{"_id":"68c31f1f6c7101f2c103fb0a","slug":"ignoring-lumps-in-the-body-is-giving-women-the-risk-of-developing-cancer-ambala-news-c-36-1-sknl1017-149475-2025-09-12","type":"story","status":"publish","title_hn":"Ambala News: शरीर में गांठ की अनदेखी महिलाओं को दे रही कैंसर का घाव","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Ambala News: शरीर में गांठ की अनदेखी महिलाओं को दे रही कैंसर का घाव
Fri, 12 Sep 2025 12:42 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला
संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला
Updated Fri, 12 Sep 2025 12:42 AM IST
विज्ञापन
अटल कैंसर केयर केंद्र में मिनाक्षी राणा भूषण महिला की जांच करती हुई: संवाद
- फोटो : संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला। महिलाओं का बिगड़ा खानपान व शरीर में छोटी सी गांठ की अनदेखी उन्हें कैंसर की ओर धकेल रही है। जबकि कैंसर का पता भी उन्हें अस्पताल की ओपीडी में आकर जांच करवाने के दौरान पता चलता है। ऐसे में मामले अटल कैंसर केयर केंद्र में महिला एवं कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. मिनाक्षी राणा भूषण की ओपीडी में लगातार सामने आ रहे हैं। इसका मुख्य कारण महिलाओं में जागरूकता का अभाव नजर आ रहा है। पहले तो वह शरीर में ब्रेस्ट व अन्य जगह होने वाली गांठ को अनदेखा कर देती है। लेकिन बाद में यह गांठ बढ़ती चली जाती है और एक दिन कैंसर का रूप ले लेती है। डॉ. मिनाक्षी राणा भूषण ने बताया कि इस तरह के रोजाना उनकी ओपीडी में 3 से 4 मरीज आ रहे हैं। हालांकि कई गंभीर मरीजों के ऑपरेशन भी किए जाते हैं। हर माह ओपीडी में इस तरह के करीब 92 मरीज आ जाते हैं।
सबसे ज्यादा महिलाओं की ब्रेस्ट में पाई जाती है गांठ
कैंसर की गांठ शरीर के अलग-अलग हिस्सों में हो सकती है। महिलाओं में ब्रेस्ट में सबसे ज्यादा गांठ पाई जाती है। ऐसे में ब्रेस्ट का शेप बदल जाता है और गांठ महसूस हो सकती है या निप्पल से खून निकल सकता है। इसके अलावा गर्दन में थायरॉइड में गांठ डेवलप हो सकती है। कैंसर की गांठ का शेप शुरुआत में छोटा हो सकता है, जो सिर्फ कुछ मिलीमीटर का हो सकता है। जैसे-जैसे कैंसर का इंफेक्शन बढ़ता है, यह गांठ शेप में बड़ी होती जाती है। जब यह गांठ 1 से 2 सेंटीमीटर से अधिक हो जाती है, तो यह चिंता का कारण बन सकती है। कभी भी शरीर में कोई गांठ दिखे तो संबंधित विशेषज्ञ का परामर्श लें।
ओपीडी में आने वाली हर मरीज को किया जा रहा जागरूक
डॉ. मिनाक्षी राणा भूषण ने बताया कि अटल कैंसर केयर केंद्र में 112 नंबर कमरे में उनकी ओपीडी होती है। जांच के लिए आने वाले मरीजों व उनके तीमारदारों को समय-समय पर शरीर के किसी भी हिस्से में गांठ को नजरअंदाज न करने के लिए जागरूक किया जाता है। यहीं कारण है कि जागरूक बढ़ने पर महिलाएं सामने आती है। शुरुआती चरण में इस तरह की गांठ का दवाओं से ही उपचार संभव है।
विज्ञापन
विज्ञापन
अंबाला। महिलाओं का बिगड़ा खानपान व शरीर में छोटी सी गांठ की अनदेखी उन्हें कैंसर की ओर धकेल रही है। जबकि कैंसर का पता भी उन्हें अस्पताल की ओपीडी में आकर जांच करवाने के दौरान पता चलता है। ऐसे में मामले अटल कैंसर केयर केंद्र में महिला एवं कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. मिनाक्षी राणा भूषण की ओपीडी में लगातार सामने आ रहे हैं। इसका मुख्य कारण महिलाओं में जागरूकता का अभाव नजर आ रहा है। पहले तो वह शरीर में ब्रेस्ट व अन्य जगह होने वाली गांठ को अनदेखा कर देती है। लेकिन बाद में यह गांठ बढ़ती चली जाती है और एक दिन कैंसर का रूप ले लेती है। डॉ. मिनाक्षी राणा भूषण ने बताया कि इस तरह के रोजाना उनकी ओपीडी में 3 से 4 मरीज आ रहे हैं। हालांकि कई गंभीर मरीजों के ऑपरेशन भी किए जाते हैं। हर माह ओपीडी में इस तरह के करीब 92 मरीज आ जाते हैं।
सबसे ज्यादा महिलाओं की ब्रेस्ट में पाई जाती है गांठ
कैंसर की गांठ शरीर के अलग-अलग हिस्सों में हो सकती है। महिलाओं में ब्रेस्ट में सबसे ज्यादा गांठ पाई जाती है। ऐसे में ब्रेस्ट का शेप बदल जाता है और गांठ महसूस हो सकती है या निप्पल से खून निकल सकता है। इसके अलावा गर्दन में थायरॉइड में गांठ डेवलप हो सकती है। कैंसर की गांठ का शेप शुरुआत में छोटा हो सकता है, जो सिर्फ कुछ मिलीमीटर का हो सकता है। जैसे-जैसे कैंसर का इंफेक्शन बढ़ता है, यह गांठ शेप में बड़ी होती जाती है। जब यह गांठ 1 से 2 सेंटीमीटर से अधिक हो जाती है, तो यह चिंता का कारण बन सकती है। कभी भी शरीर में कोई गांठ दिखे तो संबंधित विशेषज्ञ का परामर्श लें।
विज्ञापन
ओपीडी में आने वाली हर मरीज को किया जा रहा जागरूक
डॉ. मिनाक्षी राणा भूषण ने बताया कि अटल कैंसर केयर केंद्र में 112 नंबर कमरे में उनकी ओपीडी होती है। जांच के लिए आने वाले मरीजों व उनके तीमारदारों को समय-समय पर शरीर के किसी भी हिस्से में गांठ को नजरअंदाज न करने के लिए जागरूक किया जाता है। यहीं कारण है कि जागरूक बढ़ने पर महिलाएं सामने आती है। शुरुआती चरण में इस तरह की गांठ का दवाओं से ही उपचार संभव है।
विज्ञापन