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मुक्ति ब्रह्मज्ञान से मिलती है, कर्मकांड से नहीं : स्वामी ज्ञान नाथ
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सत्संग में मौजूद महिलाएं। संस्था
संवाद न्यूज एजेंसी
मुलाना। गांव अधोया में आयोजित विशाल संत सम्मेलन के दौरान श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए 1008 महामंडलेश्वर एडवोकेट सतगुरु स्वामी ज्ञान नाथ महाराज ने कहा कि मुक्ति भविष्य की घटना नहीं, बल्कि इसी क्षण उपलब्ध होने वाला सत्य है। यह कर्मकांड से नहीं बल्कि ब्रह्मज्ञान से मिलती है।
निराकारी जागृति मिशन के अध्यक्ष स्वामी ज्ञान नाथ ने कहा कि अज्ञानता का पर्दा हटते ही आत्मा का वास्तविक ज्ञान और प्रेम स्वरूप स्वतः प्रकट हो जाता है। उन्होंने द्रष्टा भाव पर जोर देते हुए कहा कि विचार, इच्छाएं और अपेक्षाएं बदलती रहती हैं, लेकिन आत्मा स्थिर रहती है। स्वयं को इस परिवर्तन का साक्षी बना लेना ही अध्यात्म का गूढ़ रहस्य है। नियमित सुरत-शब्द योग का अभ्यास ही अध्यात्म की कुंजी है।
सम्मेलन में महात्मा सुरेश दास ने जीवन और मृत्यु की शाश्वतता पर विचार व्यक्त करते हुए कहा कि मृत्यु अंत नहीं, मात्र एक परिवर्तन है। सांसों की पूंजी पूरी होने पर हर जीव को यह संसार छोड़ना पड़ता है। वहीं, डॉ. बलवंत दौलतपुर ने संगठन और सद्भाव की प्रेरणा देते हुए कहा कि मानव जीवन का अंतिम उद्देश्य ईश्वर प्राप्ति है। हमें मधुमक्खियों की भांति एकजुट होकर रहना चाहिए। कार्यक्रम के समापन पर विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें भारी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।
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मुलाना। गांव अधोया में आयोजित विशाल संत सम्मेलन के दौरान श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए 1008 महामंडलेश्वर एडवोकेट सतगुरु स्वामी ज्ञान नाथ महाराज ने कहा कि मुक्ति भविष्य की घटना नहीं, बल्कि इसी क्षण उपलब्ध होने वाला सत्य है। यह कर्मकांड से नहीं बल्कि ब्रह्मज्ञान से मिलती है।
निराकारी जागृति मिशन के अध्यक्ष स्वामी ज्ञान नाथ ने कहा कि अज्ञानता का पर्दा हटते ही आत्मा का वास्तविक ज्ञान और प्रेम स्वरूप स्वतः प्रकट हो जाता है। उन्होंने द्रष्टा भाव पर जोर देते हुए कहा कि विचार, इच्छाएं और अपेक्षाएं बदलती रहती हैं, लेकिन आत्मा स्थिर रहती है। स्वयं को इस परिवर्तन का साक्षी बना लेना ही अध्यात्म का गूढ़ रहस्य है। नियमित सुरत-शब्द योग का अभ्यास ही अध्यात्म की कुंजी है।
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सम्मेलन में महात्मा सुरेश दास ने जीवन और मृत्यु की शाश्वतता पर विचार व्यक्त करते हुए कहा कि मृत्यु अंत नहीं, मात्र एक परिवर्तन है। सांसों की पूंजी पूरी होने पर हर जीव को यह संसार छोड़ना पड़ता है। वहीं, डॉ. बलवंत दौलतपुर ने संगठन और सद्भाव की प्रेरणा देते हुए कहा कि मानव जीवन का अंतिम उद्देश्य ईश्वर प्राप्ति है। हमें मधुमक्खियों की भांति एकजुट होकर रहना चाहिए। कार्यक्रम के समापन पर विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें भारी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।
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