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Ambala News: अब छावनी रेलवे स्टेशन पर 480 करोड़ नहीं 110 करोड़ होंगे खर्च
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अंबाला कैंट रेलवे स्टेशन के परिसर में किया जा रहा सुधार का कार्य। संवाद
अंबाला। अंबाला कैंट रेलवे स्टेशन को विश्वस्तरीय बनाने में 480 करोड़ रुपये नहीं, बल्कि 110 करोड़ रुपये खर्च होंगे। रेलवे के निर्देश पर रेल भूमि विकास प्राधिकरण (आरएलडीए) ने कांट-छांट के बाद प्रस्ताव तैयार करके रेल मंत्रालय को भेज दिया है।
इस प्रस्ताव के तहत रेलवे स्टेशन के परिसर और मुख्य इमारत के स्वरूप को ही बदला जाएगा। अन्य हिस्से को लेकर अगले चरण में योजना तैयार की जाएगी। उम्मीद जताई गई है कि जल्द ही रेलवे आरएलडीए के प्रस्ताव को अनुमति प्रदान करेगी, जिससे कि आगामी प्रक्रिया आरंभ की जा सके। दरअसल रेलवे स्टेशन के साथ रिहायशी क्षेत्र है जो रेलवे की इस परियोजना में रोड़ा बन रहा है। वहां रेलवे द्वारा विकास नहीं किया जा सकता है। इसी कारण से बजट में कटौती की गई है।
तीन बार बदली परियोजना
पहला बदलाव
अंबाला कैंट रेलवे स्टेशन को विश्वस्तरीय बनाने की योजना आरएलडीए द्वारा तीन बार तैयार की गई। पहला प्रस्ताव तैयार किया, लेकिन इसे अंबाला रेल मंडल के अधिकारियों को दिखाए बगैर ही रेल मंत्री के समक्ष प्रस्तुत कर दिया गया। जिस अस्वीकार कर दिया गया।
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दूसरा बदलाव
आरएलडीए की टीम ने दोबारा मंडल प्रबंधन से मंत्रणा करके प्रस्ताव तैयार किया जोकि 480 करोड़ से कम होकर 240 करोड़ तक पहुंच गया। लेकिन इस प्रस्ताव को भी अमान्य करार दिया गया।
तीसरा बदलाव
इसके बाद आरएलडीए ने तीसरा प्रस्ताव तैयार किया और इसकी लागत लगभग 110 करोड़ रुपये निर्धारित की गई। इस लागत में रेलवे परिसर व स्टेशन की इमारतों के नवनिर्माण का ही लेखा-जोखा तैयार किया गया। इसमें न तो रेलवे कॉलोनी की तरफ जाने वाले रास्ते और हिस्से को और न ही रेलवे यार्ड के खुले हिस्से को शामिल किया।
आठ साल से चल रहा प्रयास
उत्तर रेलवे का अंबाला कैंट रेलवे स्टेशन सबसे प्रमुख व अहम स्टेशन है। यहां रोजाना 250 से अधिक ट्रेनों का आवागमन होता है और यात्रियों की संख्या भी 50 हजार के करीब है। इसके बावजूद स्टेशन को विश्वस्तरीय बनाने की योजना पिछले आठ वर्ष से चल रही है जोकि आजतक सिरे नहीं चढ़ पाई। पहले फ्रांस की टीम ने दौरा किया और फिर चंडीगढ़ आर्किटेक्ट कॉलेज की टीम ने। नक्शा भी तैयार हुआ, लेकिन काम शुरु नहीं हो पाया। जबकि इस दौरान तीन मंडल रेल प्रबंधक भी बदल गए।
वर्जन
अंबाला कैंट रेलवे स्टेशन के नक्शे में बदलाव करके प्रस्ताव तैयार करके रेल मंत्रालय के पास भेजा है। रेलवे से प्रस्ताव की अनुमति का इंतजार हो रहा है।
नवीन कुमार, वरिष्ठ वाणिज्य प्रबंधक, अंबाला मंडल।
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इस प्रस्ताव के तहत रेलवे स्टेशन के परिसर और मुख्य इमारत के स्वरूप को ही बदला जाएगा। अन्य हिस्से को लेकर अगले चरण में योजना तैयार की जाएगी। उम्मीद जताई गई है कि जल्द ही रेलवे आरएलडीए के प्रस्ताव को अनुमति प्रदान करेगी, जिससे कि आगामी प्रक्रिया आरंभ की जा सके। दरअसल रेलवे स्टेशन के साथ रिहायशी क्षेत्र है जो रेलवे की इस परियोजना में रोड़ा बन रहा है। वहां रेलवे द्वारा विकास नहीं किया जा सकता है। इसी कारण से बजट में कटौती की गई है।
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तीन बार बदली परियोजना
पहला बदलाव
अंबाला कैंट रेलवे स्टेशन को विश्वस्तरीय बनाने की योजना आरएलडीए द्वारा तीन बार तैयार की गई। पहला प्रस्ताव तैयार किया, लेकिन इसे अंबाला रेल मंडल के अधिकारियों को दिखाए बगैर ही रेल मंत्री के समक्ष प्रस्तुत कर दिया गया। जिस अस्वीकार कर दिया गया।
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दूसरा बदलाव
आरएलडीए की टीम ने दोबारा मंडल प्रबंधन से मंत्रणा करके प्रस्ताव तैयार किया जोकि 480 करोड़ से कम होकर 240 करोड़ तक पहुंच गया। लेकिन इस प्रस्ताव को भी अमान्य करार दिया गया।
तीसरा बदलाव
इसके बाद आरएलडीए ने तीसरा प्रस्ताव तैयार किया और इसकी लागत लगभग 110 करोड़ रुपये निर्धारित की गई। इस लागत में रेलवे परिसर व स्टेशन की इमारतों के नवनिर्माण का ही लेखा-जोखा तैयार किया गया। इसमें न तो रेलवे कॉलोनी की तरफ जाने वाले रास्ते और हिस्से को और न ही रेलवे यार्ड के खुले हिस्से को शामिल किया।
आठ साल से चल रहा प्रयास
उत्तर रेलवे का अंबाला कैंट रेलवे स्टेशन सबसे प्रमुख व अहम स्टेशन है। यहां रोजाना 250 से अधिक ट्रेनों का आवागमन होता है और यात्रियों की संख्या भी 50 हजार के करीब है। इसके बावजूद स्टेशन को विश्वस्तरीय बनाने की योजना पिछले आठ वर्ष से चल रही है जोकि आजतक सिरे नहीं चढ़ पाई। पहले फ्रांस की टीम ने दौरा किया और फिर चंडीगढ़ आर्किटेक्ट कॉलेज की टीम ने। नक्शा भी तैयार हुआ, लेकिन काम शुरु नहीं हो पाया। जबकि इस दौरान तीन मंडल रेल प्रबंधक भी बदल गए।
वर्जन
अंबाला कैंट रेलवे स्टेशन के नक्शे में बदलाव करके प्रस्ताव तैयार करके रेल मंत्रालय के पास भेजा है। रेलवे से प्रस्ताव की अनुमति का इंतजार हो रहा है।
नवीन कुमार, वरिष्ठ वाणिज्य प्रबंधक, अंबाला मंडल।