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Ambala News: गर्भावस्था में पोषण की कमी बन सकती है खतरा
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डीआईईसी सेंटर में जांच करवाने आए अभिभावक।
अंबाला सिटी। गर्भकाल में सही तरीके से पोषण न मिलने के कारण जन्म से ही बच्चों में दिल की बीमारियां होने का खतरा बढ़ रहा है। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत चलाए जा रहे जांच अभियान में सामने आया है कि प्रत्येक वर्ष शून्य से लेकर 18 वर्ष तक बच्चों में दिल से संबंधित समस्याएं बढ़ रही है। दो वर्ष पहले 55 से 60 बच्चे मिलते थे। तो वहीं अब 65 से 70 बच्चों में दिल की बीमारियां देखने को मिल रही है। इनके उपचार के लिए डीआईईसी सेंटर से निजी अस्पतालों में भेजा जाता है। इसके बाद बच्चों का उपचार निजी अस्पताल में उपचार करवाया जाता है। अभी तक विभाग करीब 4 करोड़ 50 लाख रुपए का उपचार दे चुका है।
10 टीमें करती हैं स्क्रीनिंग
डीआईईसी सेंटर से डॉ तनुराज ने बताया कि राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत 10 टीमें लगाई गई हैं। जो जिले भर में सर्वे करती हैं और बच्चों की स्क्रीनिंग करवाती है। स्क्रीनिंग के बाद जिन बच्चों में मामूली लक्षण भी होते हैं, उन्हें जांच के लिए विशेषज्ञ चिकित्सक के पास भेजा जाता है। जांच में अगर बच्चे के दिल में किसी भी तरह की परेशानी पाई जाती है, तो उस बच्चे को उपचार के लिए निजी अस्पताल भेजा जाता है। जिसका सारा खर्च सरकार द्वारा उठाया जाता है। इसके तहत ऑपरेशन के साथ- साथ दवाओं का खर्च व अन्य किसी उपकरण का खर्च भी शामिल होता है।
समय पर जांच जरूरी
यह समस्या उन बच्चों को अधिक होती है। जिनकी माताओं को गर्भकाल के दौरान सही पोषण नहीं मिल पाता। अगर समय पर जांच न करवाई जाए तो परेशानी बढ़ जाती है। कई अभिभावक ऑपरेशन करवाने से कतराते हैं। क्योंकि उन्हें लगता है कि उनके बच्चे की समस्या बढ़े होने पर ठीक हो जाएगी। जबकि इसकी जांच समय रहते करवा लेनी चाहिए।
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सेंटर की ओर से बच्चों के कागजात बनवाकर आरबीएस के पास भेज दिया जाता है। निजी अस्पताल में उपचार के बाद सरकार की ओर सारे खर्च का भुगतान कर दिया जाता है।
-- -- डॉ तनुराज, डीआईईसी सेंटर प्रभारी, नागरिक अस्पताल,
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10 टीमें करती हैं स्क्रीनिंग
डीआईईसी सेंटर से डॉ तनुराज ने बताया कि राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत 10 टीमें लगाई गई हैं। जो जिले भर में सर्वे करती हैं और बच्चों की स्क्रीनिंग करवाती है। स्क्रीनिंग के बाद जिन बच्चों में मामूली लक्षण भी होते हैं, उन्हें जांच के लिए विशेषज्ञ चिकित्सक के पास भेजा जाता है। जांच में अगर बच्चे के दिल में किसी भी तरह की परेशानी पाई जाती है, तो उस बच्चे को उपचार के लिए निजी अस्पताल भेजा जाता है। जिसका सारा खर्च सरकार द्वारा उठाया जाता है। इसके तहत ऑपरेशन के साथ- साथ दवाओं का खर्च व अन्य किसी उपकरण का खर्च भी शामिल होता है।
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समय पर जांच जरूरी
यह समस्या उन बच्चों को अधिक होती है। जिनकी माताओं को गर्भकाल के दौरान सही पोषण नहीं मिल पाता। अगर समय पर जांच न करवाई जाए तो परेशानी बढ़ जाती है। कई अभिभावक ऑपरेशन करवाने से कतराते हैं। क्योंकि उन्हें लगता है कि उनके बच्चे की समस्या बढ़े होने पर ठीक हो जाएगी। जबकि इसकी जांच समय रहते करवा लेनी चाहिए।
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सेंटर की ओर से बच्चों के कागजात बनवाकर आरबीएस के पास भेज दिया जाता है। निजी अस्पताल में उपचार के बाद सरकार की ओर सारे खर्च का भुगतान कर दिया जाता है।