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Ambala News: अब प्राइवेट नहीं जरूरतमंदों के केस पर ध्यान दे सकेंगे वकील

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 18 May 2023 02:22 AM IST
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Now not private, lawyers will be able to focus on the case of the needy
अंबाला सिटी। जरूरतमंदों को मिलने वाली निशुल्क कानूनी सहायता में अब वकीलों की निजी प्रैक्टिस रोडा नहीं बनेगी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर अंबाला में लीगल एड डिफेंस काउंसिल सिस्टम शुरू हो गया है।
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विभिन्न 15 श्रेणियों में कानूनी सहायता का लाभ उठाने वाले प्रार्थियों को जल्द ही और अधिक आसानी से सरकारी वकील उपलब्ध हो सकेंगे। वहीं अब जो भी वकील उनका केस संभालेगा। उसका सारा ध्यान केवल प्रार्थी के केस पर ही होगा, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार प्रत्येक जिले में एक पैनल तैयार किया है। इसमें चीफ, डिप्टी चीफ और सहयोगियों का कुल सात अधिवक्ताओं का पैनल होगा। इन सभी को सरकार की ओर से वेतनमान दिया जाएगा। इन्हें अभी दो साल के लिए रखा है और साथ ही यह शर्त भी रखी है कि वह दो साल तक प्राइवेट प्रैक्टिस नहीं कर सकेंगे। अभी की बात करें तो इस समय चीफ और दो सहयोगियों की नियुक्ति की जा चुकी है। जल्द ही पैनल को पूरा करने की प्रक्रिया जारी है। यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद जरूरतमंदों को पहले से सुगम तरीके से आसानी से कानूनी सहायता उपलब्ध होगी।
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चीफ के पास आएगी शिकायत



जो भी शिकायत आएगी वह सबसे पहले पैनल के चीफ के पास आएगी। यहां से वह केस वह आगे किस सदस्य को देना है वह तय करेंगे। इसके अलावा अगर जरूरतमंद को थाने में भी मदद चाहिए तो पैनल में से सदस्य की वहां पहुंचने की भी जिम्मेदारी होगी। अगर किसी को अग्रिम जमानत याचिका की दरकार है तो वह भी यह टीम लगाएगी। वहीं वकीलों की ओर से जो भी सुविधा दी जाती है। वह सारा कार्य यह अधिवक्ता निशुल्क करेंगे। अगर व्यक्ति तय कि गई किसी भी श्रेणी में से आता है तो उससे एक भी रुपया नहीं लिया जाएगा।
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यह होंगे लाभार्थी

अनुसूचित जाति, पिछड़ी जाति अथवा जन जाति के सदस्य।



मनुष्यों का अवैध व्यापार किए जाने से आहत व्यक्ति।

स्त्री और बच्चे।
अंधापन, कुष्टरोग, एक स्थान से दूसरे स्थान पर चले जाने वाले खानाबदोश, बहरापन, दिमागी कमजोरी से ग्रस्त व्यक्ति।

सामूहिक आपदा, जातीय हिंसा, वर्ग विशेष पर अत्याचार, बाढ़, अकाल, भूकंप अथवा औद्योगिक आपदा से ग्रस्त व्यक्ति।



एक औद्योगिक कामगार।

किशोर अपराधी अर्थात 18 वर्ष तक आयु के व्यक्ति को सम्मिलित करते हुए परिक्षणाधीन व्यक्ति जो हिरासत में सुरक्षा ग्रह अथवा मानसिक अस्पताल अथवा नर्सिंग होम में मानसिक रुप से बीमार व्यक्ति।




एक ऐसा व्यक्ति जिसकी वार्षिक आय 3 लाख से कम है।

स्वतंत्रता सैनानी या आश्रित।



वरिष्ठ नागरिक।

किन्नर समुदाय से संबंधित व्यक्ति



एचआईवी पॉजिटिव एड्स पीड़ित




वर्जन

जरूरतमंदों क लिए यह काफी अच्छी सुविधा प्रदान की गई है। लोग इसका लाभ उठाएं। दूसरों को भी इस संबंध में जागरूक करें। इस सुविधा से लोगों को समय से और पूरी कोशिश के साथ न्याय मिल सकेगा। हाल ही में इसकी शुरुआत अंबाला जिला में की गई है।
-सौरभ गुप्ता, सीजेएम और सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण
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