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Ambala News: डीएवी रीवरसाइड की मीनल और आर्मी पब्लिक स्कूल के भुवनेश अव्वल
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अंबाला सिटी। सीबीएसई 10वीं के परीक्षा परिणाम में लड़कियों का दबदबा रहा। कैंट के डीएवी रीवरसाइड की मीनल जैन और आर्मी पब्लिक स्कूल के भुवनेश जैन 97.8 प्रतिशत अंक लेकर अव्वल रहे। कैंट के कॉन्वेंट जीसस एंड मैरी की वंशिका गुप्ता ने 97.6 प्रतिशत और सिटी पीकेआर जैन पब्लिक स्कूल की आरषी ऑबरोय ने 97.4 प्रतिशत अंक हासिल किए। जिले में 10वीं में 7651 विद्यार्थियों ने परीक्षा दी।
डीएवी रीवरसाइड कैंट की मीनल ने इंग्लिश में 97, हिंदी में 96, मैथ में 97, साइंस में 95 और एसएसटी में 99, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में 100 अंक लिए। पिता समीर जैन मेट्रो मोटर्स में अकाउंट में असिस्टेंट मैनेजर हैं और मां गृहिणी हैं। मीनल ने बताया कि वह नॉन मेडिकल से पढ़ाई करेंगी। उनका सपना इंजीनियर बनने का है। मीनल ने बताया कि उसने एनसीईआरटी की बुक पढ़ी। उसे स्कूल से अच्छे नोट्स मिले। साथ ही ऑनलाइन सैंपल पेपर सॉल्व किए। परीक्षा के एक महीने पहले ही सिलेबस रिवाइज किया। पढ़ाई में पेरेंट्स का काफी सपोर्ट रहा। उसे 95 प्रतिशत अंक आने की उम्मीद थी।
आर्मी पब्लिक स्कूल के भुवनेश जैन ने इंग्लिश में 99, हिंदी में 95, मैथ में 98, साइंस में 98, सोशल साइंस में 99 अंक हासिल किए। भुवनेश ने बताया कि उसके पिता विकास जैन का कपड़े का बिजनेस है। मां नीरजला सिंह डिजाइनर हैं। भुवनेश ने बताया कि उसने स्कूल में रेगुलर कक्षाएं लगाई। रेगुलर टेस्ट चलते थे और टीचर्स की गाइडेंस से नोट्स तैयार कर पढ़ाई की। एनसीईआरटी की किताबों से रिविजन किया। उसने अब नॉन मेडिकल संकाय लिया है। वह फिजिक्स में रिसर्च साइंटिस्ट बनना चाहते हैं।
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कान्वेंट ऑफ जीसस मैरी की वंशिका गुप्ता ने के पिता आरके गुप्ता रेलवे में एडीआरएम हैं और मां शालू गुप्ता गृहिणी हैं। वंशिका डॉक्टर बनना चाहती हैं। अब उसने मेडिकल संकाय लिया है। वंशिका ने बताया कि उसने रेगुलर स्टडी की। रोजाना होम वर्क को निपटाती थी। सेल्फ स्टडी की और टीचर्स की मदद ली। सोशल स्टडी विषय उसे कम अच्छा लगता था इसलिए उसने एनसीईआरटी चैप्टर को रिवाइज किया। घर पर देर रात तक नहीं पढ़ी बल्कि स्कूल में जो टीचर्स ने पढ़ाया, उसे अच्छे से पढ़ा।
वहीं सिटी पीकेआर जैन पब्लिक स्कूल की आरषी ओबरॉय ने के पिता विकास ओबरॉय टैक्स एडवाइजर हैं और मां पूजा कॉमर्स की कोचिंग देती हैं। आरषी ने बताया कि सिलेबस को अंडरलाइन कर बार-बार रिवाइज किया। जो भी विषय कमजोर लगता था उसे टेस्ट बनाकर रिवाइज करती थी। किताबों को अच्छे तरीके से पढ़ा। रटने की बजाए समझकर पढ़ा ताकि लंबे समय तक याद रह सके। जहां कहीं भी किसी विषय को लेकर कोई समस्या आती थी तो टीचर्स से डिस्कस करती थी।
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डीएवी रीवरसाइड कैंट की मीनल ने इंग्लिश में 97, हिंदी में 96, मैथ में 97, साइंस में 95 और एसएसटी में 99, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में 100 अंक लिए। पिता समीर जैन मेट्रो मोटर्स में अकाउंट में असिस्टेंट मैनेजर हैं और मां गृहिणी हैं। मीनल ने बताया कि वह नॉन मेडिकल से पढ़ाई करेंगी। उनका सपना इंजीनियर बनने का है। मीनल ने बताया कि उसने एनसीईआरटी की बुक पढ़ी। उसे स्कूल से अच्छे नोट्स मिले। साथ ही ऑनलाइन सैंपल पेपर सॉल्व किए। परीक्षा के एक महीने पहले ही सिलेबस रिवाइज किया। पढ़ाई में पेरेंट्स का काफी सपोर्ट रहा। उसे 95 प्रतिशत अंक आने की उम्मीद थी।
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आर्मी पब्लिक स्कूल के भुवनेश जैन ने इंग्लिश में 99, हिंदी में 95, मैथ में 98, साइंस में 98, सोशल साइंस में 99 अंक हासिल किए। भुवनेश ने बताया कि उसके पिता विकास जैन का कपड़े का बिजनेस है। मां नीरजला सिंह डिजाइनर हैं। भुवनेश ने बताया कि उसने स्कूल में रेगुलर कक्षाएं लगाई। रेगुलर टेस्ट चलते थे और टीचर्स की गाइडेंस से नोट्स तैयार कर पढ़ाई की। एनसीईआरटी की किताबों से रिविजन किया। उसने अब नॉन मेडिकल संकाय लिया है। वह फिजिक्स में रिसर्च साइंटिस्ट बनना चाहते हैं।
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कान्वेंट ऑफ जीसस मैरी की वंशिका गुप्ता ने के पिता आरके गुप्ता रेलवे में एडीआरएम हैं और मां शालू गुप्ता गृहिणी हैं। वंशिका डॉक्टर बनना चाहती हैं। अब उसने मेडिकल संकाय लिया है। वंशिका ने बताया कि उसने रेगुलर स्टडी की। रोजाना होम वर्क को निपटाती थी। सेल्फ स्टडी की और टीचर्स की मदद ली। सोशल स्टडी विषय उसे कम अच्छा लगता था इसलिए उसने एनसीईआरटी चैप्टर को रिवाइज किया। घर पर देर रात तक नहीं पढ़ी बल्कि स्कूल में जो टीचर्स ने पढ़ाया, उसे अच्छे से पढ़ा।
वहीं सिटी पीकेआर जैन पब्लिक स्कूल की आरषी ओबरॉय ने के पिता विकास ओबरॉय टैक्स एडवाइजर हैं और मां पूजा कॉमर्स की कोचिंग देती हैं। आरषी ने बताया कि सिलेबस को अंडरलाइन कर बार-बार रिवाइज किया। जो भी विषय कमजोर लगता था उसे टेस्ट बनाकर रिवाइज करती थी। किताबों को अच्छे तरीके से पढ़ा। रटने की बजाए समझकर पढ़ा ताकि लंबे समय तक याद रह सके। जहां कहीं भी किसी विषय को लेकर कोई समस्या आती थी तो टीचर्स से डिस्कस करती थी।