दा भी बनाएंगे। नागरिक अस्पतालों में एक साथ इतने मरीज आने से बुजुर्गों को अपना ऑपरेशन करवाने के लिए घंटों लाइनों में खड़ा होना पड़ेगा। इससे परेशानी बढ़ेगी घटेगी नहीं।

वर्जन
हमें जो आदेश मिले हैं उन्हीं के आधार पर कार्यवाही की जा रही है। फिलहाल योजना के दो पैकेज के उपचार पर रोक लगा दी गई है। सरकार का तर्क है कि सरकारी अस्पतालों में उपचार की दर बढ़ाने के लिए यह कदम उठाया गया है।
-डॉ. सुखप्रीत सिंह, नोडल अधिकारी, आयुष्मान भारत योजना अंबाला।
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