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Ambala News: डीएफसीसीआईएल कॉरिडोर के दूसरे चरण का ट्रायल 11 जुलाई को
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अंबाला। डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कॉरपोरेशन लिमिटेड (डीएफसीसीआईएल) के दूसरे चरण का ट्रायल 11 जुलाई को किया जाएगा। यह ट्रायल सहारनपुर के पास पिलखनी और कलानौर के बीच होगा। यहां मालगाड़ियों के लिए अलग ट्रैक डाल दिया गया है।
कुछ छोटे-मोटे कार्य रह गए हैं जो आगामी एक या दो दिन में निपटा दिए जाएंगे। इससे पहले कॉरिडोर के तहत पहले चरण का ट्रायल 13 जून को पंजाब के शंभू रेलवे स्टेशन से साहनेवाल के बीच किया गया जोकि पूरी तरह से सफल रहा। डीएफसीसीआईएल के इस कॉरिडोर पर मालगाड़ियों के दौड़ने से मेल व एक्सप्रेस ट्रेनों के संचालन पर काफी प्रभाव पड़ेगा और वो जल्द गंतव्य पर पहुंचेगी। पहले एक ही ट्रैक पर मालगाड़ियों के संचालन से यात्री ट्रेनों का संचालन काफी प्रभावित होता था।
अंबाला सेक्शन पर कार्य दो माह लेट
कलानौर से शंभू के बीच रेलवे ट्रैक तो बिछा दिया गया है, लेकिन अभी इस सेक्शन पर ओवर हेड वायर (ओएचई) और सिग्नल का कार्य चल रहा है। इस कारण यह सेक्शन अभी पूरी तरह से मालगाड़ियों के संचालन के लिए तैयार नहीं है। विभाग से प्राप्त जानकारी अनुसार पहले इस सेक्शन को पूरा करने का लक्ष्य अगस्त रखा गया था, लेकिन अब इसमें दो माह की देरी हो सकती है।
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जुलाई 2016 में शुरु हुआ था कार्य
पंजाब के साहनेवाल से सहारनपुर के पिलखनी तक लगभग तीन हजार करोड़ की लागत से 175 किमी लंबा अलग रेलवे ट्रैक बिछाने का कार्य जुलाई 2016 में शुरु किया गया था। यह परियोजना 2005 में बनी थी और 2006 में इसे मंजूरी मिली थी। इस ट्रैक पर 75 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से मालगाड़ियां दौड़ेंगी। ट्रैक का कार्य तीन चरणों में शुरु किया गया। पहले चरण में शंभू से साहनेवाल तक, दूसरे चरण में पिलखनी से कलानौर तक और तीसरे चरण में कलानौर से शंभू तक ट्रैक बिछाया गया। वहीं अंबाला कैंट में सीएसडी डिपो में रेलवे लाइन का कार्य पूरा कर लिया गया है। बस यहां अब एक पुरानी इमारत को तोड़ने का कार्य किया जा रहा है।
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जल्द और सुरक्षित पहुंचेगा सामान
डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर पर दौड़ने वाली मालगाड़ियों का संचालन प्रभावित नहीं होगा क्योंकि इस कॉरिडोर पर कहीं भी रेलवे फाटक नहीं है। लुधियाना से सहारनपुर तक 46 बड़े पुल, 154 छोटे पुल, चार रेलवे फ्लाईओवर, यमुना और मारकंडा नदियों पर दो पुल और 11 नए रेलवे स्टेशन बनाए गए हैं। फ्रेट कॉरिडोर के तैयार होने से जम्मू-कश्मीर, हिमाचल, पंजाब, हरियाणा और यूपी के बीच उद्योग को रफ्तार मिलेगी और जल्द से जल्द सामान एक दूसरी जगह पर सुरक्षित पहुंचेगा। जहां पंजाब के थर्मल प्लांट में कोयले की निर्बाध सप्लाई मिलेगी। वहीं यहां से उर्वरक, सीमेंट और अन्य सामान दूसरी जगह भेजा जा सकेगा।
दूसरे चरण के तहत 11 जुलाई को नए कॉरिडोर पिलखनी और कलानौर के बीच मालगाड़ी का ट्रायल किया जाएगा। तीसरे चरण के तहत कलानौर से शंभू के बीच ट्रैक तो बिछा दिया गया है, लेकिन अभी ओएचई और सिग्नल का कार्य चल रहा है। आगामी दो माह में इसे पूरा कर लिया जाएगा। फिर साहनेवाल से पिलखनी तक बिना रुके मालगाड़ी का ट्रायल किया जाएगा।
पंकज गुप्ता, मुख्य महाप्रबंधक, डीएफसीसीआईएल, अंबाला।
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कुछ छोटे-मोटे कार्य रह गए हैं जो आगामी एक या दो दिन में निपटा दिए जाएंगे। इससे पहले कॉरिडोर के तहत पहले चरण का ट्रायल 13 जून को पंजाब के शंभू रेलवे स्टेशन से साहनेवाल के बीच किया गया जोकि पूरी तरह से सफल रहा। डीएफसीसीआईएल के इस कॉरिडोर पर मालगाड़ियों के दौड़ने से मेल व एक्सप्रेस ट्रेनों के संचालन पर काफी प्रभाव पड़ेगा और वो जल्द गंतव्य पर पहुंचेगी। पहले एक ही ट्रैक पर मालगाड़ियों के संचालन से यात्री ट्रेनों का संचालन काफी प्रभावित होता था।
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अंबाला सेक्शन पर कार्य दो माह लेट
कलानौर से शंभू के बीच रेलवे ट्रैक तो बिछा दिया गया है, लेकिन अभी इस सेक्शन पर ओवर हेड वायर (ओएचई) और सिग्नल का कार्य चल रहा है। इस कारण यह सेक्शन अभी पूरी तरह से मालगाड़ियों के संचालन के लिए तैयार नहीं है। विभाग से प्राप्त जानकारी अनुसार पहले इस सेक्शन को पूरा करने का लक्ष्य अगस्त रखा गया था, लेकिन अब इसमें दो माह की देरी हो सकती है।
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जुलाई 2016 में शुरु हुआ था कार्य
पंजाब के साहनेवाल से सहारनपुर के पिलखनी तक लगभग तीन हजार करोड़ की लागत से 175 किमी लंबा अलग रेलवे ट्रैक बिछाने का कार्य जुलाई 2016 में शुरु किया गया था। यह परियोजना 2005 में बनी थी और 2006 में इसे मंजूरी मिली थी। इस ट्रैक पर 75 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से मालगाड़ियां दौड़ेंगी। ट्रैक का कार्य तीन चरणों में शुरु किया गया। पहले चरण में शंभू से साहनेवाल तक, दूसरे चरण में पिलखनी से कलानौर तक और तीसरे चरण में कलानौर से शंभू तक ट्रैक बिछाया गया। वहीं अंबाला कैंट में सीएसडी डिपो में रेलवे लाइन का कार्य पूरा कर लिया गया है। बस यहां अब एक पुरानी इमारत को तोड़ने का कार्य किया जा रहा है।
जल्द और सुरक्षित पहुंचेगा सामान
डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर पर दौड़ने वाली मालगाड़ियों का संचालन प्रभावित नहीं होगा क्योंकि इस कॉरिडोर पर कहीं भी रेलवे फाटक नहीं है। लुधियाना से सहारनपुर तक 46 बड़े पुल, 154 छोटे पुल, चार रेलवे फ्लाईओवर, यमुना और मारकंडा नदियों पर दो पुल और 11 नए रेलवे स्टेशन बनाए गए हैं। फ्रेट कॉरिडोर के तैयार होने से जम्मू-कश्मीर, हिमाचल, पंजाब, हरियाणा और यूपी के बीच उद्योग को रफ्तार मिलेगी और जल्द से जल्द सामान एक दूसरी जगह पर सुरक्षित पहुंचेगा। जहां पंजाब के थर्मल प्लांट में कोयले की निर्बाध सप्लाई मिलेगी। वहीं यहां से उर्वरक, सीमेंट और अन्य सामान दूसरी जगह भेजा जा सकेगा।
दूसरे चरण के तहत 11 जुलाई को नए कॉरिडोर पिलखनी और कलानौर के बीच मालगाड़ी का ट्रायल किया जाएगा। तीसरे चरण के तहत कलानौर से शंभू के बीच ट्रैक तो बिछा दिया गया है, लेकिन अभी ओएचई और सिग्नल का कार्य चल रहा है। आगामी दो माह में इसे पूरा कर लिया जाएगा। फिर साहनेवाल से पिलखनी तक बिना रुके मालगाड़ी का ट्रायल किया जाएगा।
पंकज गुप्ता, मुख्य महाप्रबंधक, डीएफसीसीआईएल, अंबाला।