{"_id":"67b8c99d8c72c31271035987","slug":"monkey-terror-at-cantt-railway-station-ambala-news-c-36-1-amb1001-137982-2025-02-22","type":"story","status":"publish","title_hn":"Ambala News: कैंट रेलवे स्टेशन पर बंदरों का आतंक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Ambala News: कैंट रेलवे स्टेशन पर बंदरों का आतंक
विज्ञापन
अंबाला। छावनी रेलवे स्टेशन पर बंदरों का आतंक है। तीन बंदरों ने स्टेशन पर उत्पात मचाया है। बावजूद इसके बंदरों को पकड़ने के लिए कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। यात्रियों सहित टिकट चेकिंग में तैनात वाणिज्य विभाग के कर्मचारियों को बंदर ने काट खाया है। ऐसे में स्टेशन पर आने वाले यात्रियों सहित कर्मचारियों में डर का माहौल है।
शुक्रवार को भी एक बंदर ने टिकट जांच में जुटी महिला की बाजू पर काट लिया। गनीमत रही कि महिला को गंभीर घाव नहीं हुआ। महिला कर्मी को तुरंत रेलवे अस्पताल ले जाया गया और उपचार दिया। इसके अलावा कुछ यात्रियों को भी बंदरों ने नुकसान पहुंचाया। वहीं, स्टेशन पर तैनात खानपान स्टाल से भी बंदर सामान उठा रहे हैं। इसके अलावा यात्रियों के सामान को भी बंदर नुकसान पहुंचा रहे हैं।
नहीं हो रही सुनवाई
स्टेशन अधीक्षक की तरफ से बंदरों को पकड़ने के लिए वन विभाग सहित नगर परिषद से भी गुहार लगाई गई है लेकिन वन विभाग का कहना है कि बंदरों को पकड़ने का अधिकारी अब उनके पास नहीं बल्कि नगर परिषद के पास है जबकि नगर परिषद के पास बंदरों को पकड़ने के लिए न तो ढांचा है और न ही प्रशिक्षित कर्मचारी। ऐसे में इन बंदरों से छुटकारा मिलने की उम्मीद कम ही नजर आ रही है। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि ये बंदर किसी के पालतू हैं जो शाम होते ही गायब हो जाते हैं और सुबह होते ही स्टेशन पर पहुंच जाते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
शुक्रवार को भी एक बंदर ने टिकट जांच में जुटी महिला की बाजू पर काट लिया। गनीमत रही कि महिला को गंभीर घाव नहीं हुआ। महिला कर्मी को तुरंत रेलवे अस्पताल ले जाया गया और उपचार दिया। इसके अलावा कुछ यात्रियों को भी बंदरों ने नुकसान पहुंचाया। वहीं, स्टेशन पर तैनात खानपान स्टाल से भी बंदर सामान उठा रहे हैं। इसके अलावा यात्रियों के सामान को भी बंदर नुकसान पहुंचा रहे हैं।
विज्ञापन
नहीं हो रही सुनवाई
स्टेशन अधीक्षक की तरफ से बंदरों को पकड़ने के लिए वन विभाग सहित नगर परिषद से भी गुहार लगाई गई है लेकिन वन विभाग का कहना है कि बंदरों को पकड़ने का अधिकारी अब उनके पास नहीं बल्कि नगर परिषद के पास है जबकि नगर परिषद के पास बंदरों को पकड़ने के लिए न तो ढांचा है और न ही प्रशिक्षित कर्मचारी। ऐसे में इन बंदरों से छुटकारा मिलने की उम्मीद कम ही नजर आ रही है। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि ये बंदर किसी के पालतू हैं जो शाम होते ही गायब हो जाते हैं और सुबह होते ही स्टेशन पर पहुंच जाते हैं।
विज्ञापन