{"_id":"6691dc7aeb9b5d9a55019f99","slug":"play-way-schools-running-in-the-streets-will-be-investigated-ambala-news-c-36-1-ame1006-126073-2024-07-13","type":"story","status":"publish","title_hn":"Ambala News: गली मोहल्लों में चलने वाले प्ले वे स्कूलों की होगी जांच","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Ambala News: गली मोहल्लों में चलने वाले प्ले वे स्कूलों की होगी जांच
विज्ञापन
अंबाला सिटी। जिला अंबाला में चल रहे प्ले वे स्कूलों में बाल संरक्षण इकाई की ओर से औचक निरीक्षण किए जा रहे हैं और अनियमितताएं बरतने वाले स्कूल संचालकों के खिलाफ उचित कार्रवाई भी कि जाएगी। इसके साथ ही बिना पंजीकरण के गली मोहल्लों में चलने वाले प्ले वे स्कूलों में भी जांच होगी। ये जानकारी जिला बाल संरक्षण अधिकारी ममता ने दी।
उन्होंने बताया कि अभी तक विभाग के पास 42 प्लेवे स्कूलों के आवेदन आए हैं। जिनमें से 20 को मंजूरी दे दी गई है। इसके साथ ही मंजूरी प्राप्त स्कूलों में विभाग की ओर से व्यवस्थाओं की जांच की जा रही है। अभी तक 12 स्कूलों में जांच हो चुकी है। वहीं चार स्कूलाें को एनसीपीसीआर के तहत गाइडलाइन पूरी करने के रिमाइंडर लेटर भेजे गए हैं। जिनमें से एक स्कूल ने स्कूल बंद करने की अर्जी सौंप दी है। औचक निरीक्षण के दौरान टीमों की ओर से बच्चों को दी जाने वाली सुविधाओं जांच की जाती है।
इन स्कूलों को मिली मंजूरी
खरगा आर्मी प्री प्राइमरी प्लेवे स्कूल , सन फ्लावर प्री प्राइमरी स्कूल, रेड रोज प्ले स्कूल, ब्लू हेवन नर्सरी स्कूल, किड वाटिका जड़ौत, बिजी बी प्ले स्कूल, गुरुकुल किंडरगार्टन, स्प्राउट मोंटेसरी प्री प्राइवेट प्ले स्कूल, वेदांता टूडलर्स प्ले वे, ओलिव ग्रीन प्ले वे, मरकरी आर्मी प्री प्राइमरी प्ले स्कूल, सीसल कान्वेंट जूनियर प्ले वे स्कूल, लिटल मिलेनियम प्ले वे स्कूल, मदर प्राइड प्ले वे, आईवरी आर्मी प्री प्राइमरी स्कूल, केपीवीपी किंडरगार्टन प्ले स्कूल को मंजूरी मिली है।
विज्ञापन
-- -- -- -- -- -
इन गाइडलाइन को करना होगा पूरा
स्कूल में 20 बच्चों के लिए एक अध्यापक और एक सहायक होना चाहिए। स्कूल भवन में बच्चों के प्रर्याप्त सुविधाएं जैसे महिला व पुरुष शौचालय, पीने के लिए साफ पानी, खेलने का स्थान, सीसीटीवी कैमरा, अग्निशमन यंत्र सहित अन्य व्यवस्थाएं होनी चाहिए। स्कूल का समय तीन से चार घंटे ही होना चाहिए। स्कूल जिस भवन में होगा उसका इस्तेमाल स्कूल के समय रहने के लिए नहीं किया जा सकता है। स्कूलों को एक वर्ष के लिए ही मंजूरी दी जाती है। इसके बाद फिर से टीम जांच कर स्कूलों को निर्देश देती है।
-- -- -- -- -- -- -
विभाग की टीमें लगातार स्कूलों में निरीक्षण कर रही हैं। टीमें अब पंजीकृत स्कूलों के साथ गली मोहल्लों में चलने वाले स्कूलों की भी जांच करेगी। इसके साथ ही उन्हें पंजीकरण करवाने के लिए निर्देश भी देगी। उन्होंने कहा कि अगर कोई भी स्कूल संचालक अपने स्कूल को पंजीकृत करवाना चाहता है तो वह जिला बाल संरक्षण कार्यालय में या फिर जिला कार्यक्रम अधिकारी के पास आवेदन कर सकता है।
ममता, जिला बाल संरक्षण अधिकारी
विज्ञापन
उन्होंने बताया कि अभी तक विभाग के पास 42 प्लेवे स्कूलों के आवेदन आए हैं। जिनमें से 20 को मंजूरी दे दी गई है। इसके साथ ही मंजूरी प्राप्त स्कूलों में विभाग की ओर से व्यवस्थाओं की जांच की जा रही है। अभी तक 12 स्कूलों में जांच हो चुकी है। वहीं चार स्कूलाें को एनसीपीसीआर के तहत गाइडलाइन पूरी करने के रिमाइंडर लेटर भेजे गए हैं। जिनमें से एक स्कूल ने स्कूल बंद करने की अर्जी सौंप दी है। औचक निरीक्षण के दौरान टीमों की ओर से बच्चों को दी जाने वाली सुविधाओं जांच की जाती है।
विज्ञापन
इन स्कूलों को मिली मंजूरी
खरगा आर्मी प्री प्राइमरी प्लेवे स्कूल , सन फ्लावर प्री प्राइमरी स्कूल, रेड रोज प्ले स्कूल, ब्लू हेवन नर्सरी स्कूल, किड वाटिका जड़ौत, बिजी बी प्ले स्कूल, गुरुकुल किंडरगार्टन, स्प्राउट मोंटेसरी प्री प्राइवेट प्ले स्कूल, वेदांता टूडलर्स प्ले वे, ओलिव ग्रीन प्ले वे, मरकरी आर्मी प्री प्राइमरी प्ले स्कूल, सीसल कान्वेंट जूनियर प्ले वे स्कूल, लिटल मिलेनियम प्ले वे स्कूल, मदर प्राइड प्ले वे, आईवरी आर्मी प्री प्राइमरी स्कूल, केपीवीपी किंडरगार्टन प्ले स्कूल को मंजूरी मिली है।
विज्ञापन
इन गाइडलाइन को करना होगा पूरा
स्कूल में 20 बच्चों के लिए एक अध्यापक और एक सहायक होना चाहिए। स्कूल भवन में बच्चों के प्रर्याप्त सुविधाएं जैसे महिला व पुरुष शौचालय, पीने के लिए साफ पानी, खेलने का स्थान, सीसीटीवी कैमरा, अग्निशमन यंत्र सहित अन्य व्यवस्थाएं होनी चाहिए। स्कूल का समय तीन से चार घंटे ही होना चाहिए। स्कूल जिस भवन में होगा उसका इस्तेमाल स्कूल के समय रहने के लिए नहीं किया जा सकता है। स्कूलों को एक वर्ष के लिए ही मंजूरी दी जाती है। इसके बाद फिर से टीम जांच कर स्कूलों को निर्देश देती है।
विभाग की टीमें लगातार स्कूलों में निरीक्षण कर रही हैं। टीमें अब पंजीकृत स्कूलों के साथ गली मोहल्लों में चलने वाले स्कूलों की भी जांच करेगी। इसके साथ ही उन्हें पंजीकरण करवाने के लिए निर्देश भी देगी। उन्होंने कहा कि अगर कोई भी स्कूल संचालक अपने स्कूल को पंजीकृत करवाना चाहता है तो वह जिला बाल संरक्षण कार्यालय में या फिर जिला कार्यक्रम अधिकारी के पास आवेदन कर सकता है।
ममता, जिला बाल संरक्षण अधिकारी