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Ambala News: मासूम से छेड़छाड़ पर दोषी को पांच साल कैद
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अंबाला सिटी। छावनी की नाबालिग पीड़िता के साथ आइसक्रीम खिलाने के बहाने छेड़छाड़ करने वाले 45 वर्षीय दोषी को पॉक्सो एक्ट की विशेष अदालत ने पांच साल कठोर कारावास की सजा सुनाई। जब दोषी ने यह काम किया उस समय पीड़िता महज छह साल की थी।
डिप्टी डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी सुरजीत सिंह ने बताया कि इस मामले में नौ गवाहों को सुनने के बाद पॉक्सो एक्ट की विशेष अदालत में एडीजे मनपाल रमावत ने यह फैसला सुनाया। इसके साथ ही कोर्ट ने दोषी पर पांच हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है और अर्थदंड नहीं भरने की दशा में छह महीने के अतिरिक्त कारावास की सजा सुनाई है।
दोषी को यह सजा पॉक्सो एक्ट की धारा 10 के तहत सुनाई गई। सिर्फ यह नहीं बल्कि कोर्ट ने यह भी कहा है कि दोषी किसी भी तरह से नरमी का हकदार नहीं है। उसे अधिनियम के तहत अधिकतम सजा दी जा सकती है। वहीं दूसरी तरफ कोर्ट ने यह भी कहा है कि पीड़िता के मानसिक स्तर पर जिस प्रकार से हालातों का प्रभाव रहा है उसको किसी भी प्रकार के मुआवजे से पूरा नहीं किया जा सकता है। मगर फिर भी 1 लाख रुपये से पीड़िता की मदद की जाए। इस काम के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की जिम्मेदारी लगाई गई है।
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फरवरी में की थी छेड़छाड़
छावनी के एक क्षेत्र में रहने वाली महिला ने पुलिस को शिकायत देते हुए बताया कि वह अपने काम पर गई थी। उसकी बड़ी बेटी घर पर थी। वह सायं को साढ़े सात बजे घर लौटकर आई तो देखा उसकी छह वर्षीय बेटी सहमी बैठी थी। महिला ने जब बेटी से कारण पूछा तो उसने बताया कि फरवरी 2023 में उसे पड़ोस से एक अंकल ने आइसक्रीम दिलाई और अपने घर ले गए थे। यहां उन्होंने उसके कपड़े उतारने का प्रयास किया। इतने में ही अंकल की पत्नी ने पीड़िता को आवाज लगा दी। आवाज आते ही अंकल ने उसे छोड़ दिया और वह सीधे अपने घर भाग गई। इस घटना को सुनने के बाद पीड़िता की मां ने डायल 112 पर फोन किया और आरोपी को पकड़वाया।
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डिप्टी डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी सुरजीत सिंह ने बताया कि इस मामले में नौ गवाहों को सुनने के बाद पॉक्सो एक्ट की विशेष अदालत में एडीजे मनपाल रमावत ने यह फैसला सुनाया। इसके साथ ही कोर्ट ने दोषी पर पांच हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है और अर्थदंड नहीं भरने की दशा में छह महीने के अतिरिक्त कारावास की सजा सुनाई है।
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दोषी को यह सजा पॉक्सो एक्ट की धारा 10 के तहत सुनाई गई। सिर्फ यह नहीं बल्कि कोर्ट ने यह भी कहा है कि दोषी किसी भी तरह से नरमी का हकदार नहीं है। उसे अधिनियम के तहत अधिकतम सजा दी जा सकती है। वहीं दूसरी तरफ कोर्ट ने यह भी कहा है कि पीड़िता के मानसिक स्तर पर जिस प्रकार से हालातों का प्रभाव रहा है उसको किसी भी प्रकार के मुआवजे से पूरा नहीं किया जा सकता है। मगर फिर भी 1 लाख रुपये से पीड़िता की मदद की जाए। इस काम के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की जिम्मेदारी लगाई गई है।
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फरवरी में की थी छेड़छाड़
छावनी के एक क्षेत्र में रहने वाली महिला ने पुलिस को शिकायत देते हुए बताया कि वह अपने काम पर गई थी। उसकी बड़ी बेटी घर पर थी। वह सायं को साढ़े सात बजे घर लौटकर आई तो देखा उसकी छह वर्षीय बेटी सहमी बैठी थी। महिला ने जब बेटी से कारण पूछा तो उसने बताया कि फरवरी 2023 में उसे पड़ोस से एक अंकल ने आइसक्रीम दिलाई और अपने घर ले गए थे। यहां उन्होंने उसके कपड़े उतारने का प्रयास किया। इतने में ही अंकल की पत्नी ने पीड़िता को आवाज लगा दी। आवाज आते ही अंकल ने उसे छोड़ दिया और वह सीधे अपने घर भाग गई। इस घटना को सुनने के बाद पीड़िता की मां ने डायल 112 पर फोन किया और आरोपी को पकड़वाया।