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हनीट्रैप मामले में फंसे इंस्पेक्टर को नहीं मिली अग्रिम जमानत

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 08 Nov 2022 01:45 AM IST
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Inspector trapped in honeytrap case did not get anticipatory bail
अंबाला। एफसीआई कर्मचारी को हनीट्रैप में फंसाकर 10 लाख रुपये की सौदेबाजी करने के मामले में फंसे पूर्व महेश नगर थाना प्रभारी इंस्पेक्टर सुभाष कुमार को सोमवार को अग्रिम जमानत नहीं मिली। जमानत को लेकर इंस्पेक्टर पक्ष के वकील ने कोर्ट में करीब तीन घंटे तक दलीलें दीं मगर अदालत ने जमानत नहीं दी। इस मामले में अगली सुनवाई 09 नवंबर को होगी।
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कोर्ट में बहस के दौरान एडवोकेट मान सिंह काकरान ने इंस्पेक्टर की तरफ से जांच में जुटे पुलिस अधिकारी से कई सवाल किए। दोनों पक्षों के वकीलों के बीच तीन घंटे तक चली बहस के बाद कोर्ट ने अब बुधवार को दोबारा पुलिस को सबूत रखने के लिए कहते हुए सुनवाई टाल दी है।
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एडवोकेट मान सिंह ने बताया कि पुलिस ने इस मामले में पहली एफआईआर नंबर 240 रद नहीं की बल्कि एफआईआर नंबर 259 भी दर्ज कर दी। मान सिंह ने कहा कि यह कैसे कहा जा सकता है कि पहले मुकदमा झूठा है और जब पहले वाला मुकदमा रद होगा तभी नया मुकदमा दर्ज होगा। हालांकि पुलिस ने पक्ष रखते हुए कहा था कि मुकदमा रद कर दिया गया है, वहीं, दूसरे मामले में यमुनानगर में भी दुष्कर्म का पहला मुकदमा रद नहीं हुआ और दूसरा दर्ज कर दिया। कोर्ट में पुलिस ने जवाब दिया था कि डीएसपी ने मुकदमा रद कर दिया। एडवोकेट मान सिंह ने कहा कि पुलिस ने जो धारा 384 लगाई है। उसमें इंस्पेक्टर सुभाष पूछताछ के लिए तैयार है। पुलिस इंस्पेक्टर सुभाष के मोबाइल की कॉल डिटेल और चेट निकलवा सकती है। पुलिस ने कोर्ट में कहा है कि इंस्पेक्टर सुभाष ने आरोपी सुखविंदर कौर से बात की है। मोबाइल में वह रिकॉर्डिंग है। अब पुलिस बुधवार को अपना पक्ष रखेगी।
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पहले भी टल चुकी थी सुनवाई
बता दें कि हनीट्रैप मामले में एफसीआई कर्मचारी मनोज की बैंक मैनेजर पत्नी प्रीति सहित रवनीत और सुखविंद्र कौर को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था। झूठे मुकदमे में फंसाकर 10 लाख रुपये की सौदेबाजी करने के मामले में एक अन्य आरोपी गौरव सहित इंस्पेक्टर सुभाष का भी नाम आया था। हालांकि एसपी जश्नदीप रंधावा ने इंस्पेक्टर सुभाष को सस्पेंड कर दिया था लेकिन गिरफ्तारी के डर से बचने के लिए सुभाष ने कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका लगाई थी। पहले सीआई-2 की टीम ने आपत्ति जताई थी और सुनवाई टल गई थी।
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