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Ambala News: लंपी से बचाव के लिए गायों में लगा दी गोट पॉक्स की वैक्सीन, टेस्ट में असर कम

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 28 Apr 2023 02:55 AM IST
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Goat pox vaccine was applied to cows to prevent lumpy, less effect in test
अंबाला। देश में लंपी स्किन डिजीज (एलएसडी) फैलने पर पशुओं को बचाव के लिए गोट पॉक्स की वैक्सीन दी गई, मगर इस वैक्सीन को लेकर अब सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि महाराष्ट्र से हाल ही में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के पास कुछ आंकड़े आए जिन्होंने सभी वैज्ञानिकों को चिंता में डाल लिया।
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दरअसल, महाराष्ट्र में करीब सवा करोड़ से अधिक पशुओं को एलएसडी बीमारी से बचाने के लिए गोट पॉक्स की वैक्सीन लगाई गई थी, मगर रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि जिन पशुओं को वैक्सीन दी गई, उनमें से करीब चार लाख से अधिक पशुओं में वैक्सीन लगाने के बावजूद वे संक्रमित हो गए। सिर्फ यह नहीं बल्कि 30 हजार से अधिक पशुओं की मौत भी हो गई। वैज्ञानिकों ने पहले ही दावा किया था कि गोट पॉक्स वैक्सीन को बकरी के एलएसडी वायरस से तैयार किया गया था। जबकि इसका गोवंश पर कैसा असर होगा, इसको लेकर स्टडी नहीं थी। इसके बावजूद लंपी स्किन डिजीज फैली तो आनन-फानन में केंद्रीय पशुपालन विभाग को गोट पॉक्स की वैक्सीन की अनुमति देनी पड़ी, जिसके परिणाम अभी महाराष्ट्र में सामने आ गए हैं। अब दूसरे राज्यों से भी रिपोर्ट ली जा रही है कि वहां किस प्रकार के वैक्सीन के परिणाम रहे।
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दो सप्ताह से सीडीएससीओ पर स्वदेशी वैक्सीन की लटकी फाइल

इधर आईसीएआर द्वारा बनाई गई स्वदेशी एलएसडी वैक्सीन को भारत सरकार के पशुपालन मंत्रालय ने अनुमति दे दी है, मगर अब फाइल सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल आर्गेनाइजेशन (सीडीएससीओ) के पास दो सप्ताह से अटकी हुई है। इस विभाग का प्रोसेस पूरा होने के बाद ही कंपनियां स्वदेशी लंपी स्किन डिजीज की वैक्सीन को तैयार कर सकेंगी। गौरतलब है कि इस वैक्सीन के लिए चार कंपनियों ने एनआरसीई से अगस्त 2022 में तकनीक ली थी, जिसमें बॉयोवैट प्राइवेट लिमिटेड बंगलौर, इंडियन इम्नुनॉलोजिकल्स लिमिटेड हैदराबाद, हैस्टर बॉयोसाइंसेस और सरकारी इंस्टीट्यूट ऑफ वेटरनरी बॉयोलोजिकल प्रोडक्ट्स पुणे शमिल हैं। इसमें बॉयोवैट सबसे आगे चल रही है।
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गोट पॉक्स की वैक्सीन पर डब्ल्यूओएएच ने राय रखी

हाल ही में वर्ल्ड ऑर्गेनाइजेशन फॉर एनिमल हेल्थ (डब्ल्यूओएएच) की बैठक इस साल मार्च में हुई हुई थी, जिसमें सामने आया कि गोटपॉक्स और शीप पॉक्स की वैक्सीन लंपी स्किन डिजीज में अधिक कारगर नहीं हैं। इसका प्रयोग न करने की सलाह दी है।

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बॉयोवैट ने गोटपॉक्स की वैक्सीन को लैब में दी थी चुनौती

एलएसडी वैक्सीन पर काम कर रही बॉयोवैट ने अपनी लैब में गोट पॉक्स की वैक्सीन लगाकर जब लंपी स्किन डिजीज के वायरस से चैलेंज किया गया तो प्रोटेक्शन शून्य प्रतिशत आया, जिसकी रिपोर्ट केंद्रीय पशुपालन मंत्रालय को भी बॉयोवैट की तरफ से सौंपी गई है।

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मानसून के लिए फिर बीमारी आने का बढ़ा खतरा

मौजूदा समय में राजस्थान, महाराष्ट्र और कर्नाटक में कुछ स्थानों पर पशुओं में लंपी स्किन डिजीज के नए मामले मिलने शुरू हो गए हैं। वहीं वैज्ञानियों का दावा है कि मानसून आने के बाद यह बीमारी पिछले साल की तरह पैर पसार सकती है, क्योंकि यह मक्खी, मच्छर व चिचड़ जिनकी संख्या मानसून के बाद अधिक हो जाती है, इनके प्रभाव से यह बीमारी पशुओं में फैल सकती है। आईसीएआर के हिसार स्थित राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिकों द्वारा तैयार स्वदेशी वैक्सीन गायों से निकालें एलएसडी वायरस से तैयार हुई है, इसलिए यह अधिक सुरक्षित और प्रभावी है।




वर्जन---------

अभी आईसीएआर द्वारा बनाई लंपी डिजीज की वैक्सीन सीडीएससीओ की अनुमति के इंतजार में है। मानसून तक यह वैक्सीन लगा दी जाए तो अच्छा है ताकि पशुओं को इस बीमारी से सुरक्षा कवच मिले।---------डा. बीएन त्रिपाठी, उप महानिदेशक, पशु प्रभाग, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली
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