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खेतों में बिछा धान, दाने हो रहे अंकुरित
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अंबाला सिटी। पांच दिन से हो रही बारिश ने किसानों के लिए आफत खड़ी कर दी है। न तो मंडी में आई फसल बची है और न ही खेतों में खड़ी फसल को बचाने में किसान सफल हो पा रहे हैं। हालात यह हैं खेतों में कई-कई फीट पानी भरा हुआ है। इस कारण फसल खेतों में ही अंकुरित होने लगी है। दूसरी ओर मंडी में आई धान भी भीगने के कारण अंकुरित होने से खराब हो रही है। जिन किसानों की फसल मंडी में खराब हो रही है वह अपनी फसल को ट्रैक्टर-ट्रॉली में भरकर खाली मैदान में फेंक रहे हैं। किसानों का कहना है कि अभी तक तो जो फसल खराब हुई है वह हो रही है। अगर बारिश आगे भी ऐसे ही जारी रही तो स्थिति और अधिक खराब हो सकती है।
मांगों को लेकर आढ़तियों की हड़ताल जारी है। आढ़तियों की ओर से सरकार के खिलाफ विरोध जताते हुए ई-नेम पोर्टल का विरोध किया जा रहा है। आढ़तियों का कहना है कि जब तक सरकार मांगों को नहीं मान लेती तब तक उनका प्रदर्शन और हड़ताल जारी रहेगी। आढ़तियों ने कहा कि अगर सरकार अभी भी उनकी मांगों की ध्यान नहीं देती है तो वह बड़ा कदम उठाने के लिए मजबूर होंगे।
मुआवजा दे सरकार
हमारी फसल खेत में खड़ी-खड़ी खराब हो रही है। जो फसल हम मंडी में लाए थे वह भी अंकुरित होकर खराब हो गई। इस कारण किसानों को बहुत नुकसान हुआ है। सरकार को मुआवजे की व्यवस्था करनी चाहिए।
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-गुरचरण बलाना, किसान।
आखिर क्या करें
खेतों में खड़ी फसल अंकुरित हो गई। अब समझ नहीं आ रहा है कि आखिर क्या करें। अभी भी खेतों में कई-कई फीट पानी भरा हुआ है। पहले वह निकालना पड़ेगा। जो फसल यहां मंडी में लाए थे वह भी खराब हो गई है।
-हरप्रीत सिंह, बलाना।
ट्रॉली में भरकर फेंकी
जितनी फसल मंडी में लाया था, वह सारी खराब हो गई थी। ट्राली में भरकर उसे कहीं फेंकने जा रहे हैं। देखते हैं कि आखिर क्या होता है। अभी जो थोड़ी बहुत खेतों में धान खड़ी है उसका भी नहीं पता क्या होगा।
- सोहन लाल, बलाना।
सारी फसल खराब
हमारी तो सारी फसल खराब हो गई है। समझ नहीं आ रहा है कि आखिर इस बार बेचेंगे क्या। न तो खेतों में फसल बची है और न ही मंडी में लाई हुई फसल। सभी किसान इस बार बहुत परेशान हैं।
-अमरीक सिंह, गाजीपुर।
अधिकतर फसल खेतों में खड़ी-खड़ी ही अंकुरित हो गई है। अब केवल उन्हीं की फसल थोड़ी बहुत बची है जिन्होंने फसल लेट लगाई थी। सरकार की ओर से 15 जून के बाद फसल लगाने के लिए कहा जाता है। वहीं अगर आढ़तियों की हड़ताल न होती तब भी किसानों को कुछ हद तक राहत मिल सकती थी। 30 प्रतिशत तक फसल खराब हो चुकी है।
- डॉ. राजिंद्र सिंह, कृषि वैज्ञानिक।
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मांगों को लेकर आढ़तियों की हड़ताल जारी है। आढ़तियों की ओर से सरकार के खिलाफ विरोध जताते हुए ई-नेम पोर्टल का विरोध किया जा रहा है। आढ़तियों का कहना है कि जब तक सरकार मांगों को नहीं मान लेती तब तक उनका प्रदर्शन और हड़ताल जारी रहेगी। आढ़तियों ने कहा कि अगर सरकार अभी भी उनकी मांगों की ध्यान नहीं देती है तो वह बड़ा कदम उठाने के लिए मजबूर होंगे।
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मुआवजा दे सरकार
हमारी फसल खेत में खड़ी-खड़ी खराब हो रही है। जो फसल हम मंडी में लाए थे वह भी अंकुरित होकर खराब हो गई। इस कारण किसानों को बहुत नुकसान हुआ है। सरकार को मुआवजे की व्यवस्था करनी चाहिए।
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-गुरचरण बलाना, किसान।
आखिर क्या करें
खेतों में खड़ी फसल अंकुरित हो गई। अब समझ नहीं आ रहा है कि आखिर क्या करें। अभी भी खेतों में कई-कई फीट पानी भरा हुआ है। पहले वह निकालना पड़ेगा। जो फसल यहां मंडी में लाए थे वह भी खराब हो गई है।
-हरप्रीत सिंह, बलाना।
ट्रॉली में भरकर फेंकी
जितनी फसल मंडी में लाया था, वह सारी खराब हो गई थी। ट्राली में भरकर उसे कहीं फेंकने जा रहे हैं। देखते हैं कि आखिर क्या होता है। अभी जो थोड़ी बहुत खेतों में धान खड़ी है उसका भी नहीं पता क्या होगा।
- सोहन लाल, बलाना।
सारी फसल खराब
हमारी तो सारी फसल खराब हो गई है। समझ नहीं आ रहा है कि आखिर इस बार बेचेंगे क्या। न तो खेतों में फसल बची है और न ही मंडी में लाई हुई फसल। सभी किसान इस बार बहुत परेशान हैं।
-अमरीक सिंह, गाजीपुर।
अधिकतर फसल खेतों में खड़ी-खड़ी ही अंकुरित हो गई है। अब केवल उन्हीं की फसल थोड़ी बहुत बची है जिन्होंने फसल लेट लगाई थी। सरकार की ओर से 15 जून के बाद फसल लगाने के लिए कहा जाता है। वहीं अगर आढ़तियों की हड़ताल न होती तब भी किसानों को कुछ हद तक राहत मिल सकती थी। 30 प्रतिशत तक फसल खराब हो चुकी है।
- डॉ. राजिंद्र सिंह, कृषि वैज्ञानिक।