{"_id":"65d669550a750e202a0400d6","slug":"police-moved-forward-learning-from-farmers-set-up-poklane-on-the-border-ambala-news-c-36-1-sknl1017-118713-2024-02-22","type":"story","status":"publish","title_hn":"Ambala News: किसानों से सीख आगे बढ़ी पुलिस, बॉर्डर पर खड़ी की पोकलेन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Ambala News: किसानों से सीख आगे बढ़ी पुलिस, बॉर्डर पर खड़ी की पोकलेन
विज्ञापन
शंभू बॉर्डर पर दिनभर टकराव के बाद शाम के समय बिखरे पड़े किसान के जूते: अंशु शर्मा
अंशु शर्मा
अंबाला। किसानों के दिल्ली कूच का एलान दिनभर टकराव के बावजूद भले ही सिरे न चढ़ा हो, लेकिन किसानों की तैयारी से पुलिस ने सबक जरूर लिया। पुलिस को जैसे ही किसानों के पोकलेन और जेसीबी से लैस होकर आने की सूचना मिली तो उन्होंने भी बॉर्डर पर किसानों के सामने पोकलेन और जेसीबी खड़ी कर दी।
पुलिस के प्रहारों का तोड़ और खुद के बचाव के लिए किसानों के जुगाड़ देख हर कोई हैरान था। लोहे की चादर लेकर तो कोई तस्ले पर कुंडा लगाकर उसे अपनी ढाल बनाकर चलता नजर आया, जिससे कि रबड़ की गोलियों और आंसू गैस के गोलों का कुछ असर न पड़ सके। इसी तरह से कुछ किसान अपनी ट्रॉली का हिस्सा शॉकर से ऊपर उठाकर अपना बचाव करते हुए नजर आए।
पुलिस के फेंके आंसू गैस के गोलों के धमाके का जवाब देने और ड्रोन को हमले के लिए मल्टी शॉट पटाखे इस्तेमाल करते दिखे। बुधवार सुबह तो किसान दिल्ली कूच की तैयारियों के चलते मिट्टी के सेकड़ों कट्टों को बॉर्डर पर जमा करने के साथ-साथ अन्य तैयारी करते दिखे और कोई टकराव नहीं था।
विज्ञापन
ठीक 11 बजते ही जैसे ही युवाओं ने बॉर्डर के करीब आने का प्रयास किया तो पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे। हालांकि पुलिस का कहना था कि उन पर पथराव हुआ था तो उसका जवाब था। उसके बाद ड्रोन से भी हमले कर भीड़ को खदेड़ना शुरू कर दिया था। दूसरी बार में जैसे ही किसानों ने पंतगों का जाल बिछाया तो पुलिस ड्रोन को गुपचुप तरीके से पेड़ों की आड़ में लाकर हमले करने लगी। कुछ हमलों के बाद पुलिस ने ड्रोन पतंगों के बीच से निकालते हुए पंजाब की सीमा में एक के बाद एक गोले दागे ताकि किसानों की भीड़ को खदेड़ा जा सके।
बॉर्डर पर अचानक छिड़ीं मधुमक्खियां
लगातार पुलिस की तरफ से दागे जा रहे आंसू गैस के गोलों के बीच अचानक से मधुमक्खियों का झुंड आ गया। ट्रालियों और गाड़ियों की छतों पर चढ़े लोगों में भी हलचल मच गई और खुद का बचाव करते हुए नीचे झुकते और लेटते नजर आए। देखते ही देखते यह मधुमक्खियां चली गईं। हालांकि इस दौरान मधुमक्खियों से बचाव हो गया।
मेडिकल कैंप और मंच के साथ गिरे गोले
पुलिस का ड्रोन भीड़ को खदेड़ता पंजाब की सीमा तक चला गया और यह देखकर सभी दंग रह गए। इस बीच एक गोला यूनियन नेताओं की ओर से लगाए मंच के ठीक साथ गिरा और उस समय भाषण दिया जा रहा था। साथ ही सेकड़ों की संख्या में किसान मौजूद थे। इतना ही नहीं एक गोला तो मेडिकल कैंप के ठीक साथ गिरा और वहां पर जख्मी किसान उपचार के लिए आ रहे थे। देखते ही देखते वहां पर हलचल मच गई। बता दें कि पंजाब की सीमा में ड्रोन की एंट्री न होने पर किसानों ने अपनी ट्रालियां व मंच को आगे बॉर्डर की तरफ कर लिया था।
माइक से भाषण पर खींचातान
टकराव के बीच यूनियन नेता युवाओं को शांति रखने का संदेश दे रहे थे, इसी बीच युवाओं का एक ग्रुप व उनके समर्थक भी मंच पर आए गए। इस बीच उन्हें माइक भी दिया गया लेकिन उनकी तरफ से तैयारियां पूरी होने पर दिल्ली कूच करने की बात कहीं जा रही थी। इस भाषण से हालात बिगड़ने लगे तो यूनियन सदस्यों ने मोर्चा संभाला। इस बीच युवाओं को यूनियन नेता शांति बनाए रखने की बात कर रहे थे। यहीं कारण था कि करीब 20 मिनट तक मंच के स्पीकर बंद रहे। बाद में किसान नेता सरवन सिंह पंडेर ने मंच संभाला।
दिल्ली कूच की कॉल पर उमड़ा था सैलाब
13 फरवरी से शंभू बॉर्डर पर चल रहे आंदोलन में बुधवार को अभी तक के सबसे ज्यादा किसान पहुंचे। इनमें युवा किसान बेहद सक्रिय देखे। दिल्ली कूच को लेकर उत्साहित युवाओं व पुलिस के बीच जमकर टकराव हुआ। स्थिति यह थी कि युवा किसान बॉर्डर के दोनों पूल पर बने नाकों के अलावा नदियों के रास्तों पर भी खड़े थे। हालांकि पुलिस का दावा है कि युवा किसानों की तरफ से पत्थरबाजी करने पर उनकी तरफ से आंसू गैस के गोले दागे गए। आखिर में युवा दिल्ली कूच का फैसला टलने पर निराश होकर लौटे।
विज्ञापन
अंबाला। किसानों के दिल्ली कूच का एलान दिनभर टकराव के बावजूद भले ही सिरे न चढ़ा हो, लेकिन किसानों की तैयारी से पुलिस ने सबक जरूर लिया। पुलिस को जैसे ही किसानों के पोकलेन और जेसीबी से लैस होकर आने की सूचना मिली तो उन्होंने भी बॉर्डर पर किसानों के सामने पोकलेन और जेसीबी खड़ी कर दी।
पुलिस के प्रहारों का तोड़ और खुद के बचाव के लिए किसानों के जुगाड़ देख हर कोई हैरान था। लोहे की चादर लेकर तो कोई तस्ले पर कुंडा लगाकर उसे अपनी ढाल बनाकर चलता नजर आया, जिससे कि रबड़ की गोलियों और आंसू गैस के गोलों का कुछ असर न पड़ सके। इसी तरह से कुछ किसान अपनी ट्रॉली का हिस्सा शॉकर से ऊपर उठाकर अपना बचाव करते हुए नजर आए।
विज्ञापन
पुलिस के फेंके आंसू गैस के गोलों के धमाके का जवाब देने और ड्रोन को हमले के लिए मल्टी शॉट पटाखे इस्तेमाल करते दिखे। बुधवार सुबह तो किसान दिल्ली कूच की तैयारियों के चलते मिट्टी के सेकड़ों कट्टों को बॉर्डर पर जमा करने के साथ-साथ अन्य तैयारी करते दिखे और कोई टकराव नहीं था।
विज्ञापन
ठीक 11 बजते ही जैसे ही युवाओं ने बॉर्डर के करीब आने का प्रयास किया तो पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे। हालांकि पुलिस का कहना था कि उन पर पथराव हुआ था तो उसका जवाब था। उसके बाद ड्रोन से भी हमले कर भीड़ को खदेड़ना शुरू कर दिया था। दूसरी बार में जैसे ही किसानों ने पंतगों का जाल बिछाया तो पुलिस ड्रोन को गुपचुप तरीके से पेड़ों की आड़ में लाकर हमले करने लगी। कुछ हमलों के बाद पुलिस ने ड्रोन पतंगों के बीच से निकालते हुए पंजाब की सीमा में एक के बाद एक गोले दागे ताकि किसानों की भीड़ को खदेड़ा जा सके।
बॉर्डर पर अचानक छिड़ीं मधुमक्खियां
लगातार पुलिस की तरफ से दागे जा रहे आंसू गैस के गोलों के बीच अचानक से मधुमक्खियों का झुंड आ गया। ट्रालियों और गाड़ियों की छतों पर चढ़े लोगों में भी हलचल मच गई और खुद का बचाव करते हुए नीचे झुकते और लेटते नजर आए। देखते ही देखते यह मधुमक्खियां चली गईं। हालांकि इस दौरान मधुमक्खियों से बचाव हो गया।
मेडिकल कैंप और मंच के साथ गिरे गोले
पुलिस का ड्रोन भीड़ को खदेड़ता पंजाब की सीमा तक चला गया और यह देखकर सभी दंग रह गए। इस बीच एक गोला यूनियन नेताओं की ओर से लगाए मंच के ठीक साथ गिरा और उस समय भाषण दिया जा रहा था। साथ ही सेकड़ों की संख्या में किसान मौजूद थे। इतना ही नहीं एक गोला तो मेडिकल कैंप के ठीक साथ गिरा और वहां पर जख्मी किसान उपचार के लिए आ रहे थे। देखते ही देखते वहां पर हलचल मच गई। बता दें कि पंजाब की सीमा में ड्रोन की एंट्री न होने पर किसानों ने अपनी ट्रालियां व मंच को आगे बॉर्डर की तरफ कर लिया था।
माइक से भाषण पर खींचातान
टकराव के बीच यूनियन नेता युवाओं को शांति रखने का संदेश दे रहे थे, इसी बीच युवाओं का एक ग्रुप व उनके समर्थक भी मंच पर आए गए। इस बीच उन्हें माइक भी दिया गया लेकिन उनकी तरफ से तैयारियां पूरी होने पर दिल्ली कूच करने की बात कहीं जा रही थी। इस भाषण से हालात बिगड़ने लगे तो यूनियन सदस्यों ने मोर्चा संभाला। इस बीच युवाओं को यूनियन नेता शांति बनाए रखने की बात कर रहे थे। यहीं कारण था कि करीब 20 मिनट तक मंच के स्पीकर बंद रहे। बाद में किसान नेता सरवन सिंह पंडेर ने मंच संभाला।
दिल्ली कूच की कॉल पर उमड़ा था सैलाब
13 फरवरी से शंभू बॉर्डर पर चल रहे आंदोलन में बुधवार को अभी तक के सबसे ज्यादा किसान पहुंचे। इनमें युवा किसान बेहद सक्रिय देखे। दिल्ली कूच को लेकर उत्साहित युवाओं व पुलिस के बीच जमकर टकराव हुआ। स्थिति यह थी कि युवा किसान बॉर्डर के दोनों पूल पर बने नाकों के अलावा नदियों के रास्तों पर भी खड़े थे। हालांकि पुलिस का दावा है कि युवा किसानों की तरफ से पत्थरबाजी करने पर उनकी तरफ से आंसू गैस के गोले दागे गए। आखिर में युवा दिल्ली कूच का फैसला टलने पर निराश होकर लौटे।

शंभू बॉर्डर पर दिनभर टकराव के बाद शाम के समय बिखरे पड़े किसान के जूते: अंशु शर्मा

शंभू बॉर्डर पर दिनभर टकराव के बाद शाम के समय बिखरे पड़े किसान के जूते: अंशु शर्मा

शंभू बॉर्डर पर दिनभर टकराव के बाद शाम के समय बिखरे पड़े किसान के जूते: अंशु शर्मा

शंभू बॉर्डर पर दिनभर टकराव के बाद शाम के समय बिखरे पड़े किसान के जूते: अंशु शर्मा