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गुरु पूर्णिमा गुरु के प्रति नतमस्तक होकर कृतज्ञता व्यक्त करने का दिन
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अंबाला सिटी। गुरु के प्रति नतमस्तक होकर कृतज्ञता व्यक्त करने के दिन को ही गुरु पूर्णिमा कहा गया है। गुरु के लिए पूर्णिमा से बढ़कर और कोई तिथि नहीं हो सकती है, जो स्वयं में पूर्ण है। यह सद्विचार गीता देवी महाराज ने सिटी के नदी मोहल्ला स्थित श्री अनंत प्रेम मंदिर में गुरु पूर्णिमा महोत्सव के दौरान कहे। बुधवार को गद्दीनशीन गीता देवी महाराज की अध्यक्षता में गुरु पूर्णिमा महोत्सव श्रद्घा पूर्वक मनाया। गीता देवी महाराज व मंदिर की समस्त देवियों ने अपने पूज्य गुरुदेव स्वामी अनंत प्रकाश महाराज, सद्गुरु सर्वव्यापी जीवन मुक्त महाराज, शील जी महाराज व अमृत देवी जी महाराज के स्वरूपों को नमन किया।
गीता देवी महाराज ने सत्संग के दौरान उपस्थित भक्तों को संबोधित करते हुए कहा कि अंधकार को हटाकर प्रकाश की ओर ले जाने वाले को गुरु कहा जाता है। सद्गुरु की कृपा से ईश्वर का साक्षात्कार संभव है। उन्होंने कहा कि पूर्णिमा के चंद्रमा की भांति जिनके जीवन में केवल प्रकाश है, वही शिष्यों के अंत:करण में ज्ञान रूपी चंद्र की किरणें बिखेर सकता है। इस दिन गुरुदेव के चरणों में समस्त श्रद्धा अर्पित कर अपनी कृतज्ञता ज्ञापित करनी चाहिए। गुरु कृपा असंभव को संभव बनाती है।
गीता देवी महाराज ने बताया कि गुरु कृपा शिष्य के हृदय में अगाध ज्ञान का संचार करती है। इस अवसर पर हवन यज्ञ का आयोजन किया। मंत्र उच्चारण पंडित तिलक राज शर्मा व पंडित सुरेश ओझा ने किया। इससे पूर्व गत दिवस से रखे गए श्रीमद्भागवत महापुराण व श्रीरामचरित्र मानस के अखंड पाठ का भोग डाला गया। इस अवसर पर श्री हरमिलाप सेवक सभा के सुरजीत नागपाल, राममूर्ति पुनियानी, राकेश अरोड़ा, पंकज भाटिया, हरियोग वधवा, टोनी चावला, अनमोल छाबड़ा आदि ने व्यवस्थाएं बनाने में सहयोग दिया। समारोह का समापन विशाल भंडारे से हुआ।
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गीता देवी महाराज ने सत्संग के दौरान उपस्थित भक्तों को संबोधित करते हुए कहा कि अंधकार को हटाकर प्रकाश की ओर ले जाने वाले को गुरु कहा जाता है। सद्गुरु की कृपा से ईश्वर का साक्षात्कार संभव है। उन्होंने कहा कि पूर्णिमा के चंद्रमा की भांति जिनके जीवन में केवल प्रकाश है, वही शिष्यों के अंत:करण में ज्ञान रूपी चंद्र की किरणें बिखेर सकता है। इस दिन गुरुदेव के चरणों में समस्त श्रद्धा अर्पित कर अपनी कृतज्ञता ज्ञापित करनी चाहिए। गुरु कृपा असंभव को संभव बनाती है।
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गीता देवी महाराज ने बताया कि गुरु कृपा शिष्य के हृदय में अगाध ज्ञान का संचार करती है। इस अवसर पर हवन यज्ञ का आयोजन किया। मंत्र उच्चारण पंडित तिलक राज शर्मा व पंडित सुरेश ओझा ने किया। इससे पूर्व गत दिवस से रखे गए श्रीमद्भागवत महापुराण व श्रीरामचरित्र मानस के अखंड पाठ का भोग डाला गया। इस अवसर पर श्री हरमिलाप सेवक सभा के सुरजीत नागपाल, राममूर्ति पुनियानी, राकेश अरोड़ा, पंकज भाटिया, हरियोग वधवा, टोनी चावला, अनमोल छाबड़ा आदि ने व्यवस्थाएं बनाने में सहयोग दिया। समारोह का समापन विशाल भंडारे से हुआ।
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